June 21, 2021

Nishpaksh Dastak

Nishpaksh Dastak

योग का वैज्ञानिक आधार क्या है….?

कुमार कृष्णन

योग को आज पूरे विश्व में मान्यता प्राप्त है । विज्ञान भी योग के चमत्कार को नमस्कार करता है ?विज्ञान समझने का प्रयास करता है जबकि योग अनुभव दिलाता है,दोनों में यही अंतर है। आप आसमान में डूबते हुए सूर्य की लालिमा को देखते हो,जो बादलों को विभिन्न रंगों में लाती है और आप सूर्यास्त के सौंदर्य का बखान करते हैं, लेकिन बैज्ञानिक जब उस सूर्यास्त को देखता है तो यही देखता है कि किस प्रकार सूर्य की किरणें वायुमंडल के हवा के कणों के साथ टकराकर अलग-अलग रंगों को उत्पन्न कर रही है। विज्ञान के दायरे में सौंदर्य की कल्पना एटोमिक स्तर के प्रखंडों और प्रक्रिया में बंट जाती है। सौंदर्य का आभास होता नहीं है,लेकिन विज्ञान के द्वारा इस बात को समझ पाते हैं कि सूर्यास्त का क्या कारण है….?

दैनिक जीवन में योग एक पद्धति एक पद्धति

जन समूह व साधकों के बीच योग के भिन्न-भिन्न व कई प्रकार के मार्ग व विधियां प्रचलित हैं। जैसे ज्ञान योग, कर्म योग, संन्यास योग, हठयोग, मंत्र योग, तंत्र योग, कुण्डलिनी योग, भक्ति योग, आदि।

विज्ञान के द्वारा जान पाते हैं कि योग की उपयोगिता क्या है? बिहार योग विद्यालय के माध्यम से बहुत से चिकित्सात्मक और वैज्ञानिक अनुसंधान हुए हैं कि कौन सा अभ्यास किस रोग में सहायक हो सकता है। योग के आसन और प्राणायाम से शरीर को किस प्रकार व्यवस्थित,सशक्त और उर्जावान बना सकते हैं। बिहार में मेडिकल कॉलेज के छात्रों को योगाथेरेपी की ट्रेनिंग दी जा रही है। जो अनुसंधान कार्य संसाधन या व्यवस्था की कमी से भारत में नहीं हो सकता है,उन्हें बाहर के देशों में किया।

आस्ट्रेलिया में छह कैसर मरीजों को एक साल योग की शिक्षा दी गयी तो पाया गया कि उनका कैंसर रिमिशन में चला गया है। इंगलैंड में एचआईवी के मरीजों पर प्रयोग किया गया। मनोरोग में योग के प्रयोग हुए हैं। तनाव या मनोरोग मानसिक असंतुलन और चंचलता का कारण होता है। स्ट्रेस मैनेजमेंट के अनेक कोर्स चलाए गए हैं,जिसके साकारात्मक परिणाम आए हैं।योग जीवन का विज्ञान है शरीर का विज्ञान नहीं।

टीम-09 को मुख्यमंत्री योगी का निर्देश

योग और ध्यान को, भारत की ही तरह, यूरोप में भी मूल रूप से एक धार्मिक-आध्यात्मिक विषय ही माना जाता था। उनकी उपयोगिता को लेकर गंभीर क़िस्म के वैज्ञानिक शोध नहीं होते थे। किंतु अब वैज्ञानिक जितना ही अधिक शोध कर रहे हैं, उतना ही अधिक मुग्ध हो रहे हैं।