June 21, 2021

Nishpaksh Dastak

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क्या पी0 चिदंबरम की तरह गहलोत अपनी गलती स्वीकार करेंगे….?

जब फ्री वैक्सीन मिलने की घोषणा हो गई है तो राजस्थान में 42 करोड़ रुपए की वैक्सीन क्यों खरीदी जा रही है? इस सवाल का जवाब दें सीएम गहलोत।राज्यों द्वारा वैक्सीन खरीदने की मांग के कथन पर चिदंबरम ने प्रधानमंत्री को चुनौती दी थी।क्या पी चिदंबरम की तरह राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपनी गलती स्वीकार करेंगे?

एस0 पी0 मित्तल

07 जून को सायं 5 बजे जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने राष्ट्रीय संबोधन में 18 से 44 वर्ष वाले युवाओं को फ्री वैक्सीन देने की घोषणा की तो उन्होंने यह भी कहा कि कुछ राज्य और विपक्ष के नेता चाहते थे कि वैक्सीन खरीदने या प्राप्त करने का अधिकार राज्यों के मुख्यमंत्रियों को मिले। इसके लिए केन्द्र सरकार पर दबाव भी बनाया गया। इस स्थिति को देखते हुए ही केन्द्र सरकार ने 18 से 44 वर्ष वालों के लिए वैक्सीन खरीदने की छूट राज्यों को दे दी।

प्रधानमंत्री के संबोधन के बाद पूर्व केन्द्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने नरेन्द्र मोदी पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए उन मुख्यमंत्रियों और नेताओं के नाम बताने को कहा कि जिन्होंने वैक्सीन खरीदने या प्राप्त करने की मांग की थी। हालांकि चिदंबरम के ट्वीट पर पीएम ने तो कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन सोशल मीडिया पर सक्रिय व्यक्तियों ने चिदंबरम को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का पत्र तथा दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल का वीडियो पोस्ट कर दिया। राहुल गांधी का पत्र भी चिदंबरम को भेजा गया, जिसमें राज्यों को सीधे वैक्सीन देने की मांग प्रधानमंत्री से की गई थी।

इन सबूतों के बाद चिदंबरम को अपने पहले के ट्वीट पर गलती स्वीकारनी पड़ी। चिदंबरम ने कहा कि मैं गलत हूं और अपना कथन वापस लेता हंू। मुझे नहीं पता कि राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत को उनके सलाहकारों ने पी चिदंबरम वाली घटना बताई या नहीं, लेकिन 8 जून के अखबारों में गहलोत का एक बयान छपा है। इस बयान में खुद वैक्सीन खरीद कर लगाने की मांग की थी। गहलोत का यह कथन वैसा ही है जैसा उनकी पार्टी के वरिष्ठ नेता चिदंबरम का था। पीएम मोदी ने तो चिदंबरम को भी जवाब नहीं दिया था, लेकिन अशोक गहलोत चाहते तो मेरे फेसबुक पेज www.facebook.com/SPMittalblog को देख सकते हैं, जिस पर पी चिदंबरम का गलती स्वीकारने वाला ट्वीट भी है तथा ममता बनर्जी से लेकर राहुल गांधी के पत्र भी। गहलोत के सलाहकार उन्हें कभी भी चिदंबरम का ट्वीट नहीं दिखाएंगे, क्योंकि इससे सलाहकारों की नौकरी खतरे में पड़ती है। लेकिन गहलोत को यह समझना चाहिए कि गलती स्वीकारने से व्यक्ति कभी भी छोटा नहीं होता है।

गहलोत तो महात्मा गांधी के अनुयायी हैं, इसलिए उन्हें गलती स्वीकारने में हिचक नहीं होनी चाहिए। साथ ही गहलोत को अब यह भी बताना चाहिए कि जब केन्द्र सरकार 18 वर्ष वालों को भी फ्री वैक्सीन दे रही है, तब राजस्थान में 42 करोड़ रुपए की वैक्सीन सीरम और भारत बायोटेक से क्यों खरीदी जा रही है? यदि इन निर्माता कंपनियों को एडवांस राशि दी गई है तो वापस भी ली जा सकती है। कोरोना काल में 42 करोड़ रुपए की राशि बहुत महत्व रखती है।

चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा की ओर से कहा गया है कि पूर्व में इन दोनों कंपनियों को 100 करोड़ रुपए का ऑर्डर दिया जा चुका है। कंपनियों ने 58 करोड़ रुपए की वैक्सीन तो सप्लाई कर दी है, शेष 42 करोड़ की वैक्सीन 9 जून के बाद प्राप्त होगी। गहलोत चाहे तो प्रदेश की जनता के 42 करोड़ रुपए बचा सकते हैं। खुद राजस्थान सरकार ने माना है कि 18 से 44 वर्ष वालों के लिए केन्द्र से फ्री वैक्सीन मिलने पर 3 हजार करोड़ रुपए की बचत होगी।