आत्म निर्भर भारत कार्यक्रम के तहत केन्द्र सरकार द्वारा राज्यों से संवाद- मुख्यमंत्री

  • मुख्यमंत्री की केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री के साथ एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर फण्ड के सम्बन्ध में आयोजित वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग सम्पन्न।
  • राज्य सरकार ने कोविड लाॅकडाउन और अनलाॅक के दौरान किसानों का पूरा ध्यान रखा, जिसके चलते प्रदेश में कृषि कार्यों में कोई दिक्कत नहीं आयी।
  • पशुपालन विभाग द्वारा किसान क्रेडिट कार्ड योजना के अन्तर्गत पशुपालन क्षेत्र में कार्य करने वाले कृषकों को भी आच्छादित करने की कार्यवाही आरम्भ।
  • केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने राज्य कृषि उत्पादन मण्डी परिषद, उ0प्र0 द्वारा
  • अपनाए गए माॅडल की प्रशंसा करते हुए अन्य राज्यों को इसे अपनाने का सुझाव दिया।


लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि राज्य सरकार ने कोविड लाॅकडाउन और अनलाॅक के दौरान किसानों का पूरा ध्यान रखा, जिसके चलते प्रदेश में कृषि कार्यों में कोई दिक्कत नहीं आयी। कोविड-19 के परिप्रेक्ष्य में भारत सरकार द्वारा लाॅकडाउन घोषणा के समय उत्तर प्रदेश में राई, सरसों, चना, मटर, मसूर आदि फसलों की कटाई, मड़ाई का कार्य पूर्ण हो चुका था। आत्म निर्भर भारत कार्यक्रम के तहत केन्द्र सरकार द्वारा राज्यों से संवाद स्थापित किया गया, जिसका लाभ राज्यों की सरकारों को मिला।

सरकारी आवास पर आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर के साथ एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर फण्ड के सम्बन्ध में आयोजित वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के दौरान व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि लाॅकडाउन का प्रभाव गेहूं की कटाई, मड़ाई के साथ-साथ अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ सकता था, परन्तु राज्य सरकार ने लाॅकडाउन के दौरान कृषि कार्यों को करने की अनुमति दी, जिससे कोई कठिनाई उत्पन्न नहीं हुई।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश में गेहूं की कटाई, मड़ाई के लिए 4,774 और हारवेस्टर 5,153 रीपर संचालित किए गए। साथ ही, अन्य राज्यों से हारवेस्टर एवं रीपरांे को प्रदेश में प्रवेश की अनुमति दी गई, जिससे गेहूं एवं अन्य रबी फसलों की कटाई, मड़ाई समय एवं सुगमता से सम्पन्न हुई। किसानों द्वारा रबी से उत्पादित फसलों की खरीद के लिए 5,953 सरकारी क्रय केन्द्र खोले गये एवं क्रय केन्द्रों तक खाद्यान्नों के परिवहन की अनुमति दी गयी। इन सरकारी क्रय केन्द्रों से 35.77 लाख टन गेहूं, 38,717 मीट्रिक टन चना तथा 319 मीट्रिक टन सरसों की खरीद हुई। दलहन की खरीद गत वर्ष में कुल खरीद 2,362 मीट्रिक टन खरीद से 16 गुना अधिक रही। जिसकी धनराशि किसानों के खाते में सीधे प्रेषित की गयी।

  • कोविड-19 के दौरान गन्ना मिलों द्वारा 150 लाख लीटर सेनिटाइजर का निर्माण कर जन सामान्य को विक्रय के लिए उपलब्ध कराया गया।
  • किसानों को उनके उत्पादन के स्वेच्छानुसार विक्रय की सुविधा देते हुए 45 कृषि उत्पादों को मण्डी शुल्क से मुक्त किया गया।
  • प्रदेश के प्रत्येक विकास खण्ड में 2-2 कृषक उत्पादक संगठनों के गठन के लिए राज्य सरकार द्वारा नीति निर्धारण की प्रक्रिया विचाराधीन।

गन्ना उत्तर प्रदेश की सर्वाधिक महत्वपूर्ण कैश क्राॅप है, राज्य सरकार के निर्देशानुसार प्रदेश की सभी 119 चीनी मिलें पूरी क्षमता से चलाई गयीं। इस वर्ष 1,118.02 लाख मी0 टन गन्ने की पेराई से 126.36 लाख मी0 टन चीनी का उत्पादन हुआ। कोविड-19 के दौरान गन्ना मिलों द्वारा 150 लाख लीटर सेनिटाइजर का निर्माण कर जन सामान्य को विक्रय के लिए उपलब्ध कराया गया। गन्ना मिलों द्वारा इस वर्ष 1500 करोड़ रुपए मूल्य की विद्युत का भी उत्पादन किया गया। किसानों को उनके उत्पादन के स्वेच्छानुसार विक्रय की सुविधा देते हुए 45 कृषि उत्पादों को मण्डी शुल्क से मुक्त किया गया। इससे किसानों को अपने उत्पादों को अपनी सुविधानुसार अच्छे मूल्य पर विक्रय करने का अवसर मिला है, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो सकेगी। भारत सरकार द्वारा किसानों के उन्नयन के लिए पूरे देश में 10 हजार कृषक उत्पादक संगठनों के गठन के लिए निर्धारित लक्ष्य के अन्तर्गत प्रदेश के प्रत्येक विकास खण्ड में 2-2 कृषक उत्पादक संगठनों के गठन के लिए राज्य सरकार द्वारा नीति निर्धारण की प्रक्रिया विचाराधीन है।

राज्य सरकार द्वारा कृषि निवेशों की पर्याप्त व्यवस्था के चलते जायद-2020 के बुवाई के लक्ष्य के सापेक्ष 8.12 लाख हेक्टेयर के स्थान पर 9.3 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल का आच्छादन किया गया। वर्तमान खरीफ में धान एवं अन्य फसलों की बुवाई में खरीफ आच्छादन लक्ष्य 95.92 लाख हेक्टेयर के सापेक्ष 95.98 लाख हेक्टेयर की पूर्ति की जा चुकी है। वर्तमान खरीफ में राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में कुल 37.23 लाख मीट्रिक टन लक्ष्य के सापेक्ष 43.40 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों की व्यवस्था करायी गयी है। वर्तमान मानसून में पूरे प्रदेश में एक साथ बरसात होने के कारण खरीफ फसलों के लिए यूरिया की मांग में वृद्धि हुई जिसकी युद्ध स्तर पर पूर्ति सुनिश्चित कराते हुए वितरण की व्यवस्था करायी  जा रही है। विक्रय प्रक्रिया में अनियमितता पाये जाने पर आवश्यक कार्यवाही की जा रही है। कृषि विभाग द्वारा प्रदेश में किसानों को निर्धारित मूल्य पर सुव्यवस्थित ढंग से उर्वरक उपलब्ध कराने हेतु मुख्यालय एवं मण्डलीय अधिकारियों को प्रदेश के समस्त जनपदों में भेजकर विशेष अभियान चलाया गया।

  • आत्म निर्भर भारत कार्यक्रम के तहत केन्द्र सरकार द्वारा राज्यों से संवाद स्थापित किया गया, जिसका लाभ राज्यों की सरकारों को मिला।
  • किसानों द्वारा रबी से उत्पादित फसलों की खरीद के लिए 5,953 सरकारी क्रय केन्द्र खोले गये एवं क्रय केन्द्रों तक खाद्यान्नों के परिवहन की अनुमति दी गयी।
  • राज्य सरकार द्वारा सभी 119 चीनी मिलें पूरी क्षमता से चलाई गयीं।

आत्मनिर्भर भारत अभियान के अन्तर्गत किसानों को उनके उत्पादन के सुरक्षित भण्डारण के उद्देश्य से आधारित 5-5 हजार मीट्रिक टन क्षमता के 37 भण्डार गृहों (गोदामों) का निर्माण राज्य भण्डारण निगम द्वारा मण्डी परिषद से प्राप्त निःशुल्क भूमि पर कराया जा रहा है। इन गोदामों में 10 प्रतिशत स्थान किसानों को उनके उत्पादों के भण्डारण के लिए आरक्षित कराया जायेगा। कृषकों के लिए 30 दिन तक भण्डारण निःशुल्क होगा और 30 दिन से अधिक भण्डारण करने पर शुल्क में 30 प्रतिशत छूट दी जायेगी।। के पंजीकृत गोदामों में रखे गये कृषि उपज के सापेक्ष म.छॅत् ;मसमबजतवदपबंससल दमहवजपंजमक ूंतमीवनेम तमबमपचजेद्ध निर्गत की जायेगी जिसे प्रतिभूति की भाॅति मान्यता प्राप्त होगी। इसके आधार पर कृषकों को बैंक से ऋण सुविधा प्राप्त हो सकेगी, जिससे यह अपने कृषि एवं अन्य कार्यों की प्रतिपूर्ति कर सकेंगे।

आत्मनिर्भर भारत योजना के अन्तर्गत देश में कृषि एवं कृषि से सम्बन्धित क्षेत्र भण्डारण, प्रसंस्करण एवं कृषि उत्पादन के विपणन से सम्बन्धित आवश्यक अवस्थापना सुविधाओं एवं लाॅजिस्टिक युक्त कोल्ड चेन आदि सुविधाओं के सृजन हेतु आगामी 04 वित्तीय वर्षों (2020-21 से 2023-24 तक) में 1 लाख करोड़ रुपए का विनिवेश करने की योजना है। उत्तर प्रदेश राज्य हेतु लगभग 12,900 करोड़ रुपए की परिव्यय संसूचित है। इस योजना के अन्तर्गत कई प्रकार की अवस्थापना सुविधाओं सहित प्रसंस्करण, कोल्ड चेन, ग्रेडिंग, भण्डारण पैकेजिंग, विपणन से सम्बन्धित कार्य किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस योजना के अन्तर्गत सहकारिता विभाग द्वारा काश्तकारों को अपने फसल उत्पादों के भण्डारण  की सुविधा उपलब्ध कराने हेतु न्याय पंचायत स्तर पर (पैक्स), विकास खण्ड तथा तहसील/जिला स्तर पर क्रय विक्रय समितियों, पी0सी0एफ0, यू0पी0एस0एस0 आदि सहकारी संस्थाओं द्वारा 100 मीट्रिक टन से लेकर 5,000 मीट्रिक टन तक क्षमता के कुल 8,50,000 मीट्रिक टन क्षमता के गोदाम 5,380 भिन्न-भिन्न स्थानों पर बनाने की योजना तैयार कर प्रस्तुत की जा रही है। इसमें कुल लागत आगामी चार वित्तीय वर्षों में लगभग 2,600 करोड़ रुपए अनुमन्य है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन गोदामों में अपना कृषि उत्पादन रखकर काश्तकार एक गोदाम रसीद प्राप्त करेगा। यदि वह चाहे तो इस गोदाम रसीद के आधार पर अपनी उपज के बाजार मूल्य की लगभग 80 प्रतिशत समतुल्य धनराशि तक उ0प्र0 कोआॅपरेटिव बैंक/जिला सहकारी बैंक/अन्य व्यवसायिक बैंकों से ऋण प्राप्त कर सकेगें। इनमें से प्रथम चरण में दिनांक 09 अगस्त, 2020 को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा इस योजना का शुभारम्भ करने के सन्दर्भ में नाबार्ड द्वारा प्रदेश में 401 पात्र सहकारी समितियों को 69.47 करोड़ रुपए के स्वीकृति पत्र निर्गत किये गये हैं।

उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा आत्मनिर्भर भारत अभियान के अन्तर्गत प्रधानमंत्री सूक्ष्य खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पी0एम0एफ0एम0ई0) में 05 वर्षों की अवधि हेतु 37,805 सूक्ष्म खाद्य उद्यमों के उन्नयन का भौतिक लक्ष्य निर्धारित है। योजनान्तर्गत चालू वर्ष में संगठनात्मक संरचनाओं के गठन, सर्वेक्षण एवं अध्ययन रिपोर्ट तैयार करने तथा अन्य काॅमन सुविधाओं के सृजन के लिए 18.59 करोड़ रुपए की धनराशि अवमुक्त की गयी है। प्रदेश सरकार द्वारा योजना का बेस-लाइन सर्वे ओ0डी0ओ0पी0 का चिन्हांकन पूर्ण कर लिया गया है तथा मंत्री परिषद द्वारा योजना को अंगीकृत भी कर लिया गया है।

प्रदेश में वर्ष 2020-21 हेतु मौन पालन के उद्देश्य से स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराये जाने हेतु ‘स्टेट बी-कीपिंग एण्ड हनी मिशन उ0प्र0’ के अन्तर्गत वर्ष 2020-21 हेतु नेशनल बी-बोर्ड, भारत सरकार को मधुमक्खी पालन की कार्ययोजना हेतु 8153.48 लाख रुपए का प्रस्ताव प्रेषित किया गया है। राष्ट्रीय बी-कीपिंग एवं हनी मिशन के अन्तर्गत वाराणसी के सेवापुरी विकास खण्ड में प्रशिक्षण हेतु 6.78 लाख रुपये के प्रस्ताव को राष्ट्रीय बी बोर्ड द्वारा स्वीकृति प्रदान की गई है। आत्मनिर्भर भारत अभियान के अन्तर्गत मत्स्य विभाग द्वारा अद्यतन 13,937 मत्स्य पालकों के आवेदन पत्र बैंक शाखाओं को प्रेषित किये गये, जिसके सापेक्ष 3,714 किसान क्रेडिट कार्ड 39.18 करोड़ रुपए मूल्य के निर्गत कराये गये।

प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के अन्तर्गत मत्स्य पालन और मात्स्यिकी के विकास से सम्बन्धित 586 करोड़ रुपए की परियोजना लागत मूल्य के 5,668 परियोजना प्रस्ताव आॅनलाइन प्राप्त हुए हैं। प्रदेश में उक्त योजना का कार्यान्वयन प्रक्रियाधीन है। उन्होंने कहा कि पशुपालन विभाग द्वारा किसान क्रेडिट कार्ड योजना के अन्तर्गत पशुपालन क्षेत्र में कार्य करने वाले कृषकों को भी आच्छादित करने की कार्यवाही आरम्भ कर दी गयी है। 1.74 लाख आवेदन-पत्र बैंकों को प्रेषित किये गये है, जिसमें से 20,800 किसान क्रेडिट कार्ड निर्गत हो गये हैं। शेष प्रार्थना-पत्रों को भी स्वीकृत कराने के लिए प्राथमिकता से कार्यवाही की जा रही है।

27 प्रमुख मण्डियों को वर्तमान में आधुनिक किसान मण्डी के रूप में विकसित किया जा रहा है। 24 मण्डियों में फल और सब्जी आदि को सुरक्षित व गुणवत्तापूर्वक रखने हेतु कोल्ड स्टोरेज व राइपनिंग चैम्बर की सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है, ताकि कृषक अपनी उपज का सही मूल्य मिलने के लिए एक-दो दिवस की प्रतीक्षा भी कर सकें तथा राइपनिंग चैम्बर द्वारा उपज को उचित प्रकार व गुणवतायुक्त ढंग से पका सकें। इस परियोजनान्तर्गत मण्डी में 20 एम0टी0 कैपेसिटी के राइपनिंग चैम्बर तथा 10 एम0टी0 क्षमता का कोल्ड चैम्बर स्थापित किया जायेगा। प्रत्येक पर लगभग 03 करोड़ रुपए की लागत आएगी। इस परियोजना को वित्तीय वर्ष 2020-21 में पूर्ण किया जाना लक्षित है।

वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के दौरान अपने विचार व्यक्त करते हुए केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि लाॅकडाउन के दौरान केन्द्र सरकार ने कृषि कार्याें को छूट दी थी। इसके चलते कृषि की अच्छी पैदावार हुई है। उन्हांेने कहा कि फसलों की कटाई के बाद प्रोसेसिंग की सुविधा न होने से किसानों को काफी नुकसान होता है। किसानों की उपज बढ़ाने के लिए और अधिक कृषि अवस्थापना सुविधाएं सृजित करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री जी द्वारा 1 लाख करोड़ रुपए के कृषि निवेश पैकेज की घोषणा की गई थी। उन्होंने कहा कि सभी राज्य इस पैकेज के तहत उपलब्ध कराई गई धनराशि का उपयोग अपने-अपने राज्यों में कृषि अवस्थापना सुविधाओं के विस्तार और सुदृढ़ीकरण के लिए करें। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने राज्य कृषि उत्पादन मण्डी परिषद, उत्तर प्रदेश द्वारा अपनाए गए माॅडल की प्रशंसा करते हुए अन्य राज्यों को इसे अपनाने का सुझाव दिया। सहकारिता मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा, उद्यान, कृषि विपणन एवं कृषि निर्यात राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीराम चौहान,अपर मुख्य सचिव कृषि देवेश चतुर्वेदी, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री एस0पी0 गोयल, सचिव मुख्यमंत्री आलोक कुमार, निदेशक मण्डी परिषद जितेन्द्र प्रताप सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।