कानून-व्यवस्था तथा अपराध नियंत्रण सरकार की प्राथमिकता

  1. कानून-व्यवस्था तथा अपराध नियंत्रण उ0प्र0 सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल
  2. अपराध और भ्रष्टाचार के विरुद्ध वर्तमान प्रदेश सरकार की जीरो टाॅलरेंस नीति का ही यह नतीजा है कि प्रदेश में अपराध न्यूनतम स्तर पर।
  3. राज्य सरकार के कार्यकाल में अपराधों में गिरावट का सिलसिला निरन्तर जारी घटित अपराधों के तुलनात्मक आकड़ों के अनुसार वर्तमान सरकार के कार्यकाल में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई।
  4. पाॅक्सो एक्ट के मामलों में प्रभावी पैरवी कराते हुए अपराधियों को सजा दिलायी गयी गुण्डा/गैंगस्टर तथा एन0एस0ए0 के पंजीकृत अभियोगों के तहत वर्तमान सरकार के कार्यकाल में प्रभावी कार्यवाही हुई।
  5. अपराधियों के खिलाफ की गई कार्यवाही में उ0प्र0 देश के अन्य राज्यों तथा केन्द्र शासित प्रदेशों के सापेक्ष अग्रणी स्थान पर।


लखनऊ, उत्तर प्रदेश जनसंख्या की दृष्टि से भारत का सबसे विशाल राज्य है, जहां देश की कुल आबादी के लगभग 17 प्रतिशत लोग रहते हैं। स्वाभाविक है कि इस विशाल राज्य में कानून-व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त बनाए रखना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है, जिसे वर्तमान राज्य सरकार सफलतापूर्वक सम्पादित कर रही है।

यह जानकारी आज यहां देते हुए गृह विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि कानून-व्यवस्था तथा अपराध नियंत्रण उत्तर प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। अपराध और भ्रष्टाचार के विरुद्ध वर्तमान प्रदेश सरकार की जीरो टाॅलरेंस नीति का ही यह नतीजा है कि प्रदेश में अपराध न्यूनतम स्तर पर है। राज्य सरकार के कार्यकाल में अपराधों में गिरावट का सिलसिला निरन्तर जारी है।

प्रदेश में पिछले 9 वर्षों में घटित अपराधों के तुलनात्मक आकड़ों के अनुसार वर्तमान सरकार के कार्यकाल में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। उदाहरण स्वरूप डकैती के मामलों में वर्ष 2016 के सापेक्ष वर्ष 2020 में .74ण्50 प्रतिशत तथा 2012 के सापेक्ष वर्ष 2020 में .74ण्67 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है।

लूट के मामलों में 2016 के सापेक्ष 2020 में .65.29 प्रतिशत तथा 2012 के सापेक्ष 2020 में .54.25 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। हत्या के मामलों में 2016 की तुलना में 2020 में .26.43 प्रतिशत तथा 2012 के सापेक्ष 2020 में .29.74 प्रतिशत की कमी आयी। फिरौती के लिए अपराध के मामलों में वर्ष 2016 के सापेक्ष 2020 में .54.55 प्रतिशत तथा वर्ष 2012 के सापेक्ष वर्ष 2020 में .64.29 प्रतिशत की कमी आयी।

रोड होल्ड अप के मामलों यह गिरावट 100 प्रतिशत रही। वर्तमान सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2017 से लेकर वर्ष 2020 तक रोड होल्ड अप की एक भी वारदात नहीं हुई है। वर्ष 2016 के सापेक्ष वर्ष 2020 में तथा वर्ष 2012 के सापेक्ष वर्ष 2020 में रोड होल्डअप के अपराध में 100 प्रतिशत कमी दर्ज की गई।

बलात्कार के प्रकरण में वर्ष 2013 के सापेक्ष वर्ष 2020 में 25.94 प्रतिशत, वर्ष 2016 के सापेक्ष वर्ष 2020 में .38.74 प्रतिशत तथा वर्ष 2019 के सापेक्ष वर्ष 2020 में .28.13 प्रतिशत की कमी आयी है।

पाॅक्सो एक्ट के मामलों में प्रभावी पैरवी कराते हुए अपराधियों को सजा दिलायी गई है। 1 जनवरी, 2019 से 30 जून, 2020 की अवधि में 922 वादों में सजा हुई। इनमें 5 वादों मंे मृत्यु दण्ड की सजा, 193 में आजीवन कारावास तथा 724 में अन्य सजा हुई।

गुण्डा/गैंगस्टर तथा एन0एस0ए0 के पंजीकृत अभियोगों के तहत वर्तमान सरकार के कार्यकाल में प्रभावी कार्यवाही हुई है। गुण्डा अधिनियम के तहत वर्ष 2012 में 12,149, वर्ष 2016 में 13,615 अभियोग पंजीकृत हुए, जबकि वर्ष 2020 में अब तक इसके अन्तर्गत 17,908 अभियोग पंजीकृत किए जा चुके हैं। गैंगस्टर अधिनियम के तहत वर्ष 2012 में 1,313, वर्ष 2016 में 1,716 तथा वर्ष 2020 में 2,346 अभियोग पंजीकृत हुए। राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत वर्ष 2012 में 44, 2016 में 82 तथा 2020 में 112 अभियोग पंजीकृत किए जा चुके हैं।

देश के विभिन्न राज्यों तथा केन्द्र शासित प्रदेशों में घटित अपराध के आंकड़े गृह मंत्रालय, भारत सरकार की संस्था राष्ट्रीय अपराध रिकाॅर्ड ब्यूरो (एन0सी0आर0बी0) द्वारा समय-समय पर जारी किए जाते हैं। एन0सी0आर0बी0, प्रति लाख आबादी के आधार पर सम्बन्धित राज्य में विभिन्न अपराधों की दर अपनी रिपोर्ट में प्रकाशित करता है। यह एक स्थापित वास्तविक संकेतक है, जो किसी भी राज्य के आकार और जनसंख्या में वृद्धि के प्रभाव को संतुलित करता है। इस प्रकार क्राइम रेट ही अपराधों की सही स्थिति को समझने का एक प्रामाणिक संकेतक है।

क्राइम इन इण्डिया-2018 के अनुसार भारत में कुल 31 लाख 32 हजार 954 आई0पी0सी0 के अपराध पंजीकृत हुए, जिनमें से 3 लाख 42 हजार 355 आई0पी0सी0 के अपराध उत्तर प्रदेश में घटित हुए। यह देश में ऐसे पंजीकृत अपराधों का 10.92 प्रतिशत है, जबकि जनसंख्या के आधार पर उत्तर प्रदेश की आबादी 16.85 प्रतिशत है।

एन0सी0आर0बी0 के अध्याविधिक आकड़ों के अनुसार, वर्ष 2018 में देश के कुल 37 राज्यों तथा केन्द्र शासित प्रदेशांे में घटित विभिन्न अपराधों के तहत डकैती के मामलों में 0.1 प्रतिशत क्राइम रेट के साथ उत्तर प्रदेश का 31वां स्थान, लूट में 1.4 प्रतिशत क्राइम रेट के साथ 20वां स्थान, हत्या में 1.8 प्रतिशत क्राइम रेट के साथ 26वां स्थान, हत्या के प्रयास के मामलांे में 2.2 प्रतिशत क्राइम रेट के साथ 21वां स्थान तथा नकबजनी तथा बलात्कार में 3.7 प्रतिशत क्राइम रेट के साथ क्रमशः 32वां व 24वां स्थान था।

इसी प्रकार शीलभंग में 11.8 प्रतिशत क्राइम रेट के साथ 14वां तथा पाॅक्सो अधिनियम के मामलांे में 6.1 प्रतिशत क्राइम रेट के साथ 23वां स्थान था। महिला सम्बन्धी अपराध में राज्य का स्थान 15वां था। इस प्रकार भा0द0वि0 के तहत विभिन्न अपराध में उत्तर प्रदेश 24वें स्थान पर था। इससे स्पष्ट होता है कि देश के अन्य राज्यों तथा केन्द्र शासित प्रदेशों की तुलना में उत्तर प्रदेश में अपराध नियंत्रित स्थिति में हैं।

अपराधियों के खिलाफ की गई कार्यवाही में उत्तर प्रदेश देश के अन्य राज्यों तथा केन्द्र शासित प्रदेशों के सापेक्ष अग्रणी स्थान पर है। राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो के वर्ष 2018 के अध्याविधिक आकड़ों के मुताबिक, महिला सम्बन्धी अपराधों में दोष सिद्ध 21,146 पर कार्यवाही के साथ उत्तर प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर, साइबर अपराधों में 445 दोष सिद्ध के साथ प्रथम स्थान पर, 34,105 शस्त्रों के जब्तीकरण के साथ प्रथम स्थान पर तथा जाली मुद्रा जब्तीकरण में 237 अपराध पंजीयन के साथ इसमें भी राज्य प्रथम स्थान पर है।

भारतीय दण्ड विधान के अपराधों में 4,14,112 गिरफ्तारियों के साथ उत्तर प्रदेश द्वितीय स्थान पर, भारतीय दण्ड विधान के अपराधों में गिरफ्तार अभिुयक्तों में से 1,44,274 की दोष सिद्धि के साथ द्वितीय स्थान पर, भारतीय दण्ड विधान तथा एस0एल0एल0 के अपराधों में गिरफ्तार अभियुक्तों में से 4,02,801 की दोष सिद्धि के साथ द्वितीय स्थान पर तथा एस0एल0एल0 के अपराधों में गिरफ्तार अभियुक्तों में से 2,58,527 की दोष सिद्धि के साथ तृतीय स्थान पर है। 94.1 करोड़ रुपए की सम्पत्ति की बरामदगी के साथ राज्य का स्थान 6वां है।