कोविड संक्रमण में खुद को झोंकने को मजबूर सहकारिता प्रत्याशी और चुनाव प्रक्रिया में लगे कर्मी-शिवपाल यादव

भ्रष्ट, असक्षम एवं नकारा अधिकारियों द्वारा सरकार में बैठे कुछ लोगों के इशारे पर सहकारिता की मूल भावना का गला घोंटा जा रहा है। चुनाव की आड़ में कोविड संक्रमण में खुद को झोंकने को मजबूर है सहकारिता प्रत्याशी और चुनाव प्रक्रिया में लगे कर्मी। वैश्विक कोरोना वायरस संक्रमण संकट को देखते हुए उ०प्र० सहकारी ग्राम्य विकास बैंक की समस्त शाखाओं का निर्वाचन स्थगित हो।

लखनऊ, प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने उ०प्र० सहकारी ग्राम्य विकास बैंक की समस्त शाखाओं का निर्वाचन स्थगित किए जाने की मांग की है।शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि कुछ भ्रष्ट, असक्षम एवं नकारा अधिकारियों द्वारा सरकार में बैठे कुछ लोगों के इशारे पर सहकारिता की मूल भावना का गला घोंटा जा रहा है ।

शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि पहले तो प्रदेश सरकार द्वारा सहकारी समिति (संशोधन) अध्यादेश को जल्दबाजी में लागू किया गया। प्रबंध समितियों से अधिकारों को लेने से उसका लोकतांत्रिक ढांचा बिखर चुका है और अब कोरोना संकट में जब जल्दबाजी में चुनाव कराकर निर्वाचन आयोग(सहकारिता), चुनाव प्रक्रिया में लगे सरकारी कर्मचारी, डेलीगेट और प्रत्याशी को संक्रमण के जोखिम में ढकेलने जा रहा है। जब सहकारी प्रबंध समितियों से अधिकार पहले ही लिए जा चुके हैं तो इतना जोखिम उठाने से अच्छा है कि सरकार सहकारी प्रबंध कमेटी की जगह सरकारी करण कर दे।

प्रसपा प्रमुख ने कहा कि गांधीजी ने भारतीय समाज और गांवों का गहन अध्ययन किया था। उन्होंने गांवों का विकास सहकारिता से करने की पैरवी की थी। अब किसान नौकरशाही के जाल में फंस कर रह गया है, ऐसे में जिस पवित्र भावना से सहकारिता आन्दोलन का जन्म हुआ था, वह संकट में है। देश ने हाल में ही राष्ट्रपिता की 150वीं जयंती मनाई है। ऐसे में राष्ट्रपिता की दुहाई देने वाली सरकार द्वारा सहकारिता के मूल भावना की हत्या दुःखद है। सहकारी आन्दोलन का जन्म हाशिए पर पड़े गरीब किसानों को सूदखोर महाजनों से मुक्ति दिलाने के लिए हुआ था। सहकारी समितियों की आतंरिक संरचना इसकी शुरुआत से ही लोकतांत्रिक रही है।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त, सहकारिता द्वारा बैंक के निर्वाचन हेतु अधिसूचना 27 दिसम्बर, 2019 में जारी की गई थी, जिसके अनुसार बैंक के निर्वाचन की प्रक्रिया 10 फरवरी, 2020 से 03 अप्रैल, 2020 तक सम्पन्न होनी थी। इसी क्रम में 17 जनवरी, 2020 को चुनाव आयुक्त सहकारिता द्वारा उ०प्र० सहकारी ग्राम्य विकास बैंक के चुनाव को वन टाइम सेटलमेंट और लोनिंग और वसूली में असक्षम साबित हुई 61 शाखाओं के मर्जर के नाम पर आगे बढ़ा दिया था। इसका मुख्य उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करना था।

वन टाइम सेटलमेंट और लोनिंग और वसूली में असक्षम साबित हुई शाखाओं के मर्जर का कार्य अभी भी लम्बित है, इसके आड़ में मतदाता सूची में हेर फेर किया गया है और पुनः 15 जुलाई, 2020 को उ०प्र० सहकारी ग्राम्य विकास बैंक के चुनाव हेतु नई अधिसूचना जारी कर दी गई जिसके अनुसार बैंक के निर्वाचन की प्रक्रिया 21 अगस्त, 2020 से 23 सितम्बर, 2020 तक सम्पन्न होना सुनिश्चित की गई है।

बैंक का निर्वाचन गांव स्तर पर स्थापित बैंक शाखाओं के सदस्यों द्वारा किया जाता है और शाखा स्तर पर निर्वाचन हेतु प्रत्येक प्रत्याशी को प्रचार हेतु गांव-गांव भ्रमण करके सदस्यों से सम्पर्क करना होता है। आज की परिस्थिति में कोरोना महामारी को देखते हुए निर्वाचन हेतु जनसम्पर्क कर पाना व्यवहारिक रूप से संभव नहीं है।

कोरोना संक्रमण के संकट को देखते हुए ही ग्राम पंचायत के चुनाव बढ़ा दिये गये हैं, उत्तर प्रदेश विधान परिषद के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव की तिथि बढ़ा दी गयी है और इसी क्रम में उपर्युक्त दिक्कतों को ही ध्यान में रखते हुए 10 जुलाई 2020 को उ०प्र० सहकारी समिति अधिनियम-1965 की धारा 29(3) में प्रदत्त शक्ति का प्रयोग करते हुए आयोग द्वारा गन्ना विभाग की प्रारम्भिक सहकारी समितियों की निर्वाचन प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से स्थगित किया जा चुका है। अतः इसी आधार पर उ०प्र० सहकारी ग्राम्य विकास बैंक की समस्त शाखाओं का निर्वाचन भी स्थगित हो।

शिवपाल सिंह यादव ने इसी क्रम में आगे कहा कि बहुत से संभावित प्रत्याशी, डेलीगेट और मतदाता वर्तमान में या तो कोरोना संक्रमित के सम्पर्क में आने से क्वारंटाइन में हैं या स्वयं कोरोना से संक्रमित हैं। शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि आज की परिस्थिति में प्रदेश के सहकारिता मंत्री स्वयं क्वारंटाइन हैं, प्रमुख सचिव सहकारित/सहकारिता निबंधक (रजिस्टार) कोरोना पॉजिटिव हैं और अपने घरों में क्वारंटाइन हैं। स्वाभाविक है कि इनसे जुड़े स्टाफ भी क्वारंटाइन में होंगे।

सरकार के दो मंत्रियों को कोरोना संक्रमण से अपनी जान गंवानी पड़ी है। प्रदेश में दर्जन भर विधायक और आधे दर्जन से अधिक मंत्री अब तक कोरोना संक्रमित हो चुके हैं। यदि बैंक का निर्वाचन इस दौरान सम्पन्न कराया जाता है तो न तो ऐसे में सरकार द्वारा जारी स्वास्थ्य दिशा-निर्देशों का पालन सम्भव है और न ही निष्पक्ष चुनाव सम्भव है।

प्रसपा प्रमुख ने यह भी कहा कि देश और प्रदेश पर मंडरा रहे वैश्विक कोरोना वायरस संक्रमण संकट के खिलाफ जंग में उत्तर प्रदेश एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। कोरोना का प्रकोप अब शहरों से आगे बढ़ते हुए गावों में फैल चुका है। ऐसे में यह आवश्यक है कि आने वाले कुछ महीनों में स्वास्थ्य दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करते हुए चुनाव स्थगित किया जाना अति आवश्यक है।