नॉर्मल डिलीवरी के लिए रखें ख्याल….

आज जिंदगी बहुत ही व्यस्त हो गयी है। हर कोई एक से दूसरी जगह लगातार भाग ही रहा है। इस भागदौड़ के चक्कर में इंसान अपने आप को जरा भी समय नहीं दे पाता है, समय नहीं देने के कारण उन्हें तरह तरह बीमारियों और परेशानियों से गुजरना पड़ता है। जिसके कारण उनका शरीर समय से पहले ही बूढ़ा और कमजोर हो जाता है। भागदौड़ की इस जिंदगी में सबसे ज्यादा महिलाओं को परेशानी होती है क्योंकि उन्हें घर के साथ साथ अपने ऑफिस के काम को भी संभालना पड़ता है। इसमें भी सबसे अधिक परेशानियों का सामना प्रेग्नेंसट महिलाओं को करना पड़ता है।

प्रेगनेंसी की अवस्था में हर महिला का यही ख्वाब होता है की उनका शिशु नॉर्मल डिलीवरी से जन्म ले। लेकिन भागदौड़ की वजह से खुद की लाइफस्टाइल, खान पान और गर्भ में पल रहे शिशु पर जरूरत मुताबिक ध्यान नहीं देने के कारण कुछ समस्याएं पैदा हो जाती हैं जिसके कारण नॉर्मल डिलीवरी होने की संभावना कम हो जाती है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर सिजेरियन डिलीवरी का सहारा लेते हैं और डिलीवरी की प्रक्रिया को पूरा करते हैं। लेकिन बहुत से तरकीब मौजूद हैं जिनकी मदद से नॉर्मल डिलीवरी पूर्ण रूप से संभव है।   

नॉर्मल डिलीवरी क्या है 

नॉर्मल डिलीवरी प्रसव की एक प्रक्रिया है जिसमें शिशु का जन्म प्राकृतिक तरीके से महिला की योनि से होता है। आमतौर पर इसमें किसी डॉक्टर, हॉस्पिटल या ऑपरेशन की जरूरत नहीं पड़ती है लेकिन सिजेरियन डिलीवरी यानी की ऑपरेशन में इन सबकी जरूरत पड़ती है। नॉर्मल डिलीवरी हमेशा सिजेरियन डिलीवरी से बेहतर माना जाता है क्योंकि इसमें किसी भी तरह के किसी खतरे की संभावना लगभग नहीं के बराबर होती है। जबकि ऑपरेशन में इसका उलटा है।  

नॉर्मल डिलीवरी क्यों जरूरी है

ऑपरेशन करने से आपको नॉर्मल डिलीवरी के दौरान होने वाले दर्द से तो राहत मिल जाती है लेकिन आगे भविष्य में आपको काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसलिए आपको पूरी कोशिश करनी चाहिए की आप प्रेगनेंसी के दौरान उन सभी कामों को करें जो आपके नॉर्मल डिलीवरी की संभावना को बढ़ाते हैं। प्रिस्टीन केयर के इस बहुत ही खास ब्लॉग में आज हम नॉर्मल डिलीवरी की संभावना को बढ़ाने वाली चीजों के बारे में विस्तार से बात करने वाले हैं।

इस ब्लॉग में लिखी हुई सभी बातें प्रिस्टीन केयर के अनुभवी स्त्री-रोग विश्सज्ञों द्वारा बताई गई हैं। इस ब्लॉग को पूरा बढ़ने के बाद आप इस बात को बहुत अच्छे से समझ जाएंगी की इस भागदौड़ भरी जिंदगी में प्रेगनेंसी के दौरान आपको कौन सी बातों का ध्यान रखना है जो आपको और आपके गर्भ में पल शिशु को स्वास्थ रखने के साथ साथ प्रेगनेंसी के नौवें महीने में नॉर्मल डिलीवरी की संभावना को बढ़ाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं। तो आइए विस्तार से इसे पढ़ते और समझते हैं।        

पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं 

प्रेगनेंसी के दौरान पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बहुत आवश्यक है। आपके शरीर में पानी की कमी नहीं होनी चाहिए क्योंकि प्रेगनेंसी में आपका शिशु तरल पदार्थ से भरे एमनियोटिक फ्लूइड में रहता है जिससे उसे ऊर्जा मिलती है। आपके शरीर में पानी कमी होना शिशु के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। इसलिए यह आवश्यक है की आप खुद को हमेशा हाइड्रेट रखें। दिन भर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं। 

डॉक्टर का मानना है की एक प्रेगनेंट महिला को दिन भर में कम से कम आठ से दस ग्लास पानी पीना चाहिए। इसके अलावा वे नारियल पानी या फ्रूट ज्यूस का सेवन करती हैं तो ये उनके लिए और बेहतर है। प्रेगनेंसी के दौरान कोशिश करनी चाहिए की आप प्यास महसूस करने से पहले पानी पी लें। यह आपके शरीर, शिशु के विकास में उत्पन्न होने वाली बाधाओं को दूर करता है और नॉर्मल डिलीवरी की संभावना को बढ़ाता है।

खान पान पर ध्यान दें 

पर्याप्त मात्रा में पानी पीने के बाद आपको अपने खान पान पर बहुत ज्यादा ध्यान देने की आवश्यकता है। क्योंकि ये आपको और आपके गर्भ में पल रहे शिशु को जरूरी पोषक तत्वों को मुहैया कराते हैं। प्रेगनेंसी के नौवें महीने के दौरान आपको फाइबर, प्रोटीन, आयरन, फोलिक एसिड, आयोडीन, विटामिन और दूसरे काफी पोषक तत्वों की भरी मात्रा में जरूरत पड़ती है जिसकी पूर्ति आप अपने खान पान के जरिए करते हैं। 

प्रेगनेंसी के दौरान आपके शरीर में हार्मोनल असंतुलन होने के कारण बदलाव और आपके शिशु में हर समय विकास की प्रक्रिया चालू ही रहती हैं। ऐसे में खान पान पर ध्यान नहीं देना आपके साथ साथ आपके शिशु पर भी गलत प्रभाव डालता है जिसके कारण आपको डिलीवरी के समय समस्याएं पैदा हो सकती हैं। यही कारण है की डॉक्टर भी प्रेगनेंसी के दौरान खान पान पर खास ध्यान देने की सलाह देते हैं। 

पोषक तत्वों से भरपूर खान पान आपको और शिशु को चुस्त एवं दुरुस्त रखता है। अपने डाइट में पोषक तत्वों को शामिल और नुकसानदायक चीजों को दूर करने की कोशिश करें। जिससे सामान्य डिलीवरी होने की ज्यादा चांस रहते हैं।     

मोटापे से बचें 

प्रेगनेंसी के दौरान हार्मोनल असंतुलन होने के कारण आपके अंदर ढेरों बदलाव आते हैं। इन्ही बदलावों में से एक बदलाव मोटापा है लेकिन आप कुछ चीजों पर ध्यान देकर खुद को इससे बचा सकती हैं। मोटापा यानी की वजन का जरूरत से ज्यादा बढ़ना अपने आप में ही एक बीमारी है जो दूसरी कई बीमारियों को जन्म देती है। प्रेगनेंसी के दौरान आपको इससे बचना चाहिए क्योंकि अगर आपका वजन अधिक बढ़ गया तो यह नॉर्मल डिलीवरी की संभावना को बहुत हद तक कम कर देता है जिसके कारण आपको ऑपरेशन यानी की सिजेरियन डिलीवरी से गुजरना पड़ सकता है। 

मोटापा डिलीवरी ही नहीं प्रेगनेंसी के नौवें महीने के दौरान भी काफी समस्याएं पैदा कर सकता है जो आप और आपके शिशु के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं। मोटापा हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और दिल से संबंधित दूसरी कई बीमारियों का कारण बनता है। इसलिए आपके लिए यह जरूरी है की अपने डाइट को बहुत ही संतुलित रखें और उन सभी चीजों का सेवन करने से बचें जो मोटापा का कारण बन सकते हैं।    

तनाव से दूर रहें 

प्रेगनेंसी के दौरान आपको तनाव से दूर रहना चाहिए क्योंकि ये आपकी और आपके शिशु की सेहत पर बुरा प्रभाव डालने के साथ साथ नॉर्मल डिलीवरी में बाधाएं भी पैदा करता है।नॉर्मल डिलीवरी के लिए आपका मानसिक और शारीरिक तौर पर फिट रहना आवश्यक है और यह बिना तनाव के ही मुमकिन है। अगर आप अपने शिशु की नॉर्मल डिलीवरी चाहती हैं तो खान पान पर ध्यान देने के साथ साथ छोटी छोटी चीजों में खुशियां ढूंढें और हमेशा खुश रहें। अगर आपको किसी तरह की कोई परेशानी है या फिर किसी प्रकार का तनाव है तो डॉक्टर से तुरंत मिलकर इस बारे में विस्तार से बात करें। अगर आप नॉर्मल डिलीवरी की खवाहिश रखती हैं तो खुद को तनाव से दूर रखें, अब आप कैसे खुद को तनाव से दूर रखती हैं ये आप पर निर्भर करता है।      

तन और मन में तालमेल बनाएं

प्रेगनेंसी में आपका फिट और फ्रेश रहना बहुत आवश्यक है क्योंकि ये आपकी आधे से ज्यादा परेशानियों को खत्म कर देते हैं। आयुर्वेद में कहा गया है की स्वस्थ रहने के लिए तन और मन के बीच तालमेल बहुत जरूरी है। बगैर इनमें तालमेल के आप स्वस्थ नहीं हो सकते हैं। अगर आपका तन ठीक है लेकिन मन नहीं तो प्रॉब्लम है, अगर मन ठीक है लेकिन तन नहीं तो भी प्रॉब्लम है। क्योंकि दोनों एक दूसरे से वैसे ही जुड़े हुए हैं जैसे की एक गर्भवती महिला अपने गर्भ में पल रहे शिशु से जुडी होती है। 

पैदल चलें 

अगर आप खुद के साथ साथ अपने शिशु को स्वस्थ रखना और नॉर्मल डिलीवरी की संभावना को ज्यादा बढ़ाना चाहती हैं तो सबसे पहले आपके तन और मन का स्वस्थ होना जरूरी है। इसके लिए आप रोजाना सुबह के समय पैदल थोड़ी देर एक चलें यानी की वॉक करें क्योंकि सुबह चलना और सुबह की शुद्ध हवा आप दोनों के लिए बहुत फ़ायदेमंद होती है।     

योग करें 

वॉक करने के बाद फ्रेश होकर आपको थोड़े समय के लिए योग करना चाहिए क्योंकि यह तनाव को दूर, मन को शांत और दूसरी परेशानियों को दूर करने में काफी कारगर होता है। योग करने से आपको काफी सुकून मिलता है जिसके कारण आपका टेंशन, तनाव, मन का भारीपन और उदासींता दूर हो जाती हैं। कुछ योग आसन जो प्रेगनेंसी के दौरान बहुत फायदेमंद माने जाते हैं इसमें वीरभद्र आसन, त्रिकोनासन, शवासन, बद्धकोणासन, ताड़ासन और मार्जारीआसन शामिल हैं।    

व्यायाम करें – 

इसके अलावा रोजाना सुबह कुछ समय तक हल्का फूलका व्यायाम करें। व्यायाम करने से आपकी मांसपेशियां मजबूत होती हैं और इनमें में लचीलापन आता है जो नॉर्मल डिलीवरी की संभावना को बढ़ाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं। साथ ही व्यायाम आपके शरीर को नॉर्मल डिलीवरी के समय होने वाले दर्द और पीड़ा से लड़ने के लिए तैयार भी करता है। इसके अलावा आपको स्विमिंग भी करनी चाहिए क्योंकि यह भी आपके लिए बहुत सहायक है। 

स्त्री-रोग विशेषज्ञ से मिलें 

स्त्री-रोग विशेषज्ञ से मिलकर आप व्यायाम के बारे में विस्तार से बात कर सकती हैं। डॉक्टर आपकी शारीरिक स्थिति, प्रेगनेंसी की अवधि और शिशु के विकास की जांच करने के बाद आपको व्यायाम करने तथा कौन से व्यायाम को कितने समय तक करना है आदि का सुझाव देते हैं। व्यायाम करने से पहले डॉक्टर से जरूर मिलें। अपने मन मुताबिक व्यायाम करना आपके और शिशु के लिए समस्याएं कड़ी करने के साथ साथ नॉर्मल डिलीवरी में बाधाएं भी पैदा कर सकता है।      

प्रेगनेंसी एजुकेशन प्राप्त करें 

प्रेगनेंसी से संबंधित कई तरह की भ्रांतियां चारों तरफ फैली हुई हैं और यह भी यह भी संभव है की जब भी आपके परिवार या फ्रेंड सर्कल से कोई मिलने आते हैं तो प्रेगनेंसी से संबंधित कई तरह की बातें आपको बताते होंगे। इन सभी बातों की वजह से आपको कन्फ्यूजन हो सकती है और इस स्थिति में आप उन फैसलों को ले सकती हैं जो शायद प्रेगनेंसी में आपके लिए कॉम्प्लिकेशन पैदा कर दे। यह संभव भी है क्योंकि आपको खुद इस चीज का अंदाजा नहीं है की इन बातों में कितनी सच्चाई है।    

यही कारण है की आपको दूसरों की कही सुनी बातों पर भरोसा करने के बजाय खुद प्रेगनेंसी से संबंधित चीजों के बारे में विस्तार से पढ़ना यानी की प्रेगनेंसी एजुकेशन हासिल करनी चाहिए। प्रेगनेंसी एक बहुत ही नाजुक समय होता है जहां नजरअंदाज की कोई जगह नहीं है। इसलिए अंधकार में रहते हुए किसी भी चीज को अपनाने से पहले उसकी हकीकत, उसके फायदे और नुकसान के बारे में जानना आपके लिए अतिआवश्यक है। 

प्रेगनेंसी एजुकेशन कैसे प्राप्त करें 

प्रेगनेंसी एजुकेशन के लिए आप किताब और इंटरनेट का सहारा ले सकती हैं। इनके माध्यम से आपको यह अमझ में आ आएगा की प्रेगनेंसी के किस महीने में आपको कौन सी चीजों का सेवन करना है और किससे बचना है। साथ ही साथ आपको और भी दूसरी काफी जरूरी बातों के बारे में पता चलेगा जैसे की:- 

  1. क्या करना चाहिए 
  2. क्या नहीं करना चाहिए 
  3. कितने बजे सोना चाहिए 
  4. कितने बजे जगना चाहिए 
  5. इविनिंग स्नैक्स क्यों जरूरी है 
  6. फोलिक एसिड क्यों जरूरी है
  7. सैंडल क्यों नहीं पहनना चाहिए 
  8. कैफीन से दूर क्यों रहना चाहिए  
  9. कौन से योग आसन करने चाहिए
  10. कितनी मात्रा में पानी पीनी चाहिए 
  11. दिन भर में कितने घंटे सोना चाहिए
  12. दोपहर का खाना कैसा होना चाहिए 
  13. कितनी मात्रा में भोजन करना चाहिए 
  14. कौन से फल का सेवन करना चाहिए 
  15. पेट पर प्रेशर देने से क्यों बचना चाहिए 
  16. ज्यादा देर तक क्यों झुकना नहीं चाहिए 
  17. फलों का ज्यूस और दूध क्यों पीना चाहिए 
  18. सुबह नाश्ते में क्या और क्यों खाना चाहिए 
  19. आपको कौन सी पोजीशन में सोना चाहिए 
  20. फाइबर युक्त चीजों के सेवन से क्या फायदा है 
  21. रात में जल्दी और हल्का खाना क्यों लेना चाहिए  
  22. प्रेगनेंसी में प्रोटीन और विटामिन कैसे फायदेमंद हैं 
  23. सुबह पैदल चलने, व्यायाम और योग के क्या फायदे हैं 
  24. कौन सी सब्जियों को अपने डाइट में शामिल करना चाहिए
  25. रोजाना आपको कितनी मात्रा में विटामिन की जरूरत होती है 
  26. ज्यादा देर तक क्यों एक जगह बैठना या खड़े नहीं होना चाहिए 
  27. प्रेगनेंसी के बाद नॉर्मल डिलीवरी के लिए कौन कौन सी चीजों का ध्यान रखना चाहिए 

किताब या इंटरनेट पर पढ़ने के बाद भी अगर आपको किसी तरह की कोई समस्या होती है तो आपको स्त्री-रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। क्योंकि इनके पास प्रेगनेंसी से संबंधित सभी सवालों के जवाब होते हैं। 9 Month Pregnancy Exercise For Normal Delivery in Hindi अगर आपको प्रेगनेंसी व नॉर्मल डिलीवरी से संबंधित कोई भी सवाल या समस्या है तो आप प्रिस्टीन केयर से संपर्क कर सकती हैं। इनके पास अनुभवी स्त्री-रोग विशेषज्ञ मौजूद हैं जो आपकी परेशानियों को घंटों में बहुत ही आसानी से खत्म कर सकते हैं।      

अपने पास एक दाई रखें 

अगर आप नॉर्मल डिलीवरी ख्वाहिश रखती हैं अपने पास एक अनुभवी दाई रखें क्योंकि ये नॉर्मल डिलीवरी की संभावना को काफी हद तक बढ़ाने में मदद करती हैं। दाई को प्रेग्नेंसी, नॉर्मल डिलीवरी और इनसे संबंधित लगभग सभी चीजों के बारे में काफी अनुभव और बहुत गहन समझ होती है जो आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। एक दाई नॉर्मल डिलीवरी की संभावना बढ़ाने के साथ साथ प्रेगनेंसी की पूरी प्रक्रिया में हर तरह से आपकी मदद करती है।   

दाई रोजाना शरीर की और खासकर आपके पेल्विक एरिया की मालिश करती है जिससे आपकी मांसपेशियां मजबूत होती है। जो डिलीवरी के समय आपके दर्द और पीड़ा को कम करने में मदद करता है। प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में हार्मोनल असंतुलन के कारण आप अपने शरीर में कई तरह के बदलाव और लक्षण महसूस करती हैं, लेकिन मालिश आपको इन सब से काफी हद तक राहत दिलाने में मदद करता है।  

इसके अलावा, दाई आपके खान पान, व्यायाम और दैनिक जीवन को अच्छे से डिजाइन करती हैं जिससे प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली आधी परेशानियां ख़त्म हो जाती हैं। आपके जीवन में दाई एक बहुत बड़ी भूमिका निभाती है इसलिए आपको इसके बारे में ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं है।    

ध्यान रखें इन बातों का

प्रेगनेंसी का समय बहुत ही खास पल होता है जहां अपनी लाइफस्टाइल और खान पान पर ध्यान देने के साथ साथ आपको कुछ चीजों को लेकर सावधान भी रहना चाहिए। 9 Month Pregnancy Delivery in Hindi क्योंकि ये आप और आपके शिशु को स्वस्थ और समस्याओं को दूर रखने में मदद करते हैं। जहां एक तरह आपको कुछ चीजों को अपने डाइट में शामिल करना चाहिए वहीँ दूसरी तरफ आपको आपको कुछ चीजों से परहेज करना और बचना भी चाहिए। नॉर्मल डिलीवरी काफी चीजों मिश्रण का रिजल्ट है।  

  1. खुश रहना चाहिए 
  2. पूरी नींद लेनी चाहिए 
  3. तनाव से बचना चाहिए 
  4. कैफीन के सेवन से बचें 
  5. खुद को हमेश हाइड्रेट रखें
  6. सिगरेट और शराब से दूर रहें
  7. अपने परिवार वालों के साथ रहें 
  8. दिन भर में ज्यादा से ज्यादा पानी पीएं 
  9. अच्छा म्युजिन सुनें और अच्छी किताबें पढ़ें 
  10. रोजाना सुबह में थोड़ी देर योग और व्यायाम करें 
  11. ज्यादा तेल और मसालेदार पदार्थों से परहेज करें 
  12. फास्ट फ़ूड और कोल्ड ड्रिंक का सेवन करने से बचें 
  13. समय समय पर डॉक्टर से मिलें और चेकअप कराएं 
  14. प्रेगनेंसी का पता लगते ही स्त्री-रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें 
  15. अपने स्वस्थ्य का खास ख्याल रखें साथ ही फिट एवं एक्टिव रहें 
  16. नॉर्मल डिलीवरी काफी हद तक आपके सेहत पर निर्भर करती है 

कई बार प्रेगनेंसी के दौरान सभी चीजें सही और बराबर होने के बावजूद भी आप अपने अंदर कुछ परेशानियों को महसूस कर सकती हैं। ऐसी स्थिति खुद ही उसका इलाज खोजने या घरेलू उपचार के चक्कर में पड़ कर पाना समय बर्बाद और स्थिति को गंभीर बनाने की बजाय तुरंत डॉक्टर से संपर्क करके उन्हें अपनी परेशानियों के बारे में बताना और उनकी सलाह को फॉलो करना चाहिए। 

निष्कर्ष 

प्रेगनेंसी एक बेहद खूबसूरत और खुशियों से भरा एहसास है जो नौ महीने की एक प्रक्रिया है। इस दौरान आपको काफी चीजों का ध्यान रखने की जरूरत होती है। अपने खान पान, लाइफस्टाइल और दूसरी सभी जरूरी चीजों का सही इस्तेमाल करके प्रेगनेंसी से संबंधित सभी समस्याओं को काफी हद तक ख़तम किया जा सकता है। 

जीवन व्यस्त होने के कारण आज काफी महिलाएं प्रेग्नन्सी के दौरान भी खुद को समय या खुद पर ध्यान नहीं दे पाती हैं। जिसके कारण उनकी प्रेगनेंसी में जटिलताएं और बाधाएं पैदा हो जाती हैं। ऐसा होने के कारण नॉर्मल डिलीवरी की संभावना खत्म हो जाती है और फिर शिशु के जन्म के लिए ऑपरेशन का इस्तेमाल किया जाता है जिसमें बहुत रक्तस्राव, दर्द और परेशानिया होती हैं।  

ऐसी स्थितियों को देखने के बाद आपके मन में भी यह सवाल आ सकता है की कहीं आपकी डिलीवरी के समय भी ऑपरेशन का इस्तेमाल तो नहीं किया जाएगा? अगर आपको ऐसा सोचकर डर लगता है तो हम आपको बता दे की नॉर्मल डिलीवरी से अपने शिशु को जन्म देना कोई बहुत बड़ा पहाड़ तोड़ने जैसा काम नहीं है। आपको बस कुछ चीजों पर ध्यान देने की आवश्यकता होती है। ऊपर बताई गई बातों को अपने जीवन में अपनाने के बाद आपको बेशक ऑपरेशन से गुजरने की जरूरत नहीं पड़ेगी। 

अगर आपको प्रेगनेंसी और नॉर्मल डिलीवरी से संबंधित किसी भी तरह की कोई प्रश्न या परेशानी है तो प्रिस्टीन केयर से संपर्क करें। हमारे पास देश के सबसे बेहतरीन स्त्री-रोग विशेषज्ञ हैं जिनके पास आपके हर प्रश्न का जवाब और हर परेशानी का बेस्ट इलाज मौजूद है।   

प्रिस्टीन केयर
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