प्रदेश में महिला अपराध के वृद्धि

यूपी पुलिस के आंकड़ों में देखे तो प्रदेश में लूट, रेप, हत्‍या और डकैती जैसे अपराधों में 99 फीसदी गिरावट आई है। जबकि इससे पहले यूपी में हर दिन महिलाओं के खिलाफ औसतन 162 मामले दर्ज होते थे। यूपी पुलिस की रिपोर्ट के मुताबिक, 2019 के पहले 6 महीने में यूपी में 19,761 आपराधिक मामले सामने आए थे। इनमें रेप के 1,224, शारीरिक शोषण के 4,883, छेड़छाड़ के 293 और घरेलू हिंसा के 6,991, हत्‍या के 1,088, अपहरण के 5,282, मामले शामिल थे।

उत्तर प्रदेश में महिला अपराध से जुड़े मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं।नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार हर दो घंटे में बलात्कार का एक मामला उत्तर प्रदेश में दर्ज हो रहा है। आंकड़ों पर गौर करें तो 2018 में बलात्कार के 4,322 मामले दर्ज किए गए थे। राज्य में महिलाओं के खिलाफ 59,445 अपराध दर्ज किए गए हैं, जिनमें रोजाना 62 मामले सामने आए हैं। यह 2017 में 7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जब कुल 56,011 अपराध दर्ज किए गए थे। फिलहाल एनसीआरबी ने 2018 के बाद कोई भी अपराध का आंकड़ा नहीं जारी किया। हालांकि उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा तीन साल में जारी किए आंकड़ों में अपराध कम होना बताया गया हैं। वहीं पूर्व डीजीपी अरविंद कुमार जैन का कहना हैं वारदात में तेजी आई है लेकिन कठोर कार्यवाही होना जरूरी हैं। एनएसए व रासुका जैसी कार्यवाही अपराधियों का मनोबल तोड़ती हैं।

उत्तर प्रदेश में महिला अपराध से जुड़े मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। अमेरिका में पढ़ने वाली सुदीक्षा की बुलंदशहर शहर में छेड़खानी से बचने के दौरान सड़क हादसे में मौत हो गई। बीते दिनों गाजियाबाद में भांजी को छेड़खानी से बचाने के दौरान पत्रकार विक्रम जोशी की हत्या को लोग भूल भी नहीं पाए थे कि बुलंदशहर की घटना ने एक बार फिर दिल दहला दिया। एंटी रोमियो दल शुरू में सक्रिय दिखाई दिया लेकिन मौजूदा कुछ महीनों से गायब हैं।

प्रदेश में बढ़ता साइबर अपराध जहां जनता के लिए मुसीबत का सबब बनता जा रहा है तो वहीं दूसरी तरफ यूपी पुलिस के लिए एक नई चुनौती पेश कर रहा है। ऐसे में अब उत्तर प्रदेश पुलिस ने साइबर अपराध से निपटने के लिए अलग से थाना स्थापित किया है। प्रदेश के सभी 18 रेंज मुख्यालयों पर 18 साइबर थाने बना दिए गए हैं, सभी रेंज के जिलों में साइबर अपराध से जुड़े मामलों पर ये साइबर थाने एफआईआर दर्ज करेंगे विवेचना करेंगे और आरोपियों की गिरफ्तारी कर चार्जशीट भी दाखिल करेंगे।

बीते कुछ सालों में जैसे-जैसे सोशल मीडिया और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन का चलन बढ़ा, वैसे-वैसे साइबर अपराधियों के कांड भी बढ़ने लगे, या यूं कहें कि साइबर अपराध का बोलबाला होने लगा। अब लोगों को चोरों और लुटेरों से ज्यादा साइबर अपराधियों से अपनी गाढ़ी कमाई बचाना मुश्किल होने लगा है, बीते कुछ सालों में बढ़ते साइबर अपराध के आंकड़े इसी नए खतरे की ओर इशारा कर रहे हैं। इस नई चुनौती से निपटने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक नई शुरुआत की है।

साइबर अपराध पर नकेल कसने के लिए अब लखनऊ, नोएडा, आगरा जैसे बड़े शहरों में नहीं बल्कि हर रेंज मुख्यालय में साइबर थाना बना दिया गया है। लखनऊ और नोएडा में बनाई जा चुकी साइबर सेल के चलते साइबर थाना पहले से काम कर रहा था लेकिन अब सभी जिलों को साइबर अपराध से निपटने के लिए अलग से साइबर थाना की व्यवस्था दे दी गई है।

3 इंस्पेक्टर, 3 सब इंस्पेक्टर, 5 हेड कांस्टेबल और 32 कांस्टेबल के साथ हर रेंज मुख्यालय पर यह साइबर थाना बनाया गया है, हर साइबर थाने की अपनी ई-मेल आईडी होगा और अलग सरकारी मोबाइल नंबर, ई-मेल के जरिए या व्हाट्सएप के जरिए साइबर थाने को अपनी तहरीर भेजी जा सकेगी जिस पर एफआईआर भी दर्ज होगी, अपराधियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजने के साथ चार्जशीट भी दाखिल की जाएगी। उत्तर प्रदेश में साइबर अपराध सबसे ज्यादा बढ़ा है। साल 2018 में साइबर अपराध के 6280 मामले सामने आए जो साल 2017 से 27 फीसदी अधिक था। साल 2020 के 7 महीने में ही साइबर क्राइम से जुडी 5400 के करीब शिकायतें पुलिस के 112 को मिल चुकी हैं, अधिकारी भी कह रहे हैं की साइबर अपराध नई चुनौती है लिहाजा इससे निपटने के लिए अब तैयार होने की जरूरत है। साइबर फ्रॉड में अब न सिर्फ बैंकिंग से जुड़ी धोखाधड़ी के मामले आ रहे हैं बल्कि फर्जी नौकरी देने के नाम पर वसूली, सरकारी विभागों के दस्तावेज देने जैसे ऑनलाइन फ्रॉड की शिकायतें भी आने लगी हैं। साइबर अपराध का दायरा बढ़ता जा रहा है, जिसे अब यूपी पुलिस रोकने के लिए कमर कस चुकी है।