माहेश्वरी दम्पत्ति को अयोध्या में निमंत्रण मिलने का इंतजार।

अजमेर के बुजुर्ग माहेश्वरी दम्पत्ति को अयोध्या में निमंत्रण मिलने का इंतजार। 6 दिसम्बर 1992 को अयोध्या में हुई कार सेवा में शहीद हुआ था पुत्र अविनाश माहेश्वरी। 

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में बनने वाले भव्य राम मंदिर के लिए 5 अगस्त को भूमि पूजन समारोह होगा। इसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी खासतौर से उपस्थित रहेंगे। देश भर के प्रमुख साधु संतों के अलावा उन परिवारों के सदस्यों को भी आमंत्रित किया गया है, जिनका कोई सदस्य अयोध्या में कार सेवा के दौरान शहीद हुआ था। इसीलिए अजमेर के फॉयसागर रोड प्रेम नगर निवासी 70 वर्षीय माणकचंद माहेश्वरी और उनकी पत्नी अक्षमी माहेश्वरी को भी अयोध्या से रामजन्म भूमि ट्रस्ट की ओर से भूमि पूजन समारोह का निमंत्रण मिलने का इंतजार है। बुजुर्ग माहेश्वरी दम्पत्ति के एक मात्र पुत्र अविनाश माहेश्वरी 6 दिसम्बर 1992 को अयोध्या में कारसेवा के दौरान शहीद हो गए थे। अपने एकमात्र पुत्र के निधन का तो माहेश्वरी दम्पत्ति को गम है, लेकिन अब इस बात का गर्व है कि जिस उद्देश्य के लिए पुत्र ने शहादत दी, वह उद्देश्य पूरा होने जा रहा है। 70 वर्षीय माणकचंद माहेश्वरी ने कहा कि अच्छा होता कि वे भी भूमि पूजन समारोह के साक्षी बनते। जब रामजन्म भूमि ट्रस्ट ने शहीद परिवारों के प्रमुख सदस्यों को आमंत्रित किया है, तब हमें भी निमंत्रण मिलना चाहिए। 5 अगस्त को होने वाले समारोह का निमंत्रण दो अगस्त को दोपहर तक नहीं मिला है। इस संबंध में विश्व हिन्दू परिषद के विभाग मंत्री शशि प्रकाश इंदौरिया ने कहा कि माहेश्वरी दम्पत्ति के निमंत्रण के लिए प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया है। इंदौरिया ने उम्मीद जताई कि बुजुर्गदम्पत्ति को भूमि पूजन समारोह देखने का अवसर मिलेगा। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए माहेश्वरी दम्पत्ति ने अपने एकमात्र पुत्र का बलिदान दिया है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से सबद्ध विद्या भारती की ओर से अजमेर में भगवान गंज में शहीद अविनाश माहेश्वरी के नाम से सीनियर हायर सैकंडरी स्कूल का संचालन वर्ष 1995 से किया जा रहा है। इस स्कूल के भवन निर्माण में भी माणकचंद माहेश्वरी ने आर्थिक सहयोग दिया है। माहेश्वरी चिकित्सा विभाग से रिटायर कम्पाउंडर है। 1992 में कार सेवा के समय अविनाश माहेश्वरी अजमेर के श्रमजीवी कॉलेज में द्वितीय वर्ष का छात्र था। हालांकि अब बुजुर्ग अवस्था में सेवा करने वाला पुत्र नहीं है, लेकिन माहेश्वरी दम्पत्ति को गर्व है कि उनके सामने ही जन्म भूमि पर राम मंदिर बन रहा है।