शिशु के लिए माँ का दूध सर्वोत्तम

लखनऊ ,  माँ  का दूध शिशु के लिए सर्वोत्तम है इस समय जब विश्व कोरोना महामारी से जूझ रहा है तब भी स्तनपान शिशु के लिए जीवन रक्षक है विशेषज्ञों के अनुसार कोरोना का संक्रमण मां के दूध से नहीं फैलता इसलिए कोरोना पीड़ित ऑब्लिक संदिग्ध होने पर भी मां को रोना से बचाव के उपाय का पालन करते हुए एवं मास्क का प्रयोग कर स्तनपान जारी रख सकती है।


  उन्होंने बताया कि कोविड के समय स्तनपान से जुड़े सवालों के जवाब देने के लिए और स्तनपान की महत्ता जनमानस तक पहुंचने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एवं यूनिसेफ द्वारा एक मीडिया मीट का आयोजन शुक्रवार को किया गया इस मीटिंग में स्वास्थ्य विभाग एवं यूनिसेफ के अधिकारियों के साथ उत्तर प्रदेश के कई जिलों से पत्रकारों ने डिजिटल माध्यम से प्रतिभाग किया।

  उन्होंने बताया कि विश्व स्तनपान सप्ताह की पूर्व संध्या पर आयोजित इस मीडिया मीट में पत्रकारों के संबोधित करते हुए अर्पणा उपाध्याय, मिशन निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने कहा स्तनपान शिशु मृत्यु दर कम करने का सबसे सशक्त हस्तक्षेप है स्तनपान शिशु के आरंभिक शारीरिक एवं मानसिक विकास में भी सहायक है मीटिंग में उपस्थित डॉक्टर वेदप्रकाश, जनरल मैनेजर चाइल्ड हेल्थ, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने कहा मां के दूध का कोई विकल्प नहीं है बाजार में मिलने वाले डब्बा बंद दूध मां के दूध का स्थान नहीं ले सकते यह डब्बा बंद दूध शिशु को स्तनपान से होने वाले लाभ से वंचित रखते हैं और पर्यावरण के लिए भी हानिकारक है डब्बा बंदू के प्रचार प्रसार को रोकने Infant Milk Substitute Act है यह विषय में जागरूकता फैलाने की विशेष जरूरत है। 

उन्होंने बताया कि कोविड के समय स्तनपान के विषय पर प्रकाश डालते हुए यूनिसेफ की पोषण विशेषज्ञ डॉ ऋचा सिंह पांडे ने कहा स्तनपान शिशु का पहला अधिकार है या प्रकृति वरदान है जिससे शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है एवं शारीरिक एवं मानसिक विकार बेहतर होता है डॉ ऋचा ने कहा कोई पॉजिटिव होने पर भी मां शिशु को को विद से बचाव के नियमों का पालन करते हुए स्तनपान करा सकती है प्रतिवर्ष 01 से 07 अगस्त को विश्व स्तनपान सप्ताह के रूप में मनाया जाता है इसका उद्देश्य लोगों को स्तनपान के महत्व को समझाना एवं स्तनपान  के लिए प्रेरित करना है लैंसेट 2016 के अनुमान के अनुसार प्रतिवर्ष विश्व में 8,20,000 बच्चों की मृत्यु स्तनपान के अभाव से होती है भारत में 6 माह तक केवल स्तनपान कराने की दर 55 प्रतिशत होने के बावजूद प्रत्येक वर्ष डायेरिया एवं निमोनिया जैसी बीमारियों के कारण अनुमानित 05 वर्ष से कम आयु के 99,499 बच्चों की मृत्यु हो जाती है इन मृत्यु को एक घंटे के अंदर स्तनपान की शुरुआत करके वह अच्छा माता केवल स्तनपान जारी रख कर रोका जा सकता है।

माँ का दूध सर्वोत्तम आहार क्यों है …?

माँ के दूध में कोलेस्ट्रॉम का उत्पादन होता है जिसमें प्रोटीन, कैल्सियम, एन्टीबॉडी, लिपिड, कार्बोहाइड्रेड, मिनरल और बहुत सारे पौष्टिक तत्व होते हैं जो शिशु के शारीरिक और आंतरिक विकास के लिए ज़रूरी होता है। माँ के दूध में पानी की मात्रा इतनी होती है वह शिशु के शरीर में पानी की आवश्यकता को पूर्ण करने में पूरी तरह से सक्षम होता है। माँ के दूध की सबसे अच्छी बात ये है कि प्रीमैच्युर हो या या नॉर्मल दोनों उम्र के शिशु के ज़रूरत को पूरा करने की ये क्षमता रखता है। इसलिए जन्म से छह महीने तक दूध पिलाना शिशु के लिए बहुत ही आवश्यक होता है।

इम्युनिटी सिस्टेम या रोग प्रतिरोधक क्षमता को सुदृढ़ करता है-

 माँ के दूध में इम्युनोग्लोब्यूलीन (immunoglobulin) का लेवल हाई होता है जो बच्चे के रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए सबसे ज्यादा ज़रूरी होता है। माँ के दू्ध में लैक्टोफोर्मिन नाम का तत्व होता है जो शिशु के आंतों में रोगाणु के पनपने से रोकते हैं।पाचन शक्ति को बेहतर बनाता है- नवजात शिशु का डाइजेस्टिव सिस्टेम बहुत कमजोर होता है इसलिए उस वक्त माँ का दूध ही एक ऐसा पौष्टिक आहार है जो वह आसानी से हजम भी कर सकता है और शरीर को पूर्ण रूप से सारी पौष्टिकता भी मिल जाती है। जन्म के छह हफ़्ते तक शिशु की पाचन शक्ति बहुत ही कमजोर रहती है माँ का दूध आंतों की इम्युनिटी लेवल को मजबूत करने में अहम् भूमिका को निभाता है।

अब चलते हैं कि स्तनपान करवाने या शिशु को दूध पिलाने पर माँ को क्या लाभ पहुँचता है-

संक्रमण से शिशु को सुरक्षित रखने में मदद करता है- 

नवजात शिशु को जन्म से संक्रमण होने का बहुत खतरा होता है जिसके कारण उन्हे दस्त, कुपोषण, न्यूमोनिया आदि होने का बहुत खतरा होता है। इसलिए प्रीमैच्युर बेबी से लेकर नॉर्मल बेबी सभी को माँ का दूध पिलाना बहुत ज़रूरी होता है इससे शरीर किसी भी संक्रमण से खुद को सुरक्षित रखने में सक्षम हो पाता है।

संदूषण(contamination)

 की संभावना न के बराबर होती है- शिशु को ऊपर का दूध पिलाने पर इंफेक्शन होने का डर सबसे ज्यादा होता है लेकिन स्तनपान कराने पर इसका खतरा शुन्य के समान होता है। इससे शिशु को किसी भी प्रकार के संक्रमण या इंफेक्शन होने का खतरा भी कम होता है।

माँ की कैलोरी बर्न होता है- 

शिशु को स्तनपान करवाने पर माँ का जो बड़ा हुआ वज़न होता है वह धीरे-धीरे कंट्रोल में आने लगता है क्योंकि इससे बहुत ज्यादा कैलोरी बर्न होता है। यानि स्तनपान करवाने पर माँ बहुत जल्दी शेप में आ सकती हैं।

गर्भाशय का संकुचन बेहतर होता है-

 प्रसव के बाद माँ को इंटरनल ब्लीडिंग आदि की समस्या आदि होती है लेकिन स्तनपान करवाने पर गर्भाशय का संकुचन होने के साथ-साथ इंटरनल ब्लीडिंग की समस्या भी कुछ हद तक कम हो जाती है।

माँ के लिए शिशु को आहार देने की सहुलियत-

 माँ शिशु को कहीं भी किसी भी वक्त दूध पिला सकती है इसके लिए उन्हें किसी चीज पर निर्भर नहीं रहना पड़ता है।

इसलिए एक वाक्य में यही कह सकते हैं कि माँ का दूध हर शिशु का अधिकार और उसकी अहम् ज़रूरत है, इससे उसे वंचित न करें!!