कंचन वर्मा-ईमानदारी ही पहचान

2012 में कंचन वर्मा को फतेहपुर के डीएम का पद सौंपा गया था। जिलाधिकारी के तौर पर उन्होंने लगभग लुप्त हो चुकी ‘ससुर खेडरी नदी’ और ‘ठिठोला झील’ को पुनर्जीवित किया।ससुर खदेरी नदी 46 किलोमीटर लंबी थी। उन्होंने डीएम के पद पर रहते हुए 38 किलोमीटर तक की खुदाई करवा दी, जिसके बाद नदी 12 से लेकर 45 मीटर की चैड़ाई में बहनी शुरू हो गई। इसके लि‍ए उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सम्मान भी मि‍ला। कंचन वर्मा को बीते 20 अगस्त 2016 को मलेशिया में कॉमनवेल्थ अवार्ड से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें फतेपुर में डीएम के पद पर कार्यरत रहने के दौरान ससुर खदेरी नदी को पुनर्जीवित करने पर मिला है।

बाराबंकी की जिलाधिकारी के तौर पर एस. मिनिष्ठी ने मातृ और शिशु मृत्यु दर की रोकथाम के लिए अनोखी योजना की शुरुआत की थी। आंगनबाड़ी में गर्भवती का सार्वजनिक तौल और बच्चों का पंजीयन प्रारंभ किया जिससे सार्वजनिक तौल करने से महिलाओं ने अपनी सेहत पर खुद ध्यान देना शुरू किया।

गर्भवती का सार्वजनिक तौल और बच्चों का पंजीयन योजना के तहत जच्चा-बच्चा की सेहत के सुधार के लिए हीमोग्लोबिन की लगातार ट्रैकिंग का सिस्टम तैयार किया है। सेनेटरी नेपकिन बनवाने का बाकायदा उद्योग लगवाया। मसौली में इसकी एक यूनिट भी लग गयी। इसके मार्फत कम पैसे में उच्च स्तरीय सेनेटरी नैपकिन तैयार हुए और इन्हें कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूलों, समाज कल्याण
विभाग, सरकारी हास्टल, सामुदायिक व प्राथमिक चिकित्सा केन्द्रों पर आपूर्ति करके महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का कार्य किया गया।

इन्हीं सबके साथ एस. मिनिष्ठी ने जल के स्रोतों के रूप में अपनी जगह खो चुके कुओं की उपयोगिता को भी स्थापित करने की दिशा में मील के पत्थर गाड़ने शुरू कर दिये। वह जिले के हजारों वीरान पड़े और सूख चुके अंग्रेजों के समय के कुओं की सफाई और रंग-रोगन कराने के साथ ही अपनी टीम के साथ निकल कुओं की पूजा-अर्चना कर खुद बाल्टी से पानी निकालती और पीती हैं, ताकि आसपास के लोगों में उन कुओं के पानी को पीने का भरोसा जग सके। हालांकि ग्रामीणों में यह भरोसा जगना शुरू हो गया है।

सूखी झील को नैचरल बनाकर आईं थीं चर्चा में-
2005 बैच की आईएएस कंचन वर्मा को साल 2012 में फतेहपुर का डीएम बनाया गया था। कंचन ने फतेहपुर में सूख चुकी ठीठौरा झील और ससुर खदेरी नदी को पुनर्जीवित करने का काम किया। इससे मनरेगा योजना में काम करने वाले मजदूरों को काम मिला। 7 हेक्टेयर में फैली ठिठौरा झील से ही ससुर खदेरी प्रथम और द्वितीय नदी निकलती है। समय बीतने के साथ झील सूख गई थी और नदी भी खत्म होने की कगार पर थी। हालत यह हो गई थी कि लोग नदी में खेती तक करने लगे थे। यह नदी 46 किमी लंबी थी। कंचन वर्मा ने डीएम रहते हुए 38 किमी तक की खुदाई करवाई थी। नतीजतन झील भी अपने पुराने स्वरूप में आ गई और नदी 12 से लेकर 45 मीटर की चौड़ाई में बहने लगी।

करप्शन करने वाले मुश्किल में-
नरेंद्र मोदी की नजर में आईएएस कंचन वर्मा ईमानदार अफसरों की लिस्ट में हैं। इससे पहले, जीडीए के भ्रष्टाचार के बारे में पीएम मोदी भी बोल चुके हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि जीडीए में जड़े जमा चुके भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए लिए ईमानदार ऑफिसर की नियुक्त की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि नीचे के दूसरे अधिकारियों का बदला जाना तय है।

कंचन वर्मा जो 2005 बैच की आईएएस ऑफिसर हैं जिन्हें 20 अगस्त 2016 को कॉमनवेल्थ असोसिएशन ऐंड मैनेजमेंट इंटरनैशनल इनोवेशंस अवॉर्ड से पुरस्कृत किया जा चुका है। इन्होंने 2012 में फतेहपुर में डीएम रहते हुए सूख चुकी 46 किलोमीटर लंबी  ठीठौरा झील और ससुर खदेरी नदी को पुनर्जीवित किया है। इन्होंने 38 किलोमीटर तक खुदाई करवाई जिससे झील अपने पुराने स्वरुप में आ गया और नदी 12 से लेकर 45 मीटर की चौड़ाई में बहनी भी शुरू हो गई। आईएएस अधिकारी कंचन प्रशासनिक क्षेत्र में बेहतर कार्य के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सम्मानित भी हो चुकी है।