बकाया गन्ना मूल्य भुगतान आदेश एसीएस ने लिया वापस

बकाया गन्ना मूल्य का जल्दी भुगतान के लिए हुआ था आदेश।एसीएस गन्ना ने दो माह बाद ही वापस किया आदेश।चीनी मिल मालिकों को लाभ पहुचाने के लिए वापस हुआ टैगिंग आदेश….!

आभा राकेश

लखनऊ। गन्ना किसानों को गन्ना मूल्य का त्वरित भुगतान सुनिश्चित करने के लिए चीनी मिलों को जारी टैगिंग आदेश 50 प्रतिशत भुगतान हुए बिना पुन: बदले जाने से गन्ना आयुक्त/अपर मुख्य सचिव गन्ना की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिया है। किसानों के 50 प्रतिशत से कम बकाया गन्ना मूल्य भुगतान के लिए जारी किया गया टैंगिग आदेश दो माह में ही बदल दिया गया। टैगिंग आदेश बदले जाने के आदेश को लेकर किसान यूनियन के नेताओं सहित गन्ना विभाग के अधिकारी तमाम तरह के कयास लगा रहे है। चर्चा है कि निजी स्वार्थ के लिए तथा कुछ निजी चीनी मिल मालिकों के दबाव मार्च माह में जारी किया गया टैगिंग आदेश चीनी मिल मालिकों से सेटिंग होने के बाद मई माह में वापस ले लिया गया।


बीती सात मार्च 2022 को प्रदेश के गन्ना आयुक्त/अपर मुृख्य सचिव गन्ना संजय भुसरेड्डी ने गन्ना किसानों को 50 प्रतिशत से कम गन्ना मूल्य का त्वरित भुगतान कराने के लिए पेराई सत्र के दौरान चीनी मिलों में उत्पादित होने वाली चीनी, शीरा, बगास, प्रेममड एवं एथनॉल की बिक्री से प्राप्त होने वाली धनराशि की टैगिंग का आदेश जारी किया था इस आदेश में कहा गया कि ऐसी चीनी मिलों में, जहां किसानो का गन्ना मूल्य भुगतान 50 प्रतिशत से कम हुआ है, ऐसी चीनी मिलों के लिये पेराई सत्र 2021-22 के दौरान उत्पादति होने वाली चीनी, शीरा, बगास एवं प्रेसमड की बिक्री से प्राप्त होने वाली धनराशि के 85 प्रतिशत अंश के स्थान पर 90 प्रतिशत अंश गन्ना मूल्य भुगतान के लिए नियत किया जाएगा। इसके अलावा ऐसी चीनी मिलों जिसमें सी-हैवी शीरे से एथनॉल को उत्पादन किया जा रहा है वहां उत्पादित एथनॉल के 30 प्रतिशत के स्थान पर 60 प्रतिशत अंश गन्ना मूल्य भुगतान के लिए नियत किया जाए। इसी प्रकार बी-हैवी शीसे उत्पादित एथनॉल के मूल्य के 55 प्रतिशत के स्थान पर 80 प्रतिशत अंश गन्ना मूल्य भुगतान के लिए नियत होगा। यह व्यवस्था ऐसी चीनी मिलों जिनका गन्ना मूल्य भुगतान 50 प्रतिशत से कम है। गन्ना आयुक्त ने जारी निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराए जाने के लिए टैगिंग आदेश निर्गत करने का निर्देश दिया।


सूत्रों का कहना है कि किसानों के बकाया मूल्य का 50 प्रतिशत से कम भुगतान करने वाली चीनी मिलों द्वारा बिना 50 प्रतिशत भुगतान हुए मिलों की रिपेयर एवं मरम्मत का हवाला देते हुए 17 मई 2022 को गन्ना आयुक्त/अपर मुख्य सचिव गन्ना ने एक बार फिर टैगिंग हेतु संशोधित आदेश जारी कर दिया। अब इस आदेश में कहा गया कि उत्पादित होने वाली चीनी, शीरा, बगास एवं प्रेसमड की बिक्री से होने वाली धनराशि के 90 प्रतिशत अंश के स्थान पर 85 प्रतिशत, सी-हैवी शीरे से उत्पादित एथनॉल के मूल्य के 60 प्रतिशत के स्थान पर 40 प्रतिशत अंश व बी-हैवी शीरे से उत्पादित एथनॉल के मूल्य के 80 प्रतिशत के स्थान पर 65 प्रतिशत अंश गन्ना मूल्य भुृगतान में किया जाए। दो माह के अल्प अंतराल में जारी टैगिंग आदेश में हुए बदलाव ने गन्ना आयुक्त/एसीएस गन्ना की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए है। सूत्रों की मानें तो कुछ बड़े चीनी मिलों मालिकों से सेटिंग-गेटिंग होने पर टैगिंग आदेश मे संशोधन किए गए। हकीकत यह है कि जिन चीनी मिलों के भुगतान मार्च में भी 50 प्रतिशत से कम थे उसमे किसी भी प्रकार का कोई बढ़ोत्तरी नहीं होने पर भी टैगिंग आदेश संशोधित क्यों किया गया? जबकि सरकार ने अपने 100 दिन के एजेंडा में 8000 करोड़ रुपये का गन्ना मूल्य भुगतान कराने का लक्ष्य रखा है जब की उत्तर प्रदेश की कुल 93 निजी चीनी मिलों मे से लगभग 33 निजी चीनी मिलों का गन्ना मूल्य भुगतान 50 प्रतिशत से कम है। तथा पेराई सत्र 2021-22 का कुल बकाया गन्ना मूल्य भुगतान भी लगभग 8500 करोड़ के आसपास है जिसमें से एक बड़े घराने की मिलों पर अकेले लगभग 3500 करोड़ से ऊपर का बकाया है। इस संबंध में अपर मुख्य सचिव संजय भुसरेड्डी कहते हैं कि मैं आपका जवाबदेह नहीं हूं।

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