विधानसभा में अखिलेश यादव ने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं पर खड़े किये सवाल

विधानसभा में अखिलेश यादव ने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं पर खड़े किये सवाल।

2017 से पहले अस्पतालों में नहीं होते थे डाँक्टर: सीएम योगी

अजय सिंह

लखनऊ। यूपी विधानसभा में मानसून सत्र का आज दूसरा दिन है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल खड़े किए। बिना नाम लिए उन्होंने डिप्टी सीएम बृजेश पाठक का नाम लिए बिना निशाना साधा। फिर सीएम योगी ने सपा प्रमुख पर जमकर पलटवार किया।

सपा प्रमुख ने कहा, “गरीब मरीजों को सुविधा नहीं मिल रही है. लोगों को इलाज के लिए दिल्ली जाना पड़ रहा है. लगता है दिल्ली वाले मदद नहीं कर रहे हैं. झोला छाप डॉक्टर इलाज कर रहे हैं. मरीज चारपाई पर जा रहे हैं. लोग बोल रहे हैं मंत्री अस्पतालों में जाते हैं और केवल छापा मारते हैं. केवल छापामार मंत्री बनोगे या कुछ काम भी करोगे. अस्पतालों में पानी भरा हुआ है. ये सरकार डबल इंजन का होने का दावा करती है. लेकिन मंत्रियों के पास कोई जवाब नहीं है.”

डिप्टी सीएम को बजट नहीं दिया जा रहा है. छापामार मंत्री के छापों का क्या असर हो रहा है. ये सरकारी अस्पतालों को बंद करने की साजिश है. सरकार के पास स्टाफ की कमी है. ये निजिकरण के कारण सरकारी संस्थान बंद करना चाहते हैं. सरकार निजिकरण का रास्ता अपना रही है. मरीज ठेले पर अस्पताल जा रहे हैं, एंबुलेंस कहा है.

सीएम योगी आदित्यनाथ ने अखिलेश यादव पर जमकर निशाना साधा। इस दौरान उन्होंने कहा कि सपा सरकार के दौरान 2017 से पहले सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बंद कर दिए गए थे और अस्पतालों में डॉक्टर नहीं थे। जिला अस्पतालों की स्थिति भी दयनीय हो गई थी, ज्यादातर सीएचसी बंद होने के कारगार पर थे। सपा प्रमुख को बोलते-बोलते बहुत सारी बातें याद आती हैं लेकिन सपने जब तार-तार होंगे तो उसका दुख होता है। उनकी बातों से वो दुख झलक भी रहा था, लेकिन हमें जनता के फैसलों को स्वीकार तो करना ही पड़ेगा। नेता प्रतिपक्ष दूसरों को केवल उपदेश देते हैं लेकिन कोरोना महामारी के दौरान पता नहीं वे कहां गए थे. हमलोगों ने तो कभी नहीं देखा।