बीत गया आषाढ़ उम्मीद के मुताबिक नहीं बरसा पानी

अब्दुल जब्बार एडवोकेट

भेलसर(अयोध्या)। 13 कार्तिक 3 आषाढ़ अर्थात किसान यदि 13 दिन कार्तिक मास में चूक जाता है ठीक इसी तरह 3 दिन आषाढ़ मास में चूक जाता है तो उसे किसान को भारी नुकसान का सामना करना पड़ता है। यदि किसान समय से खेतों की जुताई बुवाई करके फसलों का उत्पादन करना चाहता है किंतु समय से वर्षा नहीं होती है तो किसानों को कम उत्पादन प्राप्त होता है अनुमान लगाया जाता था कि इस बार अच्छी वर्षा होगी और समय से मानसून भी प्रवेश करेगा पूर्वानुमान धरा का धरा रह गया।समय से मानसून सक्रिय नहीं हुआ उम्मीद के मुताबिक वर्षा न होने से किसान निराश और हैरान व परेशान है।

जिन किसानों ने गन्ना की बुवाई कर रखा है 6-7 बार गन्ना की सिंचाई कर चुका है अब तक श्रावण मास में भी भारी वर्षा न होने से किसान गन्ना की फसल सींचने पर मजबूर है वहीं दूसरी तरफ जिन किसानों ने धान का महंगा बीज खरीद करके धान की नर्सरी डाला था खेतों में धान लगाने से पहले एक नहीं सौ बार सोचने पर मजबूर हैं। उन्हें पता है यदि अच्छी वर्षा नहीं हुई तो पंपिंग सेट के सहारे धान की फसल पैदा नहीं हो सकती है क्योंकि धान को अधिक पानी की आवश्यकता होती है जो किसान नहरों के सहारे अपनी फसलों को सीचते हैं उन्हें भी चिंता है अगर नहरों में सही समय पर पानी नहीं मिला तो धान की फसल सूख जाएगी क्योंकि जो किसान नहरों से खेतों की सिंचाई करते हैं उनमें अधिकांश किसान के पास पंपिंग सेट नहीं उपलब्ध है भाड़े पर पंपिंग सेट से धान की फसल की सिंचाई करके उत्पादन लेना बहुत महंगा पड़ सकता है।


उधर जो किसान बिजली के सहारे खेतों की सिंचाई करते हैं इस बात की चिंता है कि समय पर पर्याप्त बिजली न मिली तो सूखे से फसलों को बचाना बड़ा मुश्किल होगा।सच्चाई के धरातल पर देखा जाए तो तत्काल प्रभाव से विद्युत आपूर्ति का समय और बढ़ा देना चाहिए वहीं दूसरी तरफ जब तक भारी वर्षा न हो तब तक अनवरत नहरों में पानी की सप्लाई जारी रहना चाहिए।वही दूसरी तरफ जिन किसानों को पंपिंग सेट के सहारे फसलों की सिंचाई करना पड़ रहा है उन्हें फसल बचाने के लिए सरकार द्वारा 5 लीटर प्रति बीघा नि:शुल्क डीजल किसानों को मिलना चाहिए।फसलों को बचाने के लिए किसानों की आर्थिक मदद करना बहुत जरूरी है।


फल एवं सब्जी की खेती करने वाले किसानों को भी सरकार द्वारा सिंचाई के लिए आर्थिक मदद दिया जाना न्यायोचित है किसानों के उन खेतों तक विद्युत तार एवं खम्भा लगाए जाने की आवश्यकता है।जहां पर किसान बिजली के सहारे अपनी फसलों की सिंचाई करना चाहते हैं क्योंकि किसान को नहरों से नि:शुल्क सिंचाई हेतु पानी मिल रहा है बिजली के सहारे कम खर्च पर किसानों की फसलों की सिंचाई हो रही है सबसे अधिक परेशानी उन किसानों को उठानी पड़ रही है जो किसान पंपिंग सेट के सहारे अपने खेतों की फसलों की सिंचाई करते हैं।पंपिंग सेट खरीदने के लिए ब्याज मुक्त लोन देकर किसान की मदद की जा सकती है।सूखा के समय किसानों को पंपिंग सेट चलाने के लिए नि:शुल्क डीजल देकर किसानों की फसलों को सूखने से बचाया जा सकता है। सूखा से निपटने के लिए तत्काल प्रभाव से सरकार को किसानों की मदद के लिए आगे आना चाहिए।