अशोक गहलोत ने उपराष्ट्रपति धनखड़ को राजनीति का जादूगर माना

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को भी राजनीति का जादूगर माना। धनखड़ राजस्थान के ही रहने वाले हैं।

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 20 सितंबर को जयपुर में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के सम्मान में एक रात्रिभोज रखा। इस सम्मान समारोह में गहलोत ने कहा कि उन्हें राजनीति का जादूगर माना जाता है, लेकिन आपने (धनखड़) ने पश्चिम बंगाल में जो राजनीतिक जादू किया, उसकी चर्चा देश में हुई है। गहलोत ने कहा कि धनखड़ के पश्चिम बंगाल का राज्यपाल रहते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से टकराव रहा, टकराव भी जबरदस्त था, लेकिन पिछले दिनों धनखड़ ने जब एनडीए उम्मीदवार के तौर पर उपराष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ा तो ममता बनर्जी की टीएमसी के सांसदों ने मतदान में हिस्सा नहीं लेकर धनखड़ की जीत पक्की की। गहलोत ने धनखड़ से कहा कि उस जादू का राज बताया जाए, जिसमें ममता बनर्जी ने आपका समर्थन किया। इस पर धनखड़ ने कहा कि राज्यपाल के पद पर रहते हुए उन्होंने कोई भी कार्य गैर संवैधानिक नहीं किया। सभी कार्य संविधान के दायरे में रहकर किए गए।

गहलोत ने धनखड़ की जादूगरी की बात तब कही है, जब राजस्थान में अगले वर्ष विधानसभा के चुनाव होने हैं। गहलोत ने पिछले चार वर्षों में जिस तरह अपनी सरकार को बचाए रखा है, उसमें गहलोत को राजनीति का जादूगर माना गया है, लेकिन अब जब गहलोत कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने जा रहे है, तब जगदीप धनखड़ को राजस्थान में राजनीति का जादूगर बताना मायने रखता है। चूंकि धनखड़ भी राजस्थान के ही निवासी है, इसलिए भाजपा की ओर से कभी भी राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि अगले पांच वर्ष तक जगदीप धनखड़ उपराष्ट्रपति ही बने रहेंगे। इसमें कोई दो राय नहीं कि उपराष्ट्रपति पद के चुनाव में ममता की पार्टी के सांसदों का अप्रत्यक्ष समर्थन लेकर धनखड़ ने राजनीति में जादूगर का ही काम किया है। राज्यपाल रहते हुए धनखड़ और ममता के बीच जो टकराव देखने को मिला उसमें यह उम्मीद नहीं कही जा सकती थी कि मतदान का बहिष्कार कर ममता के सांसद धनखड़ की जीत पक्की करेंगे। असल में भीषण टकराव के बाद भी धनखड़ ने ममता बनर्जी से व्यक्तिगत संवाद बनाए रखा।