धनुर्विद्या का केंद्र रही है अयोध्या

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धनुर्विद्या का केंद्र रही है अयोध्या
धनुर्विद्या का केंद्र रही है अयोध्या

अयोध्या धनुर्विद्या का केंद्र रही है याद दिलाएगा प्रवेश द्वार। राम पथ पर प्रदेश करते ही होंगे अलौकिक धनुष के दर्शन।

पंकज यादव

अयोध्या। अयोध्या की संस्कृति और इतिहास को समेटे भव्य प्रदेश द्वार का निर्माण शुरू कराया जा रहा है।अगले कुछ महीने में यह दिखने लगेगा। यह प्रवेश द्वार राजकीय इंटर कालेज में हो रही तीरंदाजी प्रतियोगिता की याद भी दिलाता रहेगा। साथ ही यह भी बताता रहेगा कि अयोध्या दुनिया के श्रेष्ठ धनुर्धरों की धरती रही है। रामपथ राममंदिर को जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग है। यह लगभग 13 किमी लंबा है। सहादतगंज इसका इंट्री प्वाइंट है। यहां पर अयोध्या विकास प्राधिकरण ने भव्य प्रवेश द्वार का निर्माण शुरू करा दिया है। डिजाइन रामायण थीम पर आधारित है। यह अयोध्या की संस्कृति और इतिहास को दर्शाता है। अयोध्या श्रीराम की नगरी है। त्रेता युग में यह धनुर्विद्या का केंद्र रहा है। श्रीराम और उनके भाई धनुर्विद्या के महारथी थे। जानकार बताते हैं कि धनुष बाण शस्त्र है। इस पर दिव्य अस्त्रों का संधान किया जाता है। श्रीराम, परशुराम, अर्जुुन, भीष्म, द्रोणाचार्य, कृपाचार्य, कर्ण, शल्य जैसे ढाई दर्जन ऐसे महायोद्धा थे। इन्ही स्मृतियों को सहेजने के लिए राम पथ पर प्रवेश करते ही पर्यटकों को त्रेता युग की याद दिलाने के लिए आकर्षक धनुष का निर्माण किया जा रहा है। राम पथ पर प्रवेश करते ही अपने आप में एक अनुपम छवि समिति हुए यह धनुष श्री राम की याद दिलाएगा। धनुर्विद्या का केंद्र रही है अयोध्या