बिहार के उलटफेर से यूपी में सतर्क है भाजपा

वोटबैंक व श्रेय के लिए भाजपा,सपा,निषाद पार्टी,सुभासपा में होड़। 13 प्रतिशत वोटबैंक वाली निषाद जातियाँ डेढ़ दशक से लगाये बैठीं हैं आस।

चौ.लौटनराम निषाद

लखनऊ। लोकसभा चुनाव की जमीन तलाशने के लिए विपक्षी दल हर कुएं में बांस डाल रहे हैं, ऐसे में 17 अतिपिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति का आरक्षण दिलाने के लिए भाजपा के तेज कदम देखकर सपा सतर्क हो गई है।श्रेय की सियासत में अब सपा ने दांव चला है। चूंकि, मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के शासनकाल में सपा सरकार ने भी केंद्र को आरक्षण का प्रस्ताव भेजा था, इसलिए रणनीति बनी है यथासंभव इन जातियों की नायक बनने चली भाजपा को खलनायक साबित किया जाए।यह न हो तो आरक्षण के अंतिम निर्णय तक आंदोलन की हांक लगाई जाए, ताकि सत्ताधारी दल के संभावित लाभ में कुछ हिस्सेदारी जरूर हो जाए। प्रदेश की 17 अतिपिछड़ी जातियों निषाद, केवट, मल्लाह, बिन्द,धीवर, धीमर, बाथम, रायकवार,तुरहा, गोडिया,माँझी, मछुआ, कहार,कश्यप, कुम्हार, प्रजापति, भर, राजभर को अनुसूचित जाति का आरक्षण दिलाने का मुद्दा दशकों पुराना है।राष्ट्रीय निषाद संघ कस आंदोलन को देखते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने 10 मार्च,2004 को 17 अतिपिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने का केन्द्र सरकार को प्रस्ताव भेजवाये थे।

31 अगस्त को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने अखिलेश यादव व योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा 17 अतिपिछड़ी जातियों को एससी दर्जा के लिए जारी अधिसूचनाओं को रद्द कर दिया।भाजपा,सपा,बसपा,सुभासपा,निषाद पार्टी में वोटबैंक व श्रेय के लिए होड़ मची है।उत्तर प्रदेश में 13 प्रतिशत निषाद जातियों के साथ 17 अतिपिछड़ी जातियों की आबादी 16 प्रतिशत है,जो काफी महत्वपूर्ण है।ये जिधर मुड़ती हैं,उस दल का पलड़ा भारी हो जाता है।न्यायालय द्वारा अधिसूचनाओं के रद्द होने पर निषाद पार्टी के मुखिया व मत्स्यमंत्री संजय निषाद ने निर्णय का स्वागत किया था।कहा था कि एक सप्ताह में ड्राफ्ट तैयार कर केन्द्र सरकार को भेज दिया जाएगा।सम्भावना थी कि विधानसभा सत्र में प्रस्ताव पारित कर केन्द्र सरकार को भेजने की प्रक्रिया शुरू होगी,लेकिन सत्र में इस पर कोई चर्चा ही नहीं हुई।

प्रदेश सरकार के प्रस्ताव को आरजीआई ने खारिज कर दिया था।सपा के साथ बसपा सरकार ने भी कोटा बढ़ाते हुए इन जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने के लिए प्रधानमंत्री के नाम 4 मार्च,2008 को प्रधानमंत्री के नाम अर्द्धशासकीय पत्र भेजा था।कांग्रेस व भाजपा ने भी विधानसभा चुनाव घोषणा पत्र 2007 व 2012 में 17 अतिपिछड़ी जातियों अनुसूचित जाति में शामिल कराने का वादा किया था। मुद्दा डेढ़ दशक पुराना है,पर मामला परिणाम तक नहीं पहुंचा। कभी केंद्र और राज्य की अलग-अलग सरकारों की खींचतान तो कभी नियमों के खेल में यह मुद्दा फुटबाल बना रहा। हाल ही में उच्च न्यायालय ने मुलायम सिंह सरकार और अखिलेश यादव सरकार सहित योगी सरकार द्वारा पिछले कार्यकाल में जारी अधिसूचनाओं को खारिज कर दिया।

बिहार के उलटफेर से यूपी में सतर्क है भाजपा

बिहार में नीतीश कुमार के पाला बदलकर राजद के साथ मिलकर सरकार बनाने से भाजपा 2024 के लोकसभा चुनाव को लेकर काफी चिंतित है।उत्तर प्रदेश में इन जातियों की संख्या लगभग 16 प्रतिशत है,जो राजनीतिक रूप से काफी निर्णायक है।इसलिए मुख्यमंत्री व भाजपा रणनीतिकार इस मुद्दे पर काफ़ी गम्भीर है।इसके साथ ही भाजपा की केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार ने लोकसभा चुनाव से पहले इन 17 जातियों को आरक्षण दिलाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। भाजपा की नजर इस मुद्दे के सहारे अतिपिछड़ी जातियों के बड़े वोटबैंक पर है, लेकिन सपा इस मामले में भाजपा को वाकओवर देने के मूड में कतई नहीं है।इसी रणनीति के तहत तय हुआ है कि सपा लोकसभा चुनाव के पहले प्रत्येक लोकसभा क्षेत्र में आरक्षण बचाओ पंचायत आयोजित करेगी। इसकी जिम्मेदारी समाजवादी पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष डा. राजपाल कश्यप को दी गई है। इसकी रूपरेखा बनाने के लिए शनिवार को लखनऊ स्थित सहकारिता भवन में महापंचायत आयोजित किया था। 17 अतिपिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में परिभाषित करने के लिए सपा सरकार में दो बार प्रस्ताव भेजा गया था। इन प्रस्तावों को खारिज कर दिया गया। भाजपा सरकार ने जानबूझ कर ऐसा किया है।इस तरह का आरोप सपा नेताओं ने भाजपा पर मढ़ा है।


राष्ट्रीय निषाद संघ की माँग है कि केंद्र व प्रदेश, दोनों ही जगह भाजपा की सरकार है, इसलिए 17 जातियों को एससी में आरक्षण का लाभ तत्काल दिलाया जाये।संघ के राष्ट्रीय सचिव चौ.लौटनराम निषाद ने कहा कि 2001 से हम लोगों के द्वारा लगातार इसके लिए आंदोलन होता रहा है।जब मेरे द्वारा आन्दोलन की शुरुआत की गई तो उस समय किसी भी नेता को इसकी ए बी सी भी पता नहीं था।निषाद, कश्यप समाज के नेता साल दो साल में कभी कभार बालू,घाट व मत्स्याखेट व शिकारमाही और मत्स्य पालन पट्टा की माँग करते थे।राष्ट्रीय निषाद संघ ने जिला,मण्डल,विधानसभा पर धरना प्रदर्शन, रेल रोको आंदोलन के साथ 8 बार जंतर मंतर पर धरना प्रदर्शन व 5 दिनों तक आमरण अनशन किया गया।


राष्ट्रीय निषाद संघ की मांग पर कांग्रेस बढ़ी आगे,पर सपा ने टाँग अड़ा दिया। किसी भी जाति,उपजाति को एससी, एसटी में शामिल करने,सूची में संशोधन के लिए संविधान के अनुच्छेद-341 व 342 में संशोधन के लिए संसद में विधेयक पारित करना होता है।राष्ट्रीय निषाद संघ का प्रतिनिधि मंडल उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष सलमान खुर्शीद के माध्यम से कांग्रेस हाई कमान से कई बार वार्ता किया और सलमान जी ने विधिक सलाह भी दिए।संघ ने 3 अक्टूबर,2005 में मर्चेंट चेम्बर,कानपुर में गृह राज्यमंत्री श्री प्रकाश जायसवाल के मुख्य आतिथ्य में निषाद आरक्षण महापंचायत आयोजित किया।उन्होंने कहा कि शीघ्र ही उत्तर प्रदेश के कश्यप निषाद समुदाय को एससी आरक्षण की सौगात मिलेगी।दूसरे ही दिन तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस घर घोषणा किये कि प्रदेश सरकार 17 जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने की अधिसूचना जारी करेगी।राजनीतिक लाभ के लिए सपा सरकार ने नियम विरुद्ध 10 अक्टूबर 2005 को कार्मिक अनुभाग-2 से अधिसूचना जारी करा दिया,जो उच्च न्यायालय में जाकर फँस गया।अन्यथा कांग्रेस सरकार पूरा मन बना चुकी थी।

पूर्व राज्यसभा सांसद विशम्भर प्रसाद निषाद ने कहा कि उन नेताओं का समाज बहिष्कार करेगा, जिन्होंने आरक्षण के नाम पर गुमराह कर भाजपा के समर्थन में मतदान कराया था।उन्होंने भाजपा के स्वजातीय नेताओं का हुक्का पानी बन्द करने का आह्वान किया। किस लोकसभा क्षेत्र में किस जाति के लोग अधिक हैं, इसकी सूची भी तैयार कराई जाएगी। इसके बाद उस लोकसभा क्षेत्र में संबंधित जाति के नेता को पंचायत के आयोजन की जिम्मेदारी दी जाएगी। सपा नेताओं के उस बयान कि भाजपा के निषाद, कश्यप नेताओं का बहिष्कार किया जाएगा,पर चुटकी लेते हुए लौटनराम निषाद ने कहा कि सपा नेता ये बताए कि सपा सरकार ने अधिसूचना जारी किया तो राजनीतिक मलाई काट रहे किस नेता ने न्यायालय में कैविएट व इंप्लीमेंट दाखिल किया,कितने बार उच्च न्यायालय गए,2017 से आज तक आरक्षण के मुद्दा पर क्या किये?कहा कि सपा के निषाद, बिन्द, कश्यप,प्रजापति,राजभर नेता सिर्फ घड़ियालु आँसू बहा रहे हैं।