एनडीपीएस अधिनियम के तहत भांग प्रतिबंधित नहीं-कर्नाटक हाईकोर्ट

एनडीपीएस अधिनियम के तहत भांग प्रतिबंधित नहीं, पीड़ित पक्ष को यह दिखाना होगा कि यह चरस/गांजा से तैयार किया गया है।

अजय सिंह

🟦 कर्नाटक हाईकोर्ट ने भांग रखने के आरोपी व्यक्ति को यह कहते हुए जमानत दे दी कि भांग नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट (एनडीपीएस) के तहत नहीं आता।

🟩 जस्टिस के नटराजन की एकल पीठ ने आरोपी रोशन कुमार मिश्रा द्वारा दायर याचिका को स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने उसे दो लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के दो जमानतदारों के निष्पादन पर जमानत दे दी।

⬛बेंच ने मुख्य रूप से मधुखर बनाम महाराष्ट्र राज्य 2002, एससीसी ऑनलाइन, बॉम्बे 1271 के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले और अर्जुन सिंह बनाम हरियाणा राज्य, 2004 एससीसी ऑनलाइन, पी एंड एच 828 के मामले में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले पर भरोसा किया, जिसमें अदालतों ने आरोपी व्यक्तियों को यह कहते हुए बरी कर दिया कि भांग एनडीपीएस अधिनियम की परिभाषा के अंतर्गत नहीं आता है।

🟥 पीठ ने पीड़ित पक्ष के तर्कों को स्वीकार करने से भी इनकार कर दिया कि भांग गांजा के पत्तों से तैयार किया जाता है, इसलिए यह गांजा की परिभाषा के अंतर्गत आता है।
चरस और गांजा या किसी भी मिश्रण से संबंधित अधिनियम की धारा 2 (iii) (ए) और (बी) का जिक्र करते हुए बिना किसी तटस्थ सामग्री के उपरोक्त किसी भी प्रकार की भांग या उससे तैयार किए गए किसी भी पेय पर बेंच ने कहा, “इस न्यायालय के समक्ष यह दिखाने के लिए कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं कि भांग चरस या गांजा के पत्तों से तैयार किया जाता है।

🟧चूंकि गांजा के पत्तों और बीजों को गांजा की परिभाषा से बाहर रखा गया है, इसलिए एनडीपीएस अधिनियम में कहीं भी भांग को प्रतिबंधित पेय या प्रतिबंधित ड्रग के रूप में संदर्भित नहीं किया गया। यहां तक ​​कि राज्य सरकार ने भी एनडीपीएस के तहत कोई नियम नहीं बनाया। न ही भांग को निषेधात्मक दवा के रूप में उल्लेख किया और न ही भांग के संबंध में कोई अधिसूचना जारी की।

इसके बाद बेंच ने राय दी,

🟫”यह उल्लेखनीय है कि भांग पारंपरिक पेय है, उत्तर भारत में ज्यादातर लोग विशेष रूप से शिव मंदिरों में भांग पीते हैं। यह अन्य सभी पेय की तरह लस्सी की दुकानों में भी उपलब्ध है। इसके अलावा, उक्त भांग को ब्रांडेड नामों के साथ बाजार में बेचा जाता है।” अंत में यह कहा गया, “फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट प्राप्त होने तक यह पुष्टि करने के लिए कि यह भांग चरस या गांजे से तैयार किया गया है, न्यायालय इस निष्कर्ष पर नहीं आ सकता कि भांग गांजे के पदार्थ से तैयार किया गया है।

❇️तदनुसार कोर्ट ने याचिका स्वीकार कर ली और आरोपी को जमानत दे दी।

केस टाइटल: रोशन कुमार मिश्रा बनाम कर्नाटक राज्य
केस नंबर: आपराधिक याचिका नंबर 6611/2022
साइटेशन: लाइव लॉ (कार) 340/2022
आदेश की तिथि: 26 अगस्त, 2022 उपस्थिति: याचिकाकर्ता के लिए एडवोकेट एस मनोज कुमार; प्रतिवादी के लिए एचसीजीपी आर.डी.रेणुकाराध्याय