Wednesday, May 18, 2022
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साहित्य जगत

                                                                      ..........  माँ .......... माँ धरती जैसा धीरज तुम मे सागर  जैसी  गहराई ।  तेरे होठो पर हरदम मुस्कान है छाई। कोई सानी नही है तेरे दुलार का ,      पुचकार का,  प्यार भरी फटकार का ।      गले लगाकर देना ढेरो आशीर्वाद  का। आंखों से छलकते जज़्बात का ।। बखान कैसे करूँ मैं तेरे गुणों...
हिन्दू और हिन्दुत्व काफी लम्बे समय से चर्चा में है। भारत में ईसाई एवं मुसलमान आबादी को छोड़कर बाकी सब लोग वैदिक धर्म का पालन करते है। इस परम्परा में धर्म पालन की बाध्यता नहीं है। हिन्दू परिपूर्ण लोकतांत्रिक एक जीवनषैली है। डॉ0 रामधारी सिंह दिनकर ने संस्कृति के...
मां मेरी अनपढ़ मगर, ज्ञान ध्यान में भोर।देख अंधेरा द्वेष छल, जने सूर्य सुख घोर।। मां की ममता छांव में, सकल ब्रह्म विस्तार।करें प्रगति उत्थान नित, सौंप सभ्यता प्यार।। मां धरती जल अग्नि नभ, जिए हवा गम्भीर।दृष्टि वृष्टि से सृष्टि रच, होती नहीं अधीर।। अजर अमर पावन बहुत, मां गरिमा का नाम।करें...
सरगम की शुभ तान है माँमीठा मधुरिम गान है माँ सांसे जो भी लिखती हैंगीतों का उन्वान है माँ बच्चों के उन्नति पथ कीमील -मील पहचान है माँ लक्ष्य जो भी भेदे हमनेउन सब का संधान है माँ आँचल में बाँधे रखतीसारे सुख की खान है माँ पीड़ा पल में हर लेतीवह प्यारी मुस्कान...
अलका अस्थाना ‘अमृतमयी’ मातृत्व संसृति की अनूठी उपज है। जहां कि सात स्वरों से मिलते एक शब्द ‘माँ' है। जहां उसकी गोद ‘माँ’ के शब्द को सुनने के लिए आतुर रहती है। प्रेम की पराकाष्ठा और फिर जन्म लेता है, वह पाक़ शब्द । शिशु के रूप में जहां स्त्रीत्व...

मां

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मां शत् शत् नमनतेरी चरण कमल मेंईश्वर के जो,सुने थेसब गुण मुझमें पाया मांशत् शत् नमन……बन ब्रह्मा तुमने जन्म दियाविष्णु बनकर पालन कियाशिव त्रिशूल बनमेरी जीवन रक्षिणीतुम्हीं बनी हो मांमेरा जीवन तुझसे ही हैतुझसे ही पहचान है मांतू! ना होती तो;मैं! भी ना होती;फिर, मैं कैसे बनती मां?तू पूज्यनीय,तू वंदनीय,तू...
माँ एक भाव है मातृत्व का, प्रेम और वात्सल्य का, त्याग का और यही भाव उसे विधाता बनाता है। मां विधाता की रची इस दुनिया को फिर से, अपने ढंग से रचने वाली विधाता है। मां सपने बुनती है और यह दुनिया उसी के सपनों को जीती है और...
माँ या जादूगरमाँ सच बतानानहीं तुम छिपानातुम माँ होया कोई जादूगर।देशी-विदेशीकितनी भी महँगी सुगन्ध लगा लेंतेरे आँचल की खुशबूका जवाब नहीं।बना लें छप्पन पकवान भलेतेरे हाथों की चुपड़ी रोटीसा स्वाद नहीं।भले भायें कितनी कहानीपर तेरी मन गढ़ंत कहानीसी बात नहीं।चाहे कितनी दवा लगाएंपर तेरी फूँक सासवाब नहीं।नींद की...
वास्तविकता को प्रकट करती पंक्तियां सोचा आप लोगों के बीच जरूर रखें, आशा है आप लोगों को जरूर पसंद आएंगी- देहरी, आंगन, धूप नदारद। ताल, तलैया, कूप नदारद। घूँघट वाला रूप नदारद।डलिया,चलनी,सूप नदारद। आया दौर फ्लैट कल्चर का,देहरी, आंगन, धूप नदारद। हर छत पर पानी की टंकी,ताल, तलैया, कूप नदारद। लाज-शरम चंपत आंखों से,घूँघट...
विज्ञान और धर्म अलग नहीं, बल्कि एक ही सिक्के के दो पहलू हैं..!      धर्म भी विज्ञान की ही भाँति अनंत शक्तियों का स्रोत है परंतु धर्म प्रयोगों व तथ्यों पर नहीं अपितु अनुभवों, विश्वासों व आस्थाओं पर आधारित है मनुष्य की धार्मिक आस्था उसे आत्मबल प्रदान करती है। मनुष्य की...

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