Thursday, August 18, 2022
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साहित्य जगत

विष्णु के तीन पद यदि सृष्टि करते हैं, स्थापन करते हैं, धारण करते हैं तो वहीं पर आश्रित जनों का पालन-पोषण भी किया करते हैं। लोगों को अपना भोग्य अन्नादि उन्हीं तीन पद-क्रमों के प्रसादस्वरूप प्राप्त होता है, जिससे कि वे परम तृप्ति का अनुभव किया करते हैं। जो लोग...
प्रकृति दिव्य है। सदा से है। देवी है। मनुष्य की सारी क्षमताएँ प्रकृति प्रदत् है। जीवन के सुख-दुख, लाभ-हानि व जय-पराजय प्रकृति में ही संपन्न होते हैं। दुनिया की अधिकांश संस्कृतियों में ईश्वर या ईश्वर जैसी परमसत्ता को प्रकृति का संचालक जाना गया है। ईसाईयत में यह संचालक पिता-परमेश्वर...
रस जीवन का प्रवाह है। हम रस अभीप्सु हैं और रस जिज्ञासु भी। अथातो रस जिज्ञासा। बातें भी रस पूर्ण होती हैं लेकिन द्रव्य या वस्तु नहीं होतीं।आनंदहीन बातचीत नीरस कही जाती हैं। बातों का रस बतरस कहा जाता है। रसभाव से भरेपूरे वाक्य काव्य हो जाते हैं। रस...
हाथरस, उत्तर प्रदेश के हाथरस में हुई गैंगरेप की घटना…दरिंदगी... पुलिस की लापरवाही…..पीड़िता की मौत…..कुछ यही कहानी है उस 19 साल की बेबस लड़की की जिसने 15 दिन तक शासन की लापरवाही और खुद के बेदम होते शरीर से जंग लड़ी और...
भाषा संस्कृति की संवाहक होती है। हिन्दी में भारतीय संस्कृति की अभिव्यक्ति है। लेकिन अंग्रेजी की ठसक है। महात्मा गांधी इस बात पर दुखी थे। भाषा के प्रश्न पर म0 गांधी ने लिखा था, “पृथ्वी पर हिन्दुस्तान ही एक ऐसा देश है जहां मां बाप अपने बच्चों को अपनी...
आचार्य अत्रे स्मृति प्रतिष्ठान, पुणे के द्वारा उत्तर प्रदेश के पूर्व राज्यपाल श्री राम नाईक को उनके आत्मकथात्मक ग्रंथ ‘चरैवेति! चरैवेति!!’ और ‘कर्मयोद्धा’ को कऱ्हा नदी का पानी बृहत् आत्मचरित्र आचार्य अत्रे पुरस्कार घोषित हुआ है. पुरस्कार प्रदान समारोह पुणे में दिनांक 13 अगस्त को शाम को 6.00 बजे...
प्रभु का स्मरण करने का रास्ता भी एक है तथा मंजिल भी एक है..! प्रभु का स्मरण करने का रास्ता भी एक है तथा मंजिल भी एक है:- विश्व भर में धर्म के नाम पर जो लड़ाई-झगड़े हो रहे हैं, उसके पीछे एकमात्र कारण...
आईआईएमसी की प्रोफेसर अनुभूति यादव की किताब ’मीडिया लिट्रेसी’ का सफ़लता पूर्वक हुआ विमोचन। लखनऊ। वर्तमान मीडिया युग के दौर में सही खबरों का स्थान फेक न्यूज और अफवाहों ने बहुत तेजी से ले लिया है. इसी को मद्देनजर रखते हुए गलत खबरों को रोकने के लिए तमाम मीडिया...
विद्वानों ने 12 महीनों मे से चार महीने का दायित्व, कर्त्तव्य और आनंद को एक अवधि में लाने का प्रयास किया है। हिन्दू संस्कृति में आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, आश्विन मास पवित्र माने गये हैं।चैमासा के चार माह व्रत उपासना का सुंदर अवसर है। ये आषाढ़ शुक्ल एकादशी से...
भारत में इतिहास पर बहसें चलती हैं। यूरोपीय विद्वान भारत पर इतिहास की उपेक्षा का आरोप लगाते हैं। मैक्समूलर ने लिखा, “हिन्दू दार्शनिकों की एक जाति थी। उनका संघर्ष विचारों का संघर्ष था। उनका अतीत सृष्टि की समस्या थी, उनका भविष्य अस्तित्व का प्रश्न था …… यह कहना सही...

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