Sunday, December 4, 2022
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जीवन इसी जगत में है और सुख दुख भी। आनंद भी इसी संसार में है। योग ध्यान भक्ति उपासना इसी संसार में है। भारतीय धर्म चिंतन में चार पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष प्राप्ति का क्षेत्र यही संसार है। संसार...
हम भारतीय सनातनकाल से प्रकाशप्रिय हैं। भारत का भा प्रकाशवाची है और ‘रत‘ का अर्थ संलग्नता है। भारत अर्थात प्रकाशरत राष्ट्रीयता। हम सब के चित्त में प्रकाश की अतृप्त अभिलाषा है। सम्पूर्ण अस्तित्व अपने मूल स्वरूप में प्रकाश रूपा है। अष्टावक्र ने जनक की सभा में कहा था, ‘‘वह...
हम भारतीय सनातनकाल से प्रकाशप्रिय हैं। भारत का भा प्रकाशवाची है और ‘रत‘ का अर्थ संलग्नता है। भारत अर्थात प्रकाशरत राष्ट्रीयता। हम सब के चित्त में प्रकाश की अतृप्त अभिलाषा है। सम्पूर्ण अस्तित्व अपने मूल स्वरूप में प्रकाश रूपा है। अष्टावक्र ने जनक की सभा में कहा था, ‘‘वह...
          कभी-कभी घर से तालाब का नजदीक होना बच्चों को बहुत अच्छा लगता है। जब मन किया तालाब जाएँ, नहाएँ, मन भर डूबकें; और तैरें। पड़कीभाट गाँव का तालाब तो बिल्कुल घर से लगा लगा हुआ ही था; तभी तो प्रिया मनमाफिक आनंद लेती थी...
भारतीय ज्ञान परम्परा में काल की प्रतिष्ठा है। काल उपास्य है। माना जाता है कि जीवन काल के अधीन है। वैदिक साहित्य से लेकर रामायण महाभारत तक काल की चर्चा है। ऋग्वेद(1.64.2) में कहते हैं, ‘‘तीन नाभियों वाला कालचक्र गतिशील, अजर और अविनाशी है। इसके भीतर सभी लोक विद्यमान...
भारतीय ज्ञान परम्परा में काल की प्रतिष्ठा है। काल उपास्य है। माना जाता है कि जीवन काल के अधीन है। वैदिक साहित्य से लेकर रामायण महाभारत तक काल की चर्चा है।ऋग्वेद (1.64.2) में कहते हैं, ‘‘तीन नाभियों वाला कालचक्र गतिशील, अजर और अविनाशी है। इसके भीतर सभी लोक विद्यमान...
श्रीराम मंगल भवन हैं और अमंगलहारी। वे भारत के मन में रमते हैं। मिले तो राम राम, अलग हुए तो राम राम। राम का नाम हम सब बचपन से सुनते आए हैं। वे धैर्य हैं। सक्रियता हैं। परम शक्तिशाली हैं। भाव श्रद्धा में वे ईश्वर हैं। राम तमाम असंभवों...
भारत के धरती और आकाश केसरिया हो गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का आत्मविश्वास सातवें आसमान पर है। अब भारत की ओर दुनिया की कोई भी महाशक्ति आंख नहीं उठा सकती। एक नई तरह का सांस्कृतिक पुनर्जागरण चल रहा है। हम भारत के लोग अपनी...
जो इस धरती पर स्वर्ग का निर्माण करती है वही माँ होती है। एक हिन्दी फिल्म का अत्यंत चर्चित डायलॉग है और वो ये कि मेरे पास माँ है। इससे सिद्ध होता है कि इस संसार में माँ से बढ़कर न तो कोई रिश्ता है और...
भारतीय दर्शन का उद्देश्य लोकमंगल है। कुछ विद्वान भारतीय चिंतन पर भाववादी होने का आरोप लगाते हैं। वे ऋग्वेद में वर्णित कृषि व्यवस्था पर ध्यान नहीं देते। अन्न का सम्मानजनक उल्लेख ऋग्वेद में है, अथर्ववेद में है। उपनिषद् दर्शन ग्रन्थ हैं। उपनिषदों में अन्न की महिमा है। तैत्तिरीय उपनिषद्...

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