Sunday, December 4, 2022
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विज्ञान और धर्म अलग नहीं, बल्कि एक ही सिक्के के दो पहलू हैं..!      धर्म भी विज्ञान की ही भाँति अनंत शक्तियों का स्रोत है परंतु धर्म प्रयोगों व तथ्यों पर नहीं अपितु अनुभवों, विश्वासों व आस्थाओं पर आधारित है मनुष्य की धार्मिक आस्था उसे आत्मबल प्रदान करती है। मनुष्य की...
  भारत में गणित का विकास वैदिककाल में ही हो रहा था। ऋग्वेद में इसके साक्ष्य हैं। लेकिन अंग्रेजी सत्ता के प्रभाव व अन्य कारणों से कुछ विद्वानों का मत भिन्न है कि प्राचीनकाल में भारतवासियों को शून्य की जानकारी नहीं थी। शून्य गणित का मुख्य...
प्रकृति दिव्य है। सदा से है। देवी है। मनुष्य की सारी क्षमताएँ प्रकृति प्रदत् है। जीवन के सुख-दुख, लाभ-हानि व जय-पराजय प्रकृति में ही संपन्न होते हैं। दुनिया की अधिकांश संस्कृतियों में ईश्वर या ईश्वर जैसी परमसत्ता को प्रकृति का संचालक जाना गया है। ईसाईयत में यह संचालक पिता-परमेश्वर...
हम भारतीय सनातनकाल से प्रकाशप्रिय हैं। भारत का भा प्रकाशवाची है और ‘रत‘ का अर्थ संलग्नता है। भारत अर्थात प्रकाशरत राष्ट्रीयता। हम सब के चित्त में प्रकाश की अतृप्त अभिलाषा है। सम्पूर्ण अस्तित्व अपने मूल स्वरूप में प्रकाश रूपा है। अष्टावक्र ने जनक की सभा में कहा था, ‘‘वह...
डॉ0सत्य प्रकाश सिंह हिंदुत्व क्या है, जीवन में पूर्णता का सतत प्रयास, अपनी श्रेष्ठतम संभावनाओं की अभिव्यक्ति, परम तत्व की खोज, परम प्रेम, व करुणा, परमात्मा को समर्पण ही हिंदुत्व है, हिंदुत्व ही भारत की अस्मिता संस्कृति और पहचान है, सनातन हिंदू धर्म ही भारत है और भारत सनातन हिंदू...
फिर चुनाव की बजी डुगडुगी,लड़ने को मशकूर चल पड़े।कोल्हू के बैलों के माफिक,सधे हुए मजबूर चल पड़े। ना निर्णय में राय कहीं पर,ना पाने में हिस्सेदारी,फिर भी सर पर कफ़न बांधकर,मरने को मजदूर चल पड़े। फिर चुनाव की बजी डुगडुगी,लड़ने को मशकूर चल पड़े।कोल्हू के बैलों के माफिक,सधे हुए मजबूर चल...
श्रीराम मंगल भवन हैं और अमंगलहारी। वे भारत के मन में रमते हैं। मिले तो राम राम, अलग हुए तो राम राम। राम का नाम हम सब बचपन से सुनते आए हैं। वे धैर्य हैं। सक्रियता हैं। परम शक्तिशाली हैं। भाव श्रद्धा में वे ईश्वर हैं। राम तमाम असंभवों...
भारत की देव-प्रतीति निराली है। जहाँ-जहाँ दिव्यता वहाँ-वहाँ देवता के दर्शन होते हैं। इसीलिए अनेक विद्वान भारत को बहुदेववादी कहते हैं। वस्तुतः भारत के लोग बहुदेववादी नहीं हैं। हम बहुदेव उपासक हैं। भारतीय संस्कृति और परंपरा के एक खूबसूरत देवता हैं हनुमान। वे परम भक्त का अकेला उदाहरण हैं।...
जो निरंतर जीवंत, नवीन तथा युगानुकूल है, वही ईश्वर है,अल्ला है, गॉड है, वाहे गुरू है...!डॉ0 जगदीश गाँधी
आनंद सबकी अभिलाषा है। प्रसन्नता मापने का मानक तय करना कठिन है। लेकिन पिछले 10 वर्ष से आनंद या हैप्पीनेस की मात्रा जानने का काम जारी है। इसकी शुरूआत वर्ष 2012 में हुई थी। लगभग 150 देशों को इस रैंकिंग में शामिल किया जाता है। वैसे व्यक्ति-व्यक्ति...

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