मुख्य सचिव ने UP रीजनल प्लानिंग कॉन्क्लेव-2023 को किया सम्बोधित

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मुख्य सचिव ने UP रीजनल प्लानिंग कॉन्क्लेव-2023 को किया सम्बोधित
मुख्य सचिव ने UP रीजनल प्लानिंग कॉन्क्लेव-2023 को किया सम्बोधित

मुख्य सचिव ने वीडियो कॉन्फ्रेन्सिंग के माध्यम से उ0प्र0 रीजनल प्लानिंग कॉन्क्लेव-2023 को किया सम्बोधित। मुख्य सचिव ने UP रीजनल प्लानिंग कॉन्क्लेव-2023 को किया सम्बोधित



लखनऊ।
 मुख्य सचिव ने वीडियो कॉन्फ्रेन्सिंग के माध्यम से होटल ताज महल में आवास एवं शहरी नियोजन विभाग, उ0प्र0 एवं हाई लेवल कमेटी ऑन अर्बन प्लानिंग, आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित ‘उत्तर प्रदेश रीजनल प्लानिंग कॉन्क्लेव-2023’ को सम्बोधित किया। दुर्गा शंकर मिश्र ने कहा कि शहर ही आर्थिक विकास का मुख्य आधार है। शहर में शिक्षा, स्वास्थ्य, मनोरंजन से लेकर हर प्रकार की सुख-सुविधाएं पानी, बिजली, गैस, मकान उपलब्ध हैं, इसलिए लोग यहां आना चाहते हैं और हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपने शहरों को साफ-सुथरा और हर दृष्टिकोण से बेहतर बनाएं।


         उन्होंने कहा कि बिना प्लानिंग के विकास कार्यों में सुधार से ज्यादा गड़बड़ी की आशंका रहती हैं। शहरों के नियोजित विकास से राज्य के आर्थिक और संगठित विकास को बढ़ावा मिलेगा। शहरों के सुनियोजित विकास रीजनल प्लानिंग की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। रीजनल प्लानिंग और सामान्य प्लानिंग में बहुत फर्क है। इस बारे में आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा अर्बन एण्ड रीजनल डेवलपमेंट प्लान्स फार्मुलेशन एण्ड इम्पलीमेंटेशन गाइडलाइन्स वर्ष 2018 में जारी की गई थीे। इस गाइडलाइन्स के आधार पर रीजनल प्लान और मास्टर प्लान तैयार किया जाता है।


        मुख्य सचिव ने बताया कि मास्टर प्लान एक शहर का होता है। रीजनल प्लान में आसपास के शहरों, विकास प्राधिकरणों, नगर निकायों को जोड़कर विकास कार्य किया जाना है। 50,000 से अधिक आबादी वाले प्रत्येक शहर का जीआईएस बेस्ड मास्टर प्लान तैयार हो रहा है। इसके बाद इन सभी जिलों का एक मास्टर प्लान तैयार होगा, ताकि इनका विकास हो सके।लोगों में बेहतर जीवन जीने की अवधारणा तेजी से बढ़ रही है और इस वजह से शहरों में जनसंख्या भी तेजी से बढ़ रही है, इसलिये भविष्य की आवश्कताओं को ध्यान में रखकर ही रीजनल प्लान तैयार करना होगा, तभी नागरिकों को बेहतर सेवायें प्रदान कर पायेंगे।


         दुर्गा शंकर मिश्र ने कहा कि प्रधानमंत्री ने वर्ष 2047 तक देश को विकसित बनाने का संकल्प लिया है। देश को विकसित बनाने का बहुत बड़ा जरिया शहरीकरण होगा। यह प्लान अमृत काल के लिये तैयार हो रहा है, ताकि आकांक्षाओं और अपेक्षाओं को लेकर शहर आने वाले लोगों को बेहतर क्वालिटी ऑफ लाइफ दी जा सके। कई बार देखने को मिलता है, शहरों में सुविधायें विकसित हो जाती हैं, लेकिन कोई तालमेल नहीं रहता है। हम स्टेट कैपिटल रीजन की परिकल्पना कर रहे हैं। दूसरी ओर कुछ कमियां हैं जिनको दूर करना चुनौती है। वेंडरों को उचित स्थान दिलाना, बढ़ती मलिन बस्तियां का भी समाधान ढूंढने की जरूरत है।


           उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में प्रदेश में पी0एम0 गतिशक्ति का उपयोग भावी कार्ययोजना तैयार करने में किया जा रहा है। प्रयास होना चाहिये कि न्यूनतम प्रयास से अधिक से अधिक लोगों तक लाभ पहुंचे। बेहतर प्लानिंग कर लोगों को बेहतर ट्रांसपोर्ट, जलापूर्ति, ड्रेनेज, साफ-सफाई आदि की सेवायें दे सकते हैं, इससे अवस्थापना सुविधाओं के विकास और उनके मेन्टीनेन्स पर होने वाले व्यय में कमी आयेगी।आज समय इनोवेशन का है। लोगों को स्किलअप करने की जरूरत है, ताकि वह अपनी क्षमता के अनुरूप उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकें। उन्होंने कहा कि हर रीजन की कुछ न कुछ विशेषतायें अवश्य होती है, इन्हें ध्यान में रखकर ही प्लान तैयार किया जाना चाहिये। प्लान के अन्तर्गत विकसित होने वाली अवस्थापना सुविधायें दीर्घकालिक होनी चाहिये। उन्होंने प्लान के साथ-साथ ऐसा प्रशासनिक ढांचे तैयार करने पर विशेष बल दिया, जिनके द्वारा प्लान के मुताबिक कार्य हो सके। कान्फ्रेन्स में उच्चाधिकार प्राप्त कमेटी (एचएलसी), भारत सरकार के चेयरमैन केशव वर्मा, अपर मुख्य सचिव आवास एवं शहरी नियोजन नितिन रमेश गोकर्ण, प्रमुख सचिव नियोजन आलोक कुमार, मण्डलायुक्त लखनऊ, मण्डलायुक्त अयोध्या सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण आदि उपस्थित थे। मुख्य सचिव ने UP रीजनल प्लानिंग कॉन्क्लेव-2023 को किया सम्बोधित