सेना में संविदा भर्ती देश की सुरक्षा व अस्मिता के लिए उचित नहीं-लौटनराम निषाद

अग्निवीर के रूप में संविदा पर सैनिकों की भर्ती युवाओं के साथ क्रूर मजाक।सेना में संविदा पर भर्ती देश की सुरक्षा व अस्मिता के लिए उचित नहीं।

अजय सिंह

लखनऊ।अगर किसी लड़की को शादी और तलाक के कागज़ पर एक साथ हस्ताक्षर करने करने को बाध्य किया जाय, तो उसका हौसला क्या रहेगा?ठीक इसी तरह की स्थिति संविदा पर सैनिकों की अग्निवीर के रूप में भर्ती की है।भारतीय ओबीसी महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौ.लौटनराम निषाद ने कहा कि संघीय इशारे पर अग्निवीरों की भर्ती का निर्णय युवाओं के साथ क्रूर मज़ाक है।कहा कि यह देश की सुरक्षा व अस्मिता के लिए उचित नहीं है।सरकार से निवेदन है कि वह सस्ती वाहवाही हेतु देश की सुरक्षा, सेना के सम्मान, और नौजवानों के भविष्य से इस प्रकार खिलवाड़ न करें।


निषाद ने कहा कि 4 साल बाद जिन 75% नौजवानों को आप फिर पैदल कर देंगे,वे समाज से ककिस प्रकार सामंजस्य स्थापित कर पाएंगे?सांसद, विधायक निर्वाचित हो सिर्फ शपथ ले ले तो वह आजीवन पेंशन,यात्रा सुबिधा,निःशुल्क चिकित्सा लाभ का पात्र हो जाता है और अग्निवीरों के भूतपूर्व सैनिक का सम्मान,सुबिधा नहीं देना युवाओं का अपमान है।उन्होंने कहा कि सांसदों,विद्यायकों को जो बंगले दिए जाते हैं वो सब हटाकर एक बड़ी सी बिल्डिंग बनानी चाहिए और उसमे एक एक 2/3 बीएचके फ्लैट सबको दे देना चाहिए।कहा कि फालतू के इतने पैसे खर्च होते हैं इनके आवासों के ऊपर।जनता के टैक्स के पैसे से ये सांसद, विधायक पूरा फॉर्म हाउस टाइप घर में रहते हैं और आजीवन पेंशन, स्वास्थ्य चिकित्सा, यात्रा सुविधा का लाभ लेते हैं।


निषाद ने कहा कि यह हमारे देश का दुर्भाग्य है कि ऐसी मक्कार सरकार देश में चल रही है जो कि पूरे भारतवर्ष को प्राइवेट बनाने में लगी है।और सरकार के रक्षा मंत्री प्रधानमंत्री की मुनीमी में लगे हैं । रक्षा मंत्री का चरित्र पुरानी फिल्मों के चरित्र अभिनेता कन्हैयालाल जैसा रह गया है। जो हर फिल्मों में सुखी लाला का ही किरदार निभाते रहे । जो की फिल्म के ठाकुर बने विलेन की चमचागिरी में ही मस्त रहता था।केंद्र की सरकार ने सेना का ठेकादारीकरण कर एक नया पद सृजित किया है जिसका नाम अग्निवीर है। साढ़े 17 साल में भर्ती होकर साढ़े 21 में रिटायर । उसके बाद सरकार कह रही जाओ सीधे आईएएस की तैयारी करो।17 से 22 वर्ष की उम्र ही तो उच्च शिक्षा ग्रहण करने व प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने की होती है।जो व्यक्ति सेना में 4 साल नौकरी करेगा उसके बाद किसी काम का नहीं रह जायेगा Iसेना से विदाई, यूपीएससी,पीसीएस, एसएससी, यूपीएसएसएससी आदि बस का काम नहीं । अब सिर्फ बची शिक्षक की नौकरी,उस पर भी खतरे के बादल मंडरा रहे हैं, तो जो कंपनी बाग के अमरुदहीया में 10 साल से पन्नी बिछा के टीजीटी,पीजीटी,यूपीटेट,सीटेट की तैयारी कर रहे हैं उनका सिलेक्शन होगा कि इन अग्नि वीरों का होगा ।


फौज फौजियों से ही बनती है ना कि सेनानायक से जब ऐसे ही अग्निवीर सेना में भर्ती होंगे तो युद्ध में ब्रिगेडियर और जनरल को अपने कंधों पर लगे क्रॉस शोल्डबैंटम और अशोक स्तम्भ फेंक कर लड़ाई लड़नी होगी।सरकार देश की सुरक्षा के साथ बहुत ही खतरनाक फैंसला लेकर खिलवाड़ व मजाक कर रही है ।निषाद ने कहा कि सेना का एक जवान 17 साल की नौकरी से रिटायर होता है,लांस नायक ,नायक 22 साल में और हवलदार 24 साल में, सूबेदार 28 साल में बनता है। इतने सालों में सेना में तमाम प्रकार के वेपंन्स ट्रेनिंग,फील्ड क्राफ्ट, ट्रैक्टिस,एंबुश के बारे में जानकारी दी जाती है । बिल्कुल परफेक्ट होने पर ही युद्ध में भेजा जाता है। अभी अग्निवीर 6 महीने की ट्रेनिंग लेकर सीमा पर जाएंगे Iआधे शहीद हो जाएंगे, जो बच जाएंगे भाग आएंगे और जो इन 4 सालों में परफेक्ट हो जाएगा वह सेना से निकाले जाने के बाद कहीं और नौकरी न मिलने पर चंबल और नक्सलबाड़ी का रुख करेंगे और मिर्जापुर और बंगाल में जाकर नक्सलाइट बन जाएंगे ।