Covid-19,घट रही रफ्तार,देश का 5वां प्लाज्मा सेंटर बना केजीएमयू लखनऊ

भारत में कोरोनावायरस के बढ़ते संकलन के बीच राहत की बात यह है कि कोरोना के मामलों में वृद्धि की रफ्तार गिरने के पीछे बढ़ते टेस्ट का भी बड़ा हाथ है. इस हफ्ते कोरोना के 52 लाख से अधिक टेस्ट हुए हैं जबकि पिछले हफ्ते कोरोना टेस्ट की संख्या 43 लाख के साथ के करीब थी.

कोरोनावायरस से मरने वाले लोगों के आंकड़े भी कुछ इसी तरह के हैं. इस हफ्ते देश में कोरोनावायरस से मरने वाले लोगों की संख्या 6555 रही. पिछले हफ्ते देश में कोरोना से 6279 लोग मरे थे. उसके पिछले हफ्ते देश में कोरोना से मरने वाले लोगों की संख्या 5345 थी.

भारत में कोरोना के नए मामले आने और उसकी वजह से मरने वाले लोगों की संख्या में वृद्धि लगातार जारी है. भारत में कोरोना वायरस के संक्रमण के बढ़ते खतरे के बीच राहत की बात यह है कि नए मामले और कोरोनावायरस से मरने वाले लोगों की वृद्धि दर में कमी आई है.

कोविड 19 के केस भारत में 4.3 लाख के करीब बढ़े हैं. यह वृद्धि दर 5.9% है. अगस्त के पहले हफ्ते में कोरोनावायरस की ग्रोथ रेट 10.9% फीसदी थी और भारत में कोरोना के 4.1 लाख मामले सामने आये थे. जुलाई के आखिरी हफ्ते में कोरोना मामलों की वृद्धि दर 16 फीसदी थी.

वायरस के पढ़ते संक्रमण के बीच इसकी रफ्तार गिरने को नंबर के माध्यम से भी समझा जा सकता है. इस हफ्ते भारत में कोरोनावायरस संक्रमण के नई केस पिछले हफ्ते की तुलना में सिर्फ 24000 ज्यादा बढ़े. पिछले हफ्ते कोरोनावायरस के नए केस आने की रफ्तार उससे पिछले हफ्ते की तुलना में 40,000 अधिक थी. अगर उससे भी पिछले हफ्ते की बात करें तो उस समय उससे पिछले हफ्ते की तुलना में 51,000 केस अधिक आए थे.कहना हालांकि अभी बहुत जल्दबाजी होगी कि कोरोनावायरस की रफ्तार धीमी पड़ने लगी है लेकिन अगर आने वाले हफ्तों में भी यही चालू रहा तो इस नतीजे पर मुहर लग सकती है.

उत्तर प्रदेश के पहले और देश के सबसे बड़े प्लाज्मा सेंटर में काम शुरू हो गया है. लखनऊ के केजीएमयू में इस सेंटर की शुरुआत की गई है. लखनऊ में कोरोना मरीजों के लिए बना यह सेंटर देश का पांचवा प्लाज्मा सेंटर है. इसके अलावा दिल्ली और चंडीगढ़ में दो-दो सेंटर पहले से काम कर रहे हैं. यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने इसका उद्घाटन किया है.कोरोना से ठीक हो चुके मरीज डिस्चार्ज होने के 14 दिन बाद प्लाज्मा दे सकते हैं. ऐसे मरीजों की उम्र 18 वर्ष से 65 वर्ष के बीच होनी चाहिए. 14 दिन बाद दोबारा प्लाज्मा दान किया जा सकता है. एक बार में 500 एमएल प्लाज्मा निकाला जाता है. कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों में आईजीजी एंटीबॉडी बन जाती है. ऐसे में प्लाज्मा में मौजूद एंटीबॉडी को गंभीर मरीजों में चढ़ाया जाता है. यह एंटीबॉडी कोरोना वायरस के खिलाफ काम करती है. गंभीर मरीजों की जिंदगी बचाने में मददगार बनती है. कोरोना के इलाज में प्लाज्मा थेरेपी के परिणाम अच्छे मिल रहे हैं.