दागदार को मिला गोपनीय विभाग का प्रभार

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दागदार को मिला गोपनीय विभाग का प्रभार
आर. के. यादव

दागदार को मिला गोपनीय विभाग का प्रभार। जेल मुख्यालय में अधिकारियों के बदले गए पटल। पांच प्रशासनिक अधिकारी किए गए इधर-उधर।

लखनऊ। पिछले लंबे समय से जेल मुख्यालय में एक ही पटल पर जमें एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी समेत पांच प्रशासनिक अधिकारियों का पटल परिवर्तन किया गया है। पटल परिवर्तन में एक दिलचस्त मामला सामने आया है। मुख्यालय में गबन के एक आरोपी अधिकारी को गोपनीय विभाग को प्रभार सौंपा गया है। इसके साथ ही दो अनुभवहीन महिलाओं को गोपनीय एवं उद्योग विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। यह मामला विभागीय अधिकारियों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसको लेकर तमाम तरह की चर्चाएं हो रही हैं। दागदार को मिला गोपनीय विभाग का प्रभार

मिली जानकारी के मुताबिक सोमवार की देर शाम जेल मुख्यालय में तैनात एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी समेत पांच प्रशासनिक अधिकारियों के पटल परिवर्तन किए गए।आधुनिकीकरण विभाग का काम संभाल रहीं वरिष्ठï प्रशासनिक अधिकारी सीमा त्रिपाठी को गोपनीय विभाग के साथ अधिष्ठïन एक, दो और तीन के अलावा विधि प्रकोष्ठï और प्रशासनिक सुधार अनुभाग भेजा गया है। इसके साथ ही गोपनीय विभाग में तैनात प्रशासनिक अधिकारी वीके सिंह को निर्माण अनुभाग का, पंकज कुमार पाठक को निर्माण अनुभाग से आधुनिकीकरण को, संजय कुमार श्रीवास्तव को अधिष्ठïन एक से गोपनीय विभाग भेजा गया है। इसके अलावा जनसूचना में तैनात अर्चना रानी को जनसूचना के साथ उद्योग विभाग का प्रभार सौंपा गया है।


कई पटल पर वर्षो से आज भी जमें कई अधिकारी
एक वरिष्ठï प्रशासनिक अधिकारी समेत पांच के पटल परिवर्तन कर दिए गए। इसके अलावा करीब आधा दर्जन से अधिक प्रशासनिक अधिकारी आज भी अपने पटल पर जमें हुए हैं। मिली जानकारी के मुताबिक डिप्टी जेलर संवर्ग के पटल पर अनिल कुमार वर्मा, विधि/ बजट विभाग में अमिताभ मुर्खजी, अधिष्ठïन तीन में राधे श्याम, आधुनिकीकरण में शांतनू वशिष्ठ और शिवांशू गुप्ता के अलावा एक बाबू ऐसा है जोकि पिछले करीब 30 साल से लखनऊ परिक्षेत्र कार्यालय में ही जमा हुआ है। इन अधिकारियों के पटल परिवर्तन नहीं किए गए हैं। इसके अलावा आगरा परिक्षेत्र कार्यालय में एक महिला बाबू पिछले करीब 18 साल से एक ही स्थान पर जमीं हुई हैं।

सूत्रों का कहना है कि लंबे अंतराल के बाद हुए पटल परिवर्तन में कई खामियां सामने आई है। इसमें विभाग की धनराशि में गबन के आरोपी प्रशासनिक अधिकारी संजय कुमार श्रीवास्तव को अधिष्ठïन एक से हटाकर महत्वपूर्ण गोपनीय विभाग में तैनात कर दिया गया है। इस मामले का खुलासा होने के बाद जब इस मामले में उनके निलंबन की कार्रवाई प्रारंभ हुई तो उन्होंने आनन-फानन में गोलमाल कर हड़पी गई धनराशि को वापस कर मामले को रफादफा करा दिया। यही नहीं आधुनिकीकरण से गोपनीय विभाग के तैनात की गई सीमा त्रिपाठी और जनसूचना के साथ उद्योग विभाग का प्रभार पाने वाली अर्चना रानी के पास कार्य के अनुभव की बहुत कमी है। विभागीय अधिकारियों में चर्चा है कि अनुभवहीन महिलाओं को महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारियां सौंपे जाने की कार्रवाई ने विभाग के आला-अफसरों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ेे कर दिए है। उधर डीआईजी जेल मुख्यालय एके सिंह ने पटल परिवर्तन किए जाने की तो पुष्टि की लेकिन इस मसले पर और कोई भी टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया। दागदार को मिला गोपनीय विभाग का प्रभार