कांग्रेस के नव संकल्प चिन्तन शिविर में बदलाव का निर्णय स्वागत योग्य-लौटनराम निषाद

कांग्रेस को सामाजिक न्याय आधारित मुद्दे पर आगे बढ़ने की समय की मांग।कांग्रेस के नव संकल्प चिन्तन शिविर में बदलाव का निर्णय स्वागत योग्य।

लखनऊ। भारतीय ओबीसी महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता व कांग्रेस नेता लौटनराम निषाद ने कांग्रेस नव संकल्प चिन्तन शिविर में बदलाव के निर्णय का स्वागत किया है।उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय आधारित मुद्दों पर कांग्रेस के आगे बढ़ने को समय की मांग है।1990 से पूर्व सवर्ण जातियों को कांग्रेस का बेस वोटबैंक माना जाता था,वही गैर यादव पिछड़ी, दलित व अल्पसंख्यक वर्ग मजबूती से कांग्रेस के साथ जुटा था।1984 से दलित वर्ग तो 1989 से पिछड़ी जातियाँ व अल्पसंख्यक वर्ग कांग्रेस से दूर होता गया।धीरे धीरे सवर्ण जातियाँ पूरी तरह भाजपा के साथ शिफ्ट हो गयी हैं।उन्होंने कहा कि कांग्रेस अतिपिछड़ी जातियों को कभी न तो तवज्जों दिया और इस वर्ग को गम्भीरता से लिया।उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश, बिहार में कांग्रेस को सपा व राजद से गठबंधन की पहल आगे आकर करनी पड़ेगी।भाजपा को केन्द्र की सत्ता से बेदखल करने के लिए उत्तर प्रदेश व बिहार में रोकना जरूरी है।बिना अतिपिछड़ों,वंचितों व अल्पसंख्यकों को जोड़े उत्तर भारत के इन दो राज्यों में कांग्रेस को मजबूत नहीं किया जा सकता।कांग्रेस को सामाजिक न्याय के मुद्दे पर मजबूती के साथ आक्रामक व मुखर होना पड़ेगा।


निषाद ने बताया कि उदयपुर में कांग्रेस के तीन दिवसीय नव संकल्प चिंतन शिविर के अंतिम दिन बूथ और ब्लॉक के बीच मंडल के रूप में नई इकाई गठित करने का निर्णय लिया गया।इसके अलावा सर्वे के लिए पार्टी के अंदर ही नया विभाग बनाये जाने,नेताओं-कार्यकर्ताओं के काम के आंकलन के लिए नई विंग गठित करने व पार्टी की हर स्तर पर गठित होने वाली कमेटी में 50 प्रतिशत युवा को शामिल करने का प्रस्ताव पारित किया गया।एससी,एसटी,ओबीसी, माइनॉरिटी के लिए रिजर्वेशन का प्रावधान करने का प्रस्ताव पारित करते हुए 50 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने का निर्णय लिया गया।महिलाओं के लिए रिजर्वेशन कोटा के अंदर 33% कोटा का प्रावधान का निर्णय हुआ।नव संकल्प शिविर में 2024 के लिए ब्लूप्रिंट तैयार हुआ है।कांग्रेस जातीय जनगणना, न्यूनतम समर्थन मूल्य की लीगल गारंटी जैसे मुद्दे को लेकर जनता के बीच जाने का निर्णय लिया है।पिछड़ी,दलित जातियों को निजी क्षेत्रों में आरक्षण देने की मांग का भी प्रस्ताव पारित किया गया।निषाद ने बताया कि 2009 के लोकसभा चुनाव में किसान व पिछड़ी जातियाँ कांग्रेस के साथ मुड़ी थीं।पर,कांग्रेस की दूसरी कतार के नेताओं ने इन्हें सहेज नहीं पाए बल्कि इन्हें दूरी बना लिये।उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व को जातिगत जनगणना, समानुपातिक आरक्षण व प्रतिनिधित्व, निजी क्षेत्रों में आरक्षण कोटा के मुद्दे पर मुखर होकर ईमानदारी से आगे बढ़ना होगा।उन्होंने कहा कि केंद्रीय संगठन(एआईसीसी),प्रांतीय कांग्रेस कमेटी(पीसीसी),डीसीसी आदि के साथ संसदीय बोर्ड में ओबीसी,एससी, एसटी व माइनॉरिटी को समुचित प्रतिनिधित्व देना होगा।