अतीक आतंक का अन्त..!

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अतीक-अशरफ हत्या की जांच करेंगे हाईकोर्ट के पूर्व न्यायमूर्ति
अतीक-अशरफ हत्या की जांच करेंगे हाईकोर्ट के पूर्व न्यायमूर्ति

अतीक अहमद (10 अगस्त 1962 से 15 अप्रैल 2023} एक भारतीय अपराधी एवं राजनेता थे। उनके खिलाफ 100 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे।​ वर्ष 2019 से 15 अप्रैल 2023 मृत्यु तक जेल में थे। गैंगस्टर अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ अहमद की प्रयागराज में मेडिकल के लिए ले जाते समय पुलिस हिरासत में गोली मारकर हत्या कर दी गई।अबतक अतीक की करीब 1630 करोड़ की संपत्तियां कुर्क हो चुकी है।कथित तौर पर अधिकारियों ने अतीक अहमद और उनके परिवार की 11,684 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है। प्रयागराज जिला प्रशासन ने कथित तौर पर अतीक अहमद और उसके सहयोगियों के जबरन कब्जे वाली 751 करोड़ रुपये की संपत्ति छुड़ाई। अतीक अहमद और उसके साथियों के कब्जे वाली 417 करोड़ रुपये की जमीन भी छुड़ाई गई है।​ अतीक आतंक का अन्त

माफिया से नेता बने अतीक के नाम पर 1985 से अबतक 100 से अधिक मामले दर्ज हैं।​ जबकि 50 मामलों में वह विचाराधीन रहा हैं।​ 12 अन्य मामलों में वह बरी हो चुका था।​ जबकि दो मामले साल 2004 में तत्कालीन सरकार ने वापस ले लिए थे।​ पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक अतीक के छोटे भाई खालिद अजीम उर्फ अशरफ के खिलाफ 53 से ज्यादा आपराधिक मामले लंबित हैं।​ जिनमें से एक में उसे बरी कर दिया गया था।​ जबकि अन्य पर विचार चल रहा है।​ कुल मिलाकर अतीक एंड फैमिली के खिलाफ 165 से अधिक केस चल रहे हैं।​
उत्तर प्रदेश का बाहुबली माफिया डॉन अतीक अहमद गुजरात की साबरमती जेल में बंद था।​ उस पर 2004 में तत्कालीन बसपा विधायक राजू पाल की हत्या का आरोप था।​ साथ ही राजू पाल हत्याकांड के गवाह उमेश पाल का अपहरण कराने और फिर इसी साल उसकी हत्या कराने के मामले में भी माफिया अतीक और उसके परिवार के सदस्यों पर एफआईआर दर्ज है।​ 24 फरवरी 2023 को अतीक के इशारे पर ही उमेश पाल को प्रयागराज में दिनदहाड़े उमेश पाल को गोलियों से भून दिया गया था. हमले में उमेश पाल और उसके दोनों गनर मारे गए।​ अतीक पर इस तरह के संगीन जुर्म का ये इल्जाम पहला नहीं है, इससे पहले भी कई मामलों में उसके नाम का जिक्र होता रहा है।​

आतंक के अतीक अहमद पर 100 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें हत्या,हत्या की कोशिश, किडनैपिंग, रंगदारी जैसे केस हैं। उसके ऊपर 1989 में चांद बाबा की हत्या, 2002 में नस्सन की हत्या, 2004 में मुरली मनोहर जोशी के करीबी भाजपा नेता अशरफ की हत्या, 2005 में राजू पाल की हत्या का आरोप है।वर्ष 2007 तक अतीक आजाद था। उत्तर प्रदेश में जब से योगी सरकार आयी उसके बाद से उसका बुरा वक्त शुरू हो गया था। वर्ष 2007 में मायावती सत्ता में आयी तो उन्होंने ऑपरेशन अतीक शुरू किया। 20 हजार का इनाम रखकर अतीक को मोस्ट वांटेड घोषित किया गया।

हिस्ट्रीशीटर अतीक का इतिहास- प्रयागराज और शहर के बाहरी इलाके में अतीक के नाम एक खौफ था। अतीक अपने विरोधियों को झूठे मामलों में फंसाने और अपने पक्ष में बयान देने के लिए मजबूर करने के लिए जाना जाता था। गवाहों को रिश्वत देने से लेकर उन्हें धमकाने तक अतीक की कई करतूतें जानी जाती थी। वह हमेशा कानून से बचता रहा है। शहर के खुल्दाबाद थाने के रिकॉर्ड में अतीक हिस्ट्रीशीटर नंबर 39ए था। जिसके खिलाफ हत्या,हत्या के प्रयास,अपहरण और जबरन वसूली सहित लगभग 100 मामले दर्जथे। रिकॉर्ड में यह भी कहा गया है कि अतीक प्रयागराज में 144 सदस्यों वाला गिरोह चलाता था। अतीक आतंक का अन्त..!

अतीक आतंक का अन्त..!

2017 से जेल में था अतीक अहमद।2012 का विधानसभा चुनाव भी अतीक ने चुनाव लड़ा लेकिन हार गया। उसे राजू पाल की पत्नी पूजा पाल ने हरा दिया था। 2014 के लोकसभा चुनाव में भी उसने समाजवादी पार्टी के टिकट पर श्रावस्ती सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन भाजपा के दद्दन मिश्रा से हार गया। दिसंबर 2016 में मुलायम सिंह ने 2017 विधानसभा चुनाव के लिए अतीक को कानपुर कैंट से टिकट दिया। योगी सरकार बनने के बाद से मुश्किलों में था आतंक का अतीक। साल 2017 में यूपी के नए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बने। फूलपुर सीट से सांसद रहे केशव प्रसाद मौर्य उपमुख्यमंत्री बनें। उन्हें फूलपुर की सीट छोड़नी पड़ी। सीट पर उपचुनाव की घोषणा हुई। जेल में बैठे अतीक अहमद ने निर्दलीय चुनाव का फॉर्म भर दिया। हालांकि फिर से हार मिली। इसके बाद 2019 के आम चुनाव में जेल से ही वाराणसी सीट पर मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ा। इस बार फिर जमानत जब्त हो गई।

14 दिसंबर को अतीक और उसके 60 समर्थकों पर इलाहाबाद के शियाट्स कॉलेज में तोड़फोड़ और मारपीट का आरोप लगा। अतीक एक निलंबित छात्र की पैरवी करने कॉलेज गया था। उसने कॉलेज के अधिकारियों को भी धमकाया। वीडियो वायरल हो गया। ये मामला चल ही रहा था कि 22 दिसंबर को अतीक 500 गाड़ियों के काफिले के साथ कानपुर पहुंचा। उस वक्त अतीक का ये काफिला सुर्खियां बना था। इसी बीच पार्टी का अध्यक्ष अखिलेश यादव बने। अतीक को पार्टी से बाहर निकाल दिया। शियाट्स कॉलेज मामले में हाईकोर्ट ने अतीक को गिरफ्तार करने के आदेश दे दिए। फरवरी 2017 में अतीक को गिरफ्तार कर लिया गया। हाईकोर्ट ने सारे मामलों में उसकी जमानत कैंसिल कर दी। इसके बाद से अब तक अतीक जेल में ही था। उमेश पाल हत्याकांड के बाद अतीक को चार दिनों की पुलिस रिमांड पर प्रयागराज लाया गया था। योगी के मुख्यमंत्री बनते ही अतीक के खिलाफ कई मामलों की जांच शुरू हो गई। इसके बाद से लेकर अब तक अतीक की 1600 करोड़ रुपए से ज्यादा की गैर कानूनी संपत्तियों पर बुलडोजर चल चुका है। अतीक का भाई अशरफ भी मरियाडीह डबल मर्डर मामले में जेल में बंद था। अतीक के चार बेटे हैं। दो नाबालिग हैं। दोनों बाल सुधार गृह में बंद हैं। उमेश पाल हत्याकांड के आरोपी असद 14 अप्रैल को पुलिस एनकाउंटर में मार गिराया। एक अन्य जेल में बंद है।

प्रयागराज में अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ पर पुलिस हिरासत में ताबड़तोड़ फायरिंग की गई। घटना में दोनों की मौके पर मौत हो गई। ये घटना कॉल्विन अस्पताल के पास हुई थी। पुलिस टीम अतीक और अहमद को लेकर मेडिकल जांच के लिए लेकर जा रही थी। इसी दौरान तीन हमलावर अचानक बीच में पहुंचे और गोली चला दी। पुलिस ने हमलावरों को मौके से दबोच लिया। माफिया से कुख्यात नेता बने अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ को प्रयागराज में काल्विन अस्पताल के पास तीन लोगों ने ताबड़तोड़ गोली मारकर हत्या कर दी। इस वारदात के बाद पूरे उत्तर प्रदेश में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। ये हमला उस वक्त हुआ जब दोनों को मेडिकल से ले जाया जा रहा था। अब पूरे मामले की पुलिस गंभीरता से जांच कर रही है।

अतीक़ पर 101 तो अशरफ़ पर 57 मुक़दमे थे दर्ज- अतीक और अशरफ का आपराधिक इतिहास बेहद क्रूर रहा है। अतीक के खिलाफ वर्ष 1979 से अब तक 101 मुकदमा दर्ज हुए जबकि अशरफ के खिलाफ 57 मुकदमे दर्ज थे। यही वजह है कि इनसे पीड़ितों और दुश्मनों की संख्या काफी थी।इसका अंदाजा आप इससे लगा सकते हैं कि 2005 में राजू पाल की हत्या के बाद पुलिस जब राजू पाल की बॉडी को लेकर जा रही थी तो उसने 56 किलोमीटर तक उसका पीछा किया था और मेडिकल कॉलेज में भी डेड बॉडी पर गोलियां चलाई थी। साल 1979 में 17 साल की उम्र में अतीक अहमद पर कत्ल का पहला मुकदमा दर्ज हुआ था। इसके बाद तो उसने इतनी तेजी से अपराध की दुनिया में कदम बढ़ाए कि 1985 आते-आते वो प्रयागराज ही नहीं आसपास के जिलों में भी पैर पसारने लगा था।वैसे ही 1989 में चांद बाबा को मार डाला था।2007 में जब मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री थे तब अतीक के भाई अशरफ ने मदरसे से 2 लड़कियों को उठा लिया था और रेप किया था। बाद में मदरसे में छोड़ गया था।

आतंक के अतीक की करतूतें पूरे उत्तर प्रदेश में कुछ इस तरह कुख्यात रहीं है कि उसके दुश्मनों की कोई कमी नहीं। यूपी के मुख्यमंत्री योगी ने कहा था कि – ‘माफियों को मिट्टी में मिला देंगे।’ प्रदेश में माफिया पर एक्शन के सिलसिले में योगी सरकार और पुलिस ने पिछले छह सालों में अतीक के गिरोह के कई सदस्यों को गिरफ्तार किया। लेकिन उमेश पाल हत्याकांड और उससे पहले राजू पाल हत्याकांड के बाद अतीक की जैसे उल्टी गिनती शुरू हो गई।

15 अप्रैल 2023 को अतीक अहमद को प्रयागराज में अदालत द्वारा अनिवार्य चिकित्सा जांच के लिए ले जाने के दौरान,अहमद से उनके बेटे के अंतिम संस्कार के दौरान उनकी अनुपस्थिति के बारे में पूछा गया, जिसका उन्होंने हिंदी में जवाब दिया,”नहीं ले गए तो नहीं गए। मुझे नहीं लिया गया था, इसलिए मैं नहीं गया।” जैसे ही उनके भाई अशरफ अपने जवाब में गुड्डू मुस्लिम का जिक्र करने वाले थे,अहमद के सिर पर पिस्तौल से गोली मार दी गई, जिससे उनकी मौत हो गई। गोली बारी में अतीक और अशरफ अहमद दोनों मारे गए,जिसे पकड़ लिया गया और टेलीविजन पर इसका सीधा प्रसारण किया गया। बाद में पता चला कि अपराधियों ने मीडिया कर्मियों के रूप में पेश किया था और हत्या करने के बाद भागने का प्रयास नहीं किया था। गौरतलब है कि गोलीबारी के वक्त अतीक अहमद पुलिस कर्मियों से घिरा हुआ था।मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक तीनों शूटरों की पहचान कर ली गई है। शूटरों को गिरफ्तार कर लिया गया है और आगे की पूछताछ की जाएगी। अतीक आतंक का अन्त..!

उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश में अपराधियों की लिस्ट में टॉप पर रहने वाले माफिया अतीक अहमद का बुरा अंत हुआ। निर्दोष और कमजोर की आवाज दबाने वाले अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ अहमद के पापों का घड़ा भर चुका था। दोनों भाइयों को अंत समय में सिर्फ बंदूक की गोली नसीब हुई। किसने मारा.. क्यों मारा।।।? योगी आदित्यनाथ सरकार में गैंगस्टरों के खिलाफ लगातार चलाए जा रहे अभियान में गैंगस्टर एक्ट के तहत अतीक और उसके परिवार के सदस्यों की करोड़ों रुपये से अधिक की संपत्ति कुर्क की गई। कभी प्रयागराज, कौशांबी,नोएडा,लखनऊ और देश के अन्य हिस्सों में अचल संपत्ति के सौदे पर पूर्ण नियंत्रण रखने वाले अतीक और उसके भाई का अंत हो चुका है। उसका परिवार अब हाशिये पर है और मिट्टी में मिलता नज़र आ रहा है।

आतंक के अतीक की क्राइम फाइल– आतंक के अतीक की शुरुआत कसारी मसरी गांव से अपराध और फिर राजनीति की दुनिया तक हुई। उसके पिता हाजी फिरोज अहमद प्रयागराज में तांगा चलाते थे। जबकि अतीक अपने पैतृक कसारी मसरी गांव में स्कूल जाता था। परिवार बाद में शहर के चकिया चला गया। दसवीं कक्षा पूरी करने से पहले ही अतीक ने स्कूल छोड़ दिया था। अतीक ने चकिया में पहला अपराध किया और अपना गिरोह बना लिया। जिसमें ज्यादातर गांव के लुटेरे होते थे। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक अतीक के खिलाफ पहला हत्या का मामला 1979 में प्रयागराज के खुल्दाबाद पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था। बाद में वह जबरन वसूली और जमीन हड़पने सहित अन्य अपराधों में शामिल हो गया।

प्रयागराज से प्रदेश के कई शहरों में जिस आतंक और दहशत को कायम करने में माफिया अतीक अहमद ने 44 साल लगाए उसे यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने महज 50 दिनों में खत्म कर दिया। अतीक और उसके करीबियों के काले कारोबार के साम्राज्य को ध्वस्त करने में अब योगी सरकार को प्रवर्तन निदेशालय का भी साथ मिल रहा है। 24 फरवरी को हुये उमेश पाल हत्याकांड के करीब 50 दिन बाद यानी 15 अप्रैल की रात अतीक और उसके भाई अशरफ की हत्या कर दी गई। इन्हीं 50 दिनों में अतीक के बेटे असद की मौत भी पुलिस एनकांउटर में हुई है। प्रयागराज में अतीक के आर्थिक साम्राज्य पर ईडी का बड़ा वार। 44 साल से आतंक का पर्याय बने अतीक का अंत 50 दिनों में हो गया। अतीक डमी कंपनियों के जरिये करता था अरबों का काला कारोबार। 50 दिन में हुआ 44 साल के आतंक का अंत। अतीक आतंक का अन्त..!

अतीक अहमद पर पहला आपराधिक मामला 1979 में प्रयागराज के खुल्दाबाद पुलिस स्टेशन में दर्ज हुआ था। तब से 44 साल के उसके आपराधिक सफर में उस पर लगभग 100 से अधिक केस दर्ज हुए लेकिन किसी भी मामले में कोई सजा नहीं हुई। योगीराज में पहली बार यह संभव हुआ जब पूर्व बसपा विधायक राजू पाल हत्याकांड के गवाह अधिवक्ता उमेश पाल के अपहरण के मामले में एमपीएमएलए की कोर्ट ने अतीक को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।इधर 24 फरवरी 2023 को उमेश पाल की हत्या से कानून व्यवस्था को नाकाम चुनौती देने के अतीक और उसके गुर्गों के दुस्साहस के बाद यूपी के मुख्यमंत्री योगी के माफिया को मिट्टी में मिलाने के संकल्प ने अतीक के जुर्म और जरायम के साम्राज्य तहस नहस कर दिया गया। अतीक के बेटे असद सहित उसके 4 गुर्गों को पुलिस ने एनकाउंटर में ढेर कर दिया। अपराध से अर्जित की गई उसकी और उसके गुर्गों की 1400 करोड़ की सम्पत्ति जब्त की जा चुकी। इसे अतीक के आतंक के अंत माना जा रहा है।एक तरफ माफिया को मिट्टी में मिलाने का सिलसिला जारी है। तो दूसरी तरफ आर्थिक अपराध से जुड़ी जांच एजेंसियां भी अतीक के आर्थिक साम्राज्य को चोट पहुँचाने में लग गई हैं। अतीक अहमद पर दर्ज मनी लांड्रिंग केस की जांच में जुटी प्रवर्तन निदेशालय की 15 टीमों ने प्रयागराज में अतीक के करीबियों के कई ठिकानों पर जमकर छापेमारी की है। अतीक पर कार्यवाही में 100 करोड़ से अधिक की बेनामी संपत्तियों का भी खुलासा हुआ है। वैसे अतीक पर दो साल पहले 2021 में प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया था और इस मामले में उसकी 8 करोड़ की संपत्ति जब्त की गई थी।अतीक आतंक का अन्त