पर्यावरण और मनुष्य एक दुसरे पर निर्भर

पर्यावरण के बारे में कहा गया है की मनुष्य और पर्यावरण एक दुसरे पर निर्भर है। जब भी जलवायु में थोडा भी कोई परिवर्तन होता है तो हमारे जन जीवन पर बहुत प्रभाव पड़ता है।विश्व पर्यावरण दिवस दुनियाभर में पर्यावरण की सुरक्षा और उसके सरक्षण के लिए मनाया जाने वाला दिवस है।विश्व पर्यावरण दिवस एक ऐसा दिन है जब पर्यावरण के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इसकी रक्षा करने का संकल्प लिया जाता है और साथ ही लोगों को भी इसके महत्व के बारे में जागरूक किया जाता है। दिन-प्रतिदिन दुनिया में बढ़ता वायु प्रदुषण, ग्लोबल वार्मिंग और मौसम में परिवर्तन आना एक गंभीर समस्या का विषय बनता जा रहा है। इसलिए यह जरूरी है कि हम अपने पर्यावरण की देखभाल करना सीखें और दूसरों को भी ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित करें।

विश्व पर्यावरण दिवस प्रति वर्ष 5 जून को मनाया जाता है। विश्व पर्यावरण दिवस वर्ष 1972 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा स्थापित किया गया था। पहली बार वर्ष 1973 में पृथ्वी पर वातावरण को प्रदूषित होने से बचाने के लिए सकारात्मक कदम उठाने एवं इस दिशा में दुनिया भर के लोगों को प्रेरित करने के उद्देश्य से विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया था। कई वर्षों से लगातार चल रहे वन्यजीवों के अवैध व्यापार की वजह से हमारी कीमती जैव विविधता नष्ट हो रही है और जंगली जानवरों जैसे हाथी, बाघ, राइनो, गोरिल्ला, समुद्री कछुए, आदि महत्वपूर्ण प्रजातियों के अस्तित्व समाप्त होने के कगार पर पहुंच गए है। विश्व पर्यावरण दिवस 2016 का नारा था “जीवन के लिए जंगली बनो” ताकि वन्यजीवों के प्रति अपराध में शामिल लोगों को सुधार सकें और उनके द्वारा किए गए नुकसान की भरपाई कर सकें। पृथ्वी पर एक बेहतर भविष्य पाने के लिए इस बड़ी समस्या को हल करना आवश्यक है और यह एक बड़ी चुनौती के रूप में हमारे सामने है।

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर गोरखनाथ मंदिर स्थित गौशाला में मुख्यमंत्री ने वृक्षारोपण किया।

विश्व पर्यावरण दिवस हमारे जीवन में बहुत ही महत्वपूर्ण है। इस दिन हम पर्यावरण से संबंधित मुद्दों पर जानकारी अर्जित करते हैं एवं हमारे बेहतर भविष्य के लिए पर्यावरण को सुरक्षित रखने की प्रतिज्ञा लेते हैं। हमें जीवन भर हमारे पर्यावरण का ख्याल रखना चाहिए। यह तभी संभव है जब हम अपनी आँखें खुली रखें और अपने भीतर एवं वातावरण में कुछ सकारात्मक बदलाव लाएं। हमें अपने बच्चों को भी इस समस्या प्रति जागरूक करना चाहिए ताकि वे भी पर्यावरण सुरक्षा के अभियान के प्रति जागरूक हो सकें तथा भविष्य में इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभाएं।वर्ष 1972 में घोषित होने के बाद यह 1973 से प्रतिवर्ष 5 जून को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा पर्यावरण में गिरावट के हालत के बारे में जानकारी देने एवं स्वच्छ पर्यावरण का महत्व लोगों को समझाने एवं इस बारे में वैश्विक जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से मनाया जाने लगा। इस उत्सव की शुरूआत संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा आयोजित विश्व पर्यावरण सम्मेलन के उद्घाटन के दौरान पर्यावरण के महत्व के बारे में लोगों को बताने और पर्यावरण की रक्षा करने के उद्देश्य से प्रभावी योजनाओं को लागू करने के उद्देश्य से की गई थी। इस वार्षिक उत्सव को संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित एक थीम (विषय) के अनुसार मनाया जाता है। इस उत्सव के दौरान पर्यावरण को बचाने के लिए प्रति वर्ष संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा प्रदत्त विषय के अनुसार कुछ नई एवं प्रभावी योजनाओं को लागू करने पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।

जीवन के श्रृंगार पेड़ हैं जीवन के आधार पेड़ हैं।
ठिगने – लम्बे, मोटे – पतले भांत – भंतीले डार पेड़ हैं।
आसमान में बादल लाते बरखा के हथियार पेड़ हैं।
बीमारों को दवा ये देते प्राण वायु औजार पेड़ हैं।
रबड़, कागज, लकड़ी देते पक्षियों के घरबार पेड़ हैं।
शीतल छाया फल देते हैं कितने ये दातार पेड़ हैं।
खुद को समर्पित करने वाले ईश्वर के अवतार पेड़ हैं।

विश्व पर्यावरण दिवस उत्सव के रूप में दुनिया भर में 100 से अधिक देशों में मनाया जाता है क्योंकि पर्यावरण की समस्या कोई भी देश अकेले हल नहीं कर सकता। इसका वार्षिक आयोजन हर वर्ष संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूनाईटेड नेशन्स एनवायरमेंट प्रोग्राम) द्वारा संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा घोषित अलग-अलग मेजबान शहरों द्वारा किया जाता है। पहली बार इसका आयोजन 1973 में “केवल एक पृथ्वी” थीम (विषय) के साथ किया गया था। वर्ष 2016 में इस आयोजन का मेजबान अंगोला शहर था।

विश्व पर्यावरण दिवस, पर्यावरण से जुड़े मद्दों पर विचार करने एवं पर्यावरण जुड़ी समस्याओं का हल निकालने के लिए विशेष रूप से मनाया जाता है। इसे पर्यावरण दिवस, ईको डे या डब्ल्यूईडी के तौर पर भी जाना जाता है। यह एक महान वार्षिक आयोजन है जिसके दौरान हम पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर अपना ध्यान केंद्रित करते हैं और उन्हें पूरी तरह से हल करने की कोशिश करते हैं। यह अवसर वातावरण में सकारात्मक परिवर्तन लाने के उद्देश्य से बहुत सारे रचनात्मक गतिविधियों के साथ दुनिया भर में मनाया जाता है। विश्व पर्यावरण दिवस को मनाने के पीछे हमारा यही उद्देश्य होता है कि हम पृथ्वी पर प्राकृतिक पर्यावरण की हर संभव रक्षा करें ताकि स्वस्थ जीवन की संभावना पृथ्वी पर हमेशा बनी रहे।

तो कहने लगा मानव कर रहा मात्र स्वयं का विकास है,
पर्यावरण को स्वच्छ बनाना, उसका दिखावा मात्र है।
फिर भी तुझे नहीं जो रहा, मेरी पीड़ा का आभास है।
क्यों करते इस धरती को तुम गन्दा।
मेरे शुद्ध होने पर ही, तुम्हारे हृदय मे बची साँस है।
यदि सच मे चाहते हो, इस पावन धरती पर तुम जीना।
तो करना पड़ेगा पहले तुम्हे, शुद्ध पर्यावरण का विकास है।
वर्ना मेरे अभाव मे तुम्हारा वास, बन जायेगा यमराज का वास है।

विश्व पर्यावरण दिवस पर्यावरण के संरक्षण और उसे बढ़ावा देने के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। यह वह दिन है जब पर्यावरणविद (एनवायरमेंटलिस्ट) और संरक्षणवादी (कंजर्वेशनिस्ट) इस बारे में जागरूकता फैलाते हैं कि कैसे कुछ योगदानों ने पर्यावरण में कितना ज्यादा फर्क पहुंचाया है और कई लोगों को इसके लिए कितना ज्यादा प्रोत्साहित किया है। विश्व पर्यावरण दिवस यूनाइटेड नेशन (संयुक्त राष्ट्रसंघ) एनवायर्नमेंटल प्रोग्राम (यूएनईपी) का एक हिस्सा है जिसका मिशन व्यवसायों, सरकारों, मशहूर सेलिब्रिटीज और नागरिकों को पर्यावरण से जुड़े मुद्दों में योगदान करने के लिए समान रूप से शामिल करना है।

विश्व पर्यावरण दिवस कार्यक्रमों के जरिए पर्यावरण को बेहतर बनाने वाली ग्लोबल कम्युनिटी का गठन करके पूरी तरह से परिवर्तन लाना संभव हो सकता है। इसमें सभी को नेचुरल रिसोर्सेज के इस्तेमाल को कम करने के नए तरीकों के बारे में सोचने, ग्रीन मॉडल विकसित करने, टिकाऊ बनने, जंगलों की रक्षा करने, बच्चों को प्रकृति के साथ अच्छे से रहने के लिए शिक्षित और प्रेरित करने और ग्रीन फ्यूचर के लिए अच्छे प्रोटेक्टर बनने के लिए प्रोत्साहित करता है।

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