जीवन बचाना है तो पर्यावरण बचाना होगा

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जीवन बचाना है तो पर्यावरण बचाना होगा
जीवन बचाना है तो पर्यावरण बचाना होगा

डॉ. प्रतिभा सिंह

पर्यावरण बचाना है तो इसके संतुलन को बिगड़ने से रोकना होगा और वह तभी हो सकता है जब मानव जाति, जीव जंतु, पशु पक्षी, सब प्रकृति के सानिध्य में रहते हुए प्रकृति के संरक्षण हेतु प्रयासरत रहे। शीतल प्रथम आहार सोसाइटी की ओर से आप सभी को विश्व पर्यावरण दिवस 2024 की ढेर सारी शुभकामनाएं। पर्यावरण दिवस कोई एक दिन के लिए नहीं होता बल्कि यह तो पूरे जीवन काल के लिए है। जीवन बचाना है तो पर्यावरण बचाना होगा जीवन बचाना है तो पर्यावरण बचाना होगा

शीतल प्रथम आहार सोसायटी ने पर्यावरण दिवस मनाने हेतु पूरे एक सप्ताह का प्रोग्राम रखा जिसमें भिन्न-भिन्न दिनों में विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम रखे गए। पर्यावरण के लिए जन जागरूकता अभियान के तहत कई सारे ग्रुप बनाकर के बच्चों युवाओं बुजुर्गों नारी शक्ति सबको एक साथ एक प्लेटफार्म पर लाते हुए जनमानस को अवेयर करने के लिए जगह-जगह कैंपेन किए गए ताकि हम सभी को पर्यावरण के विषय में पूरी जानकारी मिल सके इसके महत्व को हम सभी आसानी से समझ सके और इसके प्रति अपने कर्तव्यों को समझते हुए उसका निस्तारण भी कर सकें। बच्चों और बड़ों के लिए कचरा प्रबंधन के लिए स्पेशल डेमोंसट्रेशन क्लासेस भी करवाई गई और जो लोग इक्षुक थे उनको सम्मिलित भी किया गया। Collection से लेकर segregation और फिर disposal किस प्रकार किया जाए इस पर भी सेशन कराए गए।

पर्यावरण में ही मानव जीवन समाया हुआ है। यदि पर्यावरण नहीं होगा, तो मानव जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। पर्यावरण दूषित व विषैला होगा तो मानव स्वार्थों को साधने के लिए प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन के कारण पर्यावरण विषैला हो गया। भारत का कुल क्षेत्रफल 32 लाख 87 हजार 263 वर्ग किलोमीटर है, जो कि संपूर्ण विश्व के क्षेत्रफल का 2.4 प्रतिशत है, जबकि जनसंख्या में 17.5 प्रतिशत प्रतिनिधित्व भारत का है। भारत के क्षेत्रफल के लगभग 51 प्रतिशत भाग पर कृषि, चार प्रतिशत भाग पर चरागाह, लगभग 21 प्रतिशत भूमि, पर वन एवं 24 प्रतिशत भूमि बंजर तथा बिना उपयोग की है। धरती के लगातार गर्म होने का मुख्य कारण कार्बनडाइआक्साइड गैस का बढ़ना है, जबकि कार्बन डाइऑक्साइड के बढ़ने का कारण कृषि में अंधाधुंध फार्टिलाइजरों का इस्तेमाल, पेड़ों का कटान, कोयले का इस्तेमाल, परिवहन धुंआं, जीवाशियम ईंधनों का प्रयोग शामिल है। इससे ओजोन क्षरण, मौसम में बदलाव, समुद्र जल स्तर बढ़ना, बाढ़, तूफान, महामारी, खाद्य पदार्थों की भारी कमी हो रही है, जो धरती पर मानव जीवन की संभावनाओं को कम कर रहे हैं।

पृथ्वी पर उपलब्ध जल एवं शुद्ध वायु हमारे जीवन के आधार हैं।  मानव जीवन में वायु का स्थान जल से भी अधिक महत्वपूर्ण है। हमारे  वेद में कहा गया है कि वायु अमृत है, वायु प्राणरूप में स्थित है। भोजन के बिना आदमी कुछ दिन तक जिंदा रह सकता है। पानी के बिना कुछ घंटे जिंदा रह सकता है। परंतु, हवा के बिना वह एक पल भी जिंदा नहीं रह सकता है। वायु प्रदूषण अर्थात हवा में ऐसे अवांछित गैसों, धूल के कणों आदि की उपस्थिति, जो लोगों तथा प्रकृति दोनों के लिए खतरे का कारण बन जाए। मानव प्रकृति का अभिन्न अंग है।

पर्यावरण है, तो जीवन है। हरे-भरे पेड़ लगाएं और इस धरती को स्वर्ग बनाएं।

जब तक मनुष्य के अंतर्भाव से पर्यावरण सचेतना नहीं आएगी, तब तक शायद नारों, निबंधों व बड़े-बड़े सरकारी इश्तहारों में ही पर्यावरण संरक्षण सिमटा रहेगा। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के अमर वाकय को चरितार्थ करने हेतु कि धरती पर मानव की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए तो सब कुछ है, लेकिन लालच को पूरा करने के लिए प्राकृतिक संसाधन शायद कम पड़ जाएंगे। नीति निर्धारण करना समय की मांग बन गया है। पर्यावरण को बचाने के लिए केवल सरकारों की जिम्मेदारी ही नहीं है, बल्कि हर किसी को इसमें अपनी भूमिका निभानी है। पहले मनुष्य की आयु हजारों वर्ष होती थी, उसकी वजह थी स्वच्छ पर्यावरण। आज मनुष्य की आयु छोटी होती जा रही है, उसका कारण भी यह अस्वच्छपर्यावरण ही है। जीना है, तो पर्यावरण को स्वच्छ रखना ही होगा।

पौधारोपण अभियान के तहत प्रभात फेरी भी की गई। बच्चे, बड़े, बुजुर्ग, महिलाएं और पुरुष सब लोग की सहभागिता रही इसमें कई जगह पर पौधारोपण किए गए और साथ ही साथ यह शपथ भी लिया गया कि जो भी पौधे लगाए गए हैं पौधारोपण के साथ-साथ हम इनकी रक्षा करते हुए रक्षा रोपण भी करेंगे। बच्चों ने सुंदर सुंदर पोस्टर और पेंटिंग्स बनाए जिसके लिए उन्हें उपहार देते हुए सम्मानित किया गया। ये संपूर्ण कार्यक्रम SPAS General Secretary Dr. Pratibha Singh जी के मार्गदर्शन मे संपन्न हुआ। हम सभी को एक संकल्प जरूर करना चाहिए की “खुद को अगर बचाना है तो पर्यावरण संरक्षण करना है”। जी वन बचाना है तो पर्यावरण बचाना होगा