राजस्थान में त्राहि त्राहि विधायक आलीशान होटलों में कैद

प्रदेश में जब कानून व्यवस्था और पेयजल की समस्या को लेकर त्राहि त्राहि मची हुई है तब प्रदेश के सभी 200 विधायक आलीशान पांच सितारा होटलों में कैद है।यह राजस्थान के चार करोड़ मतदाताओं का अपमान है। क्या हमारे संविधान निर्माताओं ने ऐसे ही लोकतंत्र की कल्पना की थी…?

10 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव के मद्देनजर राजस्थान के पक्ष विपक्ष के सभी 200 विधायकों को जयपुर और उदयपुर की पांच सितारा होटल में कैद हैं। इनमें मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और विधानसभा में भाजपा विधायक दल के नेता गुलाबचंद कटारिया भी शामिल हैं। कांग्रेस को अपने तीनों उम्मीदवार जीताने हैं, इसलिए 120 से भी ज्यादा विधायकों को उदयपुर की होटल में कैद कर रखा है। इसी प्रकार भाजपा को अपना अधिकृत और एक समर्पित उम्मीदवार जीताना है, इसलिए जयपुर की होटल में सभी 71 विधायकों को संभाल कर रखा हुआ है। दोनों ह प्रमुख पार्टियों ने विधायकों को तब कैद किया है, जब प्रदेश में कानून व्यवस्था और पेयजल को लेकर त्राहि त्राहि मची हुई है। राजधानी जयपुर में सैकड़ों छात्राएं तपती सड़क पर धरना देकर छेड़छाड़ की घटनाओं का विरोध कर रही हैं तो प्रदेश के अधिकांश विधानसभा क्षेत्रों में एक एक बूंद पानी के लिए संघर्ष हो रहा है। सवाल उठता है कि क्या मतदाताओं की समस्याओं के समाधान की विधायकों की कोई जिम्मेदारी नहीं है?

प्रदेश के 200 विधायकों के कैद होने का मतलब है राजस्थान के चार करोड़ मतदाताओं का अपमान। जब राजधानी जयपुर में सरेआम छात्राओं के साथ छेड़छाड़, बदसलूकी और चार पांच दिन में एक बार पेयजल की सप्लाई हो रही हो, तब हमारे विधायक पांच सितारा होटलों में आराम कर रहे हैं। सवाल उठता है कि त्रस्त जनता के सामने विधायकों के हलक से स्वादिष्ट व्यंजन कैसे उतर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र के मतदाता 200 फीट गहरे गड्ढे में उतर कर एक बाल्टी पानी का जुगाड़ कर रहे हैं। तो हमारे विधायक पांच सितारा होटलों में मिनरल वाटर पी रहे हैं। राजनीति में अब शर्म और नैतिकता की बातें कोई मायने नहीं रखती है। सवाल यह भी है कि क्या हमारे संविधान निर्माताओं ने ऐसे ही लोकतंत्र की कल्पना की थी? संविधान की संघीय व्यवस्था में राज्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रखी गई। मुख्यमंत्री को असीमित अधिकार दिए गए। लेकिन किसी संविधान निर्माता ने यह कल्पना नहीं की होगी कि सरकार का मुख्यमंत्री और प्रतिपक्ष का नेता ही अपने अपने विधायकों के साथ कैद हो जाए।

जब जाहिर है कि विधायक खरीद फरोख्त की मंडी में नहीं बिके, इसलिए होटलों में कैद किया गया है, लेकिन फिर भी बड़ी बेशर्मी से कहा जा रहा है कि विधायकों को प्रशिक्षण देने के लिए होटलों में रखा गया है। कुछ नेताओं का कहना है कि राज्यसभा चुनाव में वोट देने की प्रक्रिया भी समझाई जाएगी। दोनों ही दलों में अनेक विधायक दो से लेकर सात बार तक विधायक हैं, जो विधायक पिछले 20 वर्षों से 20 बार से ज्यादा मतदान कर चुका है, उन्हें क्या प्रक्रिया समझाई जाएगी? इसका जवाब मुख्यमंत्री और प्रतिपक्ष के नेता ही दे सकते हैं। सत्तारूढ़ कांग्रेस के विधायक एक जून से ही उदयपुर की होटल में कैद हैं। 6 जून को खुद मुख्यमंत्री गहलोत भी कैद हो गए हैं। इससे राजस्थान की सरकार की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।