विधानसभा एवं विधान परिषद का 23 मई को संयुक्त अधिवेशन

 डा0 मुरली धर सिंह

अयोध्या/लखनऊ। वर्तमान विधानसभा के प्रथम सत्र का आहुत राज्यपाल द्वारा दिनांक 23 मई 2022 को किया गया है। उल्लेखनीय है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 167 के तहत राज्यपाल द्वारा प्रतिवर्ष पहला सत्र विधानसभा का आयोजित करने हेतु संविधान के तहत निर्देश दिया जाता है क्योंकि राज्य के कार्यो के प्रशासन एवं विधान विषय सम्बंधी कार्यो के एवं निर्णयों के लागू कराने की जिम्मेदारी राज्यपाल को ही होती है क्योंकि पूर्व में ही राज्यपाल द्वारा शासकीय कार्यो में सहयोग के लिए 25 मार्च 2022 को योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में संविधान के अनुच्छेद 163 के तहत मुख्यमंत्री सहित मंत्रिमण्डल का गठन किया जा चुका है तथा विगत दिवस संविधान के अनुच्छेद 165 के तहत महाधिवक्ता के रूप में कानूनी सलाह लेने हेतु अजय कुमार मिश्रा की तैनाती की जा चुकी है तथा संविधान के अनुच्छेद 166 के तहत कार्यपालिका को राज्यपाल के निर्णय को मुख्यमंत्री जी के माध्यम से लागू करने हेतु यह विधानसभा सत्र अति महत्वपूर्ण है, क्योंकि पिछली 19 मार्च 2017 को जब योगी जी की सरकार बनी थी तो विधानसभा में पूर्ण बहुमत था, लेकिन विधान परिषद में बहुमत नही था इसलिए विपक्ष द्वारा विधान परिषद के सरकारी कार्यो में अड़चन डाला जाता था। जबकि वर्तमान योगी सरकार 25 मार्च 2022 को बनी है तो स्थितियां बदल गयी है वर्तमान में भाजपा के नेतृत्व वाली इस सरकार को दोनों सदनों में बहुमत है, जिससे कार्यो को करने  में तेजी से गति मिलेगी।

विधान परिषद में एक निश्चित संख्या तक सदस्य होते हैं। विधानसभा के एक तिहाई से ज्यादा सदस्य विधान परिषद में नहीं होने चाहिए। उदाहरण के तौर पर समझिए यूपी में 403 विधानसभा सदस्य हैं तो यूपी विधान परिषद में 134 से ज्यादा सदस्य नहीं हो सकते हैं। इसके अलावा विधान परिषद में कम से कम 40 सदस्य होना जरूरी है।

उत्तर प्रदेश में संविधान के अनुच्छेद 168 के तहत विधान मण्डल है इस विधान मण्डल में विधानसभा एवं विधान परिषद दोनों है। दोनों का सत्र 23 मई 2022 को संयुक्त अधिवेशन के रूप में विधानसभा मण्डल में आहुत किया गया है, जिसमें विधानसभा के नवनिर्वाचित एवं विधान परिषद के भी नवनिर्वाचित एवं सदस्य भाग लेंगे। सत्र की पहली बैठक से ही सदन के अवधि की गणना की जाती है जो 5 वर्ष की होती है। योगी जी के नेतृत्व में 25 मार्च 2022 को सरकार बनने के बाद आधे दर्जन की कैबिनेट बैठकों के निर्णय को तेजी से लागू किया जा रहा है तथा प्रथम बार कैबिनेट स्तर के वरिष्ठ मंत्रियों को प्रदेश के समस्त मण्डलों के लिए प्रभारी मंत्री बनाया गया है इसमें राज्यमंत्री भी शामिल है जो एक नया प्रयोग है। इसमें 30 जून 2022 तक सभी को खाद्यान्न देना, विकास परियोजनाओं को समय से पूरा करना, आप लोगों के लिए बेहतर सुविधा की व्यवस्था करना प्रमुख है। यह प्रथम सत्र नवनिर्वाचित विधानसभा का होगा जो बजट सत्र भी होगा, जो विभिन्न विभागों के विकास कार्यक्रमों एवं सरकार के 100 दिन के कार्यक्रम के कार्यो को पूरा करने के लिए मुख्य बिन्दु के साथ साथ बजट प्राविधान भी होंगे। [/Responsivevoice]