कर्मयोद्धा राम नाईक

संविधान सभा में उ0प्र0 से निर्वाचित सदस्यों के भाषण, विधान सभा में महिलाओं के प्रतिनिधित्व एवं मंत्रिपरिषद में उनकी सहभागिता से सम्बन्धित पुस्तक का विमोचन । इतिहास को विस्मृत कर कोई आगे नहीं बढ़ सकता, अपने महापुरुषों के बारे में जानने का प्रयास होना चाहिए, जिन्होंने राष्ट्र व समाज में अपना योगदान दिया ।मुख्यमंत्री ने ‘कर्मयोद्धा राम नाईक’, ’हृदय नारायण दीक्षित रचनावली’एवं विधान सभा अध्यक्ष के मार्गदर्शन में विधान मण्डल पुस्तकालय द्वारा प्रकाशित अन्य पुस्तकों का विमोचन किया । मुख्यमंत्री ने विधान भवन में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, बाबा साहबडॉ0 बी0आर0 आंबेडकर तथा पूर्व राष्ट्रपति डॉ0 राजेन्द्र प्रसाद के तैलचित्रों का अनावरण तथा विधान मण्डल प्रकाशन विक्रय केन्द्र का लोकार्पण किया । प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों तथा वर्तमान मुख्यमंत्री के विधानसभा में दिये गये भाषणों के संकलन का विमोचन सम्पन्न ।

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यहां लोक भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में ‘कर्मयोद्धा राम नाईक’, ’हृदय नारायण दीक्षित रचनावली’ एवं विधान सभा अध्यक्ष के मार्गदर्शन में विधान मण्डल पुस्तकालय द्वारा प्रकाशित अन्य पुस्तकों का विमोचन किया। उन्होंने इसके पूर्व, विधान भवन के राजर्षि पुरुषोत्तमदास टण्डन हॉल में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, बाबा साहब डॉ0 बी0आर0 आंबेडकर तथा पूर्व राष्ट्रपति डॉ0 राजेन्द्र प्रसाद के तैल चित्रों का अनावरण किया। उन्होंने विधान मण्डल प्रकाशन विक्रय केन्द्र का लोकार्पण भी किया। विधान मण्डल पुस्तकालय द्वारा प्रकाशित पुस्तकों में 05 मुख्यमंत्रियों के भाषण के संकलन पर आधारित पुस्तकों का विमोचन हुआ। इनमें उत्तर प्रदेश विधान सभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा दिये गये भाषणों का संकलन-‘संकल्प और सञ्जल्प: उत्तर प्रदेश विधान सभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी का संवाद’, सहित ‘उत्तर प्रदेश विधान सभा में राजनाथ सिंह’, ‘उत्तर प्रदेश विधान सभा में श्री कल्याण सिंह’, ‘उत्तर प्रदेश विधान सभा में श्री राम प्रकाश’ तथा ‘उत्तर प्रदेश विधान सभा में चौधरी चरण सिंह के उद्बोधन’ पुस्तकें सम्मिलित हैं। इसके साथ ही विधान मण्डल पुस्तकालय द्वारा प्रकाशित पुस्तकों में ‘संविधान सभा में उत्तर प्रदेश से निर्वाचित सदस्यांे के भाषण’, ‘उत्तर प्रदेश विधान सभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व एवं मंत्रिपरिषदमें सहभागिता’, ‘उत्तर प्रदेश विधान सभा में संसदीय विशेषाधिकार’, ‘उत्तर प्रदेश के माननीय राज्यपालों के अभिभाषण’, ‘उत्तर प्रदेश विधान सभा के उपवेशन और उनमें माननीय सदस्यों की उपस्थिति’ पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। लोक भवन में आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि आज यहां प्रदेश के पूर्व राज्यपाल श्री राम नाईक की आत्मकथा चरैवेति! चरैवेति!! के विभिन्न संस्मरणों पर आधारित ‘कर्मयोद्धा राम नाईक’ पुस्तक का विमोचन किया गया है। चरैवेति! चरैवेति!! पुस्तक का लगभग 11 भाषाओं में अनुवाद हुआ है। यह पुस्तक प्रत्येक व्यक्ति को जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है। ‘कर्मयोद्धा राम नाईक’ पुस्तक पूर्व राज्यपाल श्री राम नाईक की जीवन्तता व सक्रियता के साथ उत्तर प्रदेश व समाज के प्रत्येक पहलू पर उनकी गहरी पैठ को व्यक्त करती है।

कोरोना कालखण्ड के दौरान मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश की जनताने जो लड़ाई लड़ी वह अभिनंदनीय-पूर्व राज्यपाल राम नाईक


आज विधान सभा अध्यक्ष के मार्गदर्शन में विधान मण्डल पुस्तकालय द्वारा प्रकाशित पुस्तकों का विमोचन किया गया। इसमें साहित्यकार डॉ0 इंदीवर पाण्डेय के सम्पादन में ‘हृदय नारायण दीक्षित रचनावली’ का विमोचन हुआ है। साथ ही, प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों तथा वर्तमान मुख्यमंत्री के विधान सभा में दिये गये भाषणों के संकलन का भी विमोचन कार्यक्रम यहां सम्पन्न हुआ है। इस कार्यक्रम का आयोजन विधान सभा सचिवालय के मार्गदर्शन में हो रहा है। उन्होंने कहा कि वे विधान सभा सचिवालय के आभारी हैं, जिन्होंने पांच मुख्यमंत्रियों के भाषणों का संकलन किया है। यहां विमोचित पुस्तकें विधानमण्डल पुस्तकालय के लिए एक बड़ा संकलन होंगी, जिन्हें अलग-अलग पुस्तक के आकार के रूप में संजोया गया है। यह पुस्तकें पुस्तकालय की समृद्धि के साथ-साथ नये विधान सभा सदस्यों, राजनीति में रूचि रखने वालों, शोधार्थियों, सहित सार्वजनिक जीवन में उत्तर प्रदेश से सम्बन्धित सामाजिक, आर्धिक गतिविधियों पर नजर रखने वाले व्यक्तियों के लिए भी ज्ञानवर्धक होंगी। उन्होंने कहा कि यहां पर संविधान सभा में उत्तर प्रदेश से निर्वाचित सदस्यों के भाषण एवं उत्तर प्रदेश विधान सभा में महिलाओं के प्रतिनिधित्व एवं मंत्रिपरिषद में उनकी सहभागिता से सम्बन्धित पुस्तक का विमोचन सम्पन्न हुआ है। यह पुस्तक रूचिकर व भावी पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक होगी।

भारतीय परम्परा में शब्द वास्तव में ब्रह्म का प्रतीक माना जाता है, शब्द ब्रह्म हैतो वह शाश्वत होगा, वह शाश्वत है तो वह सत्य भी होगा,विमोचित पुस्तकें पुस्तकालय की समृद्धि के साथ-साथ नये विधानसभा सदस्यों, राजनीति में रुचि रखने वालों, शोधार्थियों सहित सार्वजनिकजीवन में उ0प्र0 से सम्बन्धित सामाजिक, आर्धिक गतिविधियों पर नजररखने वाले व्यक्तियों के लिए भी ज्ञानवर्धक होंगी- मुख्यमंत्री


भारतीय परम्परा में शब्द वास्तव में ब्रह्म का प्रतीक माना जाता है। शब्द ब्रह्म है तो वह शाश्वत होगा, वह शाश्वत है तो वह सत्य भी होगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता ने पूर्व राज्यपाल श्री राम नाईक के कार्यकाल को देखा है। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उन्हें संसद में श्री नाईक के सान्निध्य में कार्य करने का अवसर प्राप्त हुआ, उन्होंने सदैव एक दृष्टि दी। संसद में राष्ट्रगान व राष्ट्रगीत को गाये जाने की परम्परा, बम्बई को मुम्बई कहा जाए, इलाहाबाद को प्रयागराज कहा जाए, यह महत्वपूर्ण सुझाव भी उनके रहे हैं। प्रदेश का स्थापना दिवस 24 जनवरी को मनाये जाने के प्रेरणास्रोत श्री राम नाईक ही हैं।

भारतीय चिन्तन में शब्द को ब्रह्म कहा गया, पुस्तकें शब्द सत्ता कीअभिव्यक्ति, प्रवचन, भाषण, बातचीत, कथन-उपकथन यह सभीवाणी के कारण सम्भव व सम्पन्न होते हैं: विधान सभा अध्यक्ष


मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने वर्ष 1916 में लखनऊ में ‘स्वराज मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है, उसे मैं लेकर रहूंगा’ कहा था। श्री राम नाईक की प्रेरणा से लोकमान्य तिलक के इस उद्घोष पर लखनऊ में एक कार्यक्रम का आयोजन वर्ष 2017 में किया गया था, जिसमें लोकमान्य तिलक के परिवार के सदस्यों को बुलाया गया था। यह नई पुस्तक ‘कर्मयोद्धा राम नाईक’ पिछले भाषणों के संकलन के साथ ही उनके दूरदर्शिता का सजीव चित्रण हम सभी के सामने प्रस्तुत करती है। इतिहास को विस्मृत कर कोई आगे नहीं बढ़ सकता। अपने महापुरुषों के बारे में जानने का प्रयास होना चाहिए, जिन्होंने राष्ट्र व समाज में अपना योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि विधान सभा अध्यक्ष श्री हृदय नारायण दीक्षित अपनी विशिष्ट रचना व दक्षता के लिए विख्यात हैं। समाचार पत्रों में उनके सामाजिक विषयों पर आलेख एवं स्तम्भ पढ़ने का सौभाग्य सभी को मिला है। यह लेख लोगों का ज्ञानवर्धन करते हैं। श्री दीक्षित एक विद्वान हैं, साथ ही वे समाज के अन्तिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के लिए भी चिंतित रहते हैं। भूमिहीनों को भूमि देने व भूमिहीनों को उनके अधिकार दिलाने से सम्बन्धित सामाजिक आन्दोलन से वह स्वयं जुड़े थे, जो उनका एक अभिन्दनीय प्रयास है।

मुख्यमंत्री सांस्कृतिक भावबोध से जुड़ने वाले उ0प्र0 के एकमात्र नेता- विधान सभा अध्यक्ष


पूर्व राज्यपाल एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री राम नाईक ने कहा कि कोरोना कालखण्ड के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश की जनता ने जो लड़ाई लड़ी वह अभिनंदनीय है। मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में कोरोना के नये वैरिएंट ओमिक्रॉन का भी अन्त होगा। उन्होंने संत तुकाराम के एक  वक्तव्य का उल्लेख करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जी आश्वासन देने के साथ ही उसकी पूर्ति के लिए भी जाने जाते हैं। उनकी इस कार्यप्रणाली की देश में प्रशंसा हो रही है। मुख्यमंत्री जी ने उत्तर प्रदेश की जनता से जो कहा उसे विगत 05 वर्ष में कर दिखाया।प्रदेश के विधान सभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने  कहा कि भारतीय चिन्तन में शब्द को ब्रह्म कहा गया है। यह बात महाभारत में महर्षि व्यास ने कही। बाइबिल में सृष्टि निर्माण से पहले शब्द था। ऐतरेय उपनिषद में कहा गया है कि सबसे पहले हिरण्यगर्भ था, उसके फूटने से सबसे पहली वस्तु जो निकली वह वाणी थी। ऋग्वेद में वाणी पर अलग से सूत्र है। शब्द बहुत महत्वपूर्ण है। पुस्तकें शब्द सत्ता की अभिव्यक्ति हैं। हम लोगों के प्रवचन, भाषण, बातचीत, कथन-उपकथन यह भी सब वाणी के कारण सम्भव होते हैं, सम्पन्न होते हैं। पतंजलि ने कहा कि शब्द एक है। एक ही शब्द जहां-जहां बैठता है, वहां-वहां अर्थ नया हो जाता है। इसलिए शब्द की बैठकी पर ध्यान लगाना चाहिए। शब्द अपनी स्थिति के अनुसार चलता है। इस समय देश में सिर्फ दो शब्द की चर्चा चल रही है, पहला मोदी, दूसरा योगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जी सांस्कृतिक भावबोध से जुड़ने वाले उत्तर प्रदेश के एकमात्र नेता हैं। इनके स्वभाव में गतिशीलता है, जो उनके द्वारा प्रदेश की जनता के हितों के लिए की जा रही कार्यप्रणाली में प्रदर्शित होती है।


विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेन्द्र सिंह ने कहा कि श्री राम नाईक का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा की प्रतिमूर्ति है। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कच्चे तेल में एथेनॉल के मिश्रण, मुम्बई व दिल्ली में सी0एन0जी0 गैस एवं पाइप लाइन से गैस वितरण की शुरुआत की। सांसद निधि की परिकल्पना श्री राम नाईक की है।इस अवसर पर अध्यक्ष चरैवेति! चरैवेति!! सलाहकार समिति के अध्यक्ष डॉ0 अम्मार रिजवी ने अपने उद्बोधन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी को कर्मयोगी तथा विधान सभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित को हृदयपाल कहा। उन्होंने कहा कि चरैवेति! चरैवेति!! शब्द का वास्तविक प्रभाव सही रूप में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी पर पड़ा है। वह हर वक्त विकास के लिए अग्रसर रहते हैं। मुख्यमंत्री जी ने जिस निडरता से कोरोना का मुकाबला किया वह सराहनीय है।इस अवसर पर कार्यक्रम में उपस्थित लोगों का स्वागत एवं अभिन्नदन करते हुए संसदीय कार्य एवं वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि कोई पद चिन्ह बनाता है, कोई पद चिन्हों पर चलता है। प्रदेश के मुख्यमंत्री ने प्रदेश के परसेप्शन को बदला है। विधान सभा अध्यक्ष ने अपनी लेखन शैली से समाज को बेहतर दिशा देने कार्य किया है। लोगों का साहित्य से जितना लगाव होगा, उतना ही ज्ञानवर्धन होगा। साहित्यकार इंदीवर पाण्डेय ने भी कार्यक्रम को सम्बोधित किया तथा अपनी मासिक पत्रिका ‘शब्दवीर’ मुख्यमंत्री जी को भेंट की।प्रमुख सचिव विधान सभा श्री प्रदीप कुमार दुबे ने धन्यवाद ज्ञापित किया।अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी एवं अपर मुख्य सचिव सूचना एवं एम0एस0एम0ई0 नवनीत सहगल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।