मुस्लिम बाहुल्य घाटी में हिन्दुओं की हत्या उचित नहीं….!

कश्मीर में हिन्दुओं की रखा के लिए कश्मीरी मुसलमानों को ही आगे आना चाहिए। मुस्लिम बाहुल्य घाटी में हिन्दुओं की हत्या उचित नहीं।

एस0 पी0 मित्तल

7 जून को भी सुरक्षा बलों ने कश्मीर में तीन आतंकवादियों का एनकाउंटर में मार डाला। सुरक्षा बलों द्वारा लगातार ऐसी कार्यवाही कर रहे हैं, लेकिन इसके बाद भी मुस्लिम बाहुल्य कश्मीर में हिन्दुओं की हत्या का सिलसिला नहीं रुक रहा है। सुरक्षाबलों के इंतजाम अपनी जगह हैं, लेकिन कश्मीर में हिन्दुओं की हत्या को रोकने में कश्मीरी मुसलमानों को भी आगे आना चाहिए। भारत को जब धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बनाया है, तब कश्मीर में हिन्दुओं की हत्या उचित नहीं है। सुरक्षा बलों का मानना है कि पाकिस्तान से आए प्रशिक्षित आतंकी ही घाटी में हिन्दुओं की हत्या कर रहे हैं। कई मामलों में तो स्थानीय नागरिकों के सहयोग का पता चला है। कश्मीरी माने या नहीं लेकिन घाटी में दोबारा से आतंकियों के कब्जे में आती है तो फिर संपूर्ण जम्मू कश्मीर के हालात बिगड़ेंगे।

अनुच्छेद 370 के हटने के बाद कश्मीर घाटी को काफी हद तक आतंक से मुक्त किया गया है। अब सुरक्षा बलों पर पत्थर नहीं फेंके जाते, लेकिन पिछले कुछ दिनों से हिन्दुओं की हत्याओं में इजाफा हो रहा है। असल में कश्मीर में हिन्दुओं की हत्या कर आतंकी पूरे देश का माहौल खराब करना चाहते हैं। सवाल उठता है कि क्या जब पूरे देश में मुसलमान अपने धर्म के अनुरूप रह सकते हैं तो फिर कश्मीर में आम हिन्दू क्यों नहीं रह सकता यह सही है कि कश्मीर में हालत बिगाडने में पाकिस्तान के कट्टरपंथियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। लेकिन कश्मीरी मुसलमानों को पाकिस्तान की साजिश को समझना चाहिए। कश्मीर की आय का मुख्य स्त्रोत पर्यटन है।

अनुच्छेद 370 हटने के बाद से कश्मीर में पर्यटकों की रिकॉर्ड वृद्धि हुई है। इसका सीधा फायदा कश्मीरी मुसलमानों को मिला है। श्रीनगर की ऐतिहासिक डल झील में फिर से रौनक आ गई है। लेकिन यदि कश्मीर में हिन्दुओं को मारा जाता रहा तो इससे पर्यटन उद्योग पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। अच्छा हो कि हिंदुओं की हिफाजत में कश्मीरी मुसलमान आगे आएं। ताकि कश्मीर में खुशहाली बनी रहे। यदि कश्मीर घाटी से आतंकियों के कब्जे में आती है तो धरती का स्वर्ग माने जाने वाली घाटी फिर से वीरान हो जाएगी। कश्मीर तभी खुशहाल रह सकता है, जब हिन्दू भी सुकून के साथ रह सके। हिन्दू नहीं रहेगा तो कश्मीरियों को भी अनेक दुश्वारियों का सामना करना पड़ेगा।