अधजल गगरी छलकत जाय

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अधजल गगरी छलकत जाय।
थोंथा चना देख मुसकाय।
गूंगा गावे गीत सुरीला,
बहरा देखो धूम मचाय।
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अंधा बोले सब दिखता है,
मूरख पोथी देख लजाय।
अंधों में कनवां राजा है,
एक आंख से निरखत जाय।
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चोर उचक्का बने मदारी,
जनता को सब रहे नचाय।
बिन पानी परजा सब रोवे,
नलिनी पानी में कुंभलाय।
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मेघा – मेघा पानी लाओ,
लयिका घूम -घूम चिल्लाय।
बरखा बिना बाढ़ आवत है,
घर मड़ई सब डूबत जाय।
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का बरखा जब कृषि सुखाने,
खेतिहर सोच सोच बउराय।
छोटका नेता मंत्री होइ के,
छोटन को देवें लतियाय।
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युग परिवर्तन जबसे होइ गै,
कांग्रेस पार्टी गई बिलाय।
राहुल गांधी पप्पू बनि कै,
चौकीदार चोर चिल्लाय।
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घर कै भेदी लंका दाहे,
सबके मन में आग लगाय।
ख़ुद जीतै सबके हरवावे,
पग – पग में रोड़ा अटकाय।
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कहें ‘अनंत’ मरम कै बतिया,
सुनो ध्यान से कान लगाय।
भरी गगरिया कुछ ना बोले,
अधजल गगरी छलकत जाय।

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