जीत का अंतर भारी फिर भी हाथ खाली

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जीत का अंतर भारी फिर भी हाथ खाली
जीत का अंतर भारी फिर भी हाथ खाली

 लोकसभा चुनाव 2024 में वाराणसी से नरेंद्र दामोदर दास मोदी ने जीत दर्ज की तो वहीं मैनपुरी से डिंपल यादव, कन्नौज से अखिलेश यादव, लखनऊ से राजनाथ सिंह, मथुरा से हेमामालिनी, रायबरेली से राहुल गांधी ने जीत दर्ज की. हारने वाले प्रमुख उम्मीदवारों में अमेठी से स्मृति ईरानी और सुल्तानपुर से मेनका गांधी है.  जीत का अंतर भारी फिर भी हाथ खाली

लोकसभा चुनावों में सबसे अधिक वोटों से जीतने वाले प्रत्याशी भारतीय राजनीति में एक नया कीर्तिमान स्थापित करते है. वहीं 2024 के लोक सभा चुनावों में सबसे कम वोटों से जीतने वाले प्रत्याशी भी अलग से चर्चा में रहते है. यहां हम लोकसभा चुनाव 2024 में सर्वाधिक वोटों से और कम मतों से जीतने वाले उम्मीदवारों की बात करने जा रहे है.लोक सभा चुनावों में सबसे अधिक वोटों से जीतने वाले प्रत्याशी भारतीय राजनीति में एक नया कीर्तिमान स्थापित करते आ रहे है. वहीं 2024 के लोक सभा चुनावों में सबसे कम वोटों से जीतने वाले प्रत्याशी भी अलग से चर्चा में रहते है. मध्य प्रदेश की इंदौर लोकसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार शंकर लालवानी ने सबसे बड़ी जीत दर्ज की है.

2024 लोकसभा चुनाव में सबसे कम अंतर से जीतने वाले 6 उम्मीदवार. इस लोकसभा चुनाव में कई ऐसी भी सीटें रही जहां उम्मीदवारों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली और जीत का मार्जिन सबसे कम रहा.

2024 में सबसे कम अंतर से जीतने वाले 6 उम्मीदवार

2024 में सर्वाधिक वोटों से जीतने वाले 5 उम्मीदवार. लोकसभा चुनाव 2024 में जारी परिणामों में सबसे अधिक वोटों से जीतने वाले 5 उम्मीदवार नीचे दिए गए है. मध्य प्रदेश की इंदौर लोकसभा सीट के घोषित परिणाम ने इतिहास रचा दिया है. इस सीट से भाजपा उम्मीदवार शंकर लालवानी ने जीत दर्ज करने के साथ इतिहास बना दिया है. यह लोकसभा चुनाव 2024 की सबसे बड़ी जीत है. यह पहला अवसर है कि NOTA को 2.18 लाख से अधिक मत मिले. बता दें की इस सीट से कांग्रेस उम्मीदवार अक्षय कांति बम ने अपना नामांकन वापस ले लिया था. 25 लाख से ज्यादा मतदाताओं वाली इंदौर लोकसभा सीट के तहत 8 विधानसभा सीट शामिल है.आयोग की ओर से देश के सभी लोकसभा क्षेत्रों के परिणाम घोषित कर दिए गए है.शंकर लालवानी इंदौर से दूसरी बार भाजपा की और से सांसद चुने गए हैं. उन्हें पार्टी ने दूसरी बार इलेक्शन लड़ने का अवसर दिया था. इंदौर में वह 11,75,092 वोटों के अंतर से जीतें है.

5000 से कम मतों के अंतर से जीत दर्ज करने वाले अन्य उम्मीदवार


महेश राजपूत (भाजपा)- उत्तर प्रदेश की फर्रूखाबाद सीट पर 2678 मतों के अंतर से जीत हासिल की.उन्हें कुल 487963 मत मिले.उन्होंने समाजवादी पार्टी के नवल किशोर शाक्या (485285 वोट) को हराया.

शेर सिंह घुबाया (कांग्रेस)- उत्तर प्रदेश की फिरोजपुर सीट पर 3242 मतों के अंतर से जीत दर्ज की. उन्हें कुल 266626 मत मिले. जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी जगदीप सिंह काका बरार (आम आदमी पार्टी) को 263384 मत मिले.

बछव शोभा दिनेश (कांग्रेस)- महाराष्ट्र की धुले सीट पर 3831 मतों के अंतर से जीत दर्ज की. उन्हें कुल 583866 वोट मिले. उन्होंने भाजपा के भमरे सुभाष रामराव (580035) को हराया.

कमलेश पासवान (भाजपा)- उत्तर प्रदेश की बांसगांव सीट पर 3150 मतों के अंतर से जीत मिली.उन्हें कुल 42,8693 मत मिले. उन्होंने कांग्रेस के सदल प्रसाद (425543) को हराया.

प्रवीण पटेल (भाजपा)- उत्तर प्रदेश की फूलपुर सीट पर 4332 मतों के अंतर से जीत दर्ज की. उन्हें कुल 452600 वोट मिले. उन्होंने समाजवादी पार्टी के अमर नाथ सिंह मौर्य (448268 वोट) को हराया.

अरुणा डीके (भाजपा)- तेलंगाना की महबूबनगर सीट पर 4500 मतों के अंतर से जीत दर्ज की. उन्हें कुल 510747 वोट मिले.उन्होंने कांग्रेस के चल्ला वामशी चंद रेड्डी (506247 वोट) को हराया.

शंकर लालवानी 1994 से 1999 तक इंदौर नगर निगम में पार्षद रहे.पार्षद बनने के पहले वे भारतीय जनता पार्टी के वार्ड अध्यक्ष और मंडल अध्यक्ष भी रहे. इसके बाद 1999 से 2009 तक 10 साल इंदौर नगर निगम में सभापति के पद पर रहे. इसके बाद उन्होंने इंदौर नगर भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष का पद दो बार संभाला. 2013 में उन्हें इंदौर विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया गया था. 2019 उन्हें भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा का टिकट दिया था तब वे लगभग साढ़े पांच लाख ऐतिहासिक वोटों से जीते थे.लोकसभा चुनाव में मध्य प्रदेश की चर्चित सीटों में से एक इंदौर लोकसभा से भाजपा प्रत्याशी शंकर लालवानी ने इतिहास रच दिया है. उन्होंने देश में जीत का एक नया रिकॉर्ड बनाया है.शंकर लालवानी 1.95 करोड़ की संपत्ति के मालिक हैं. हालांकि उनपर 10 लाख रुपये का लोन भी है, जो उन्होंने कार खरीदने के लिए लिया था. खास बात ये है कि 2019 के लोकसभा चुनाव के समय उनकी कुल संपत्ति 29 लाख के आसपास थी, जो अब बढ़कर करोड़ों में चली गई है. उनके खिलाफ अभी कोई भी आपराधिक मुकदमा नहीं है.

ऐसे पांच उम्मीदवार जिन्होंने सबसे कम मतों के अंतर से जीत दर्ज की

  रविंद्र दात्ताराम वायकर (शिवसेना)-  महाराष्ट्र की मुंबई उत्तर पश्चिम सीट पर मात्र 48 मतों के अंतर से विजयी हुए। उन्हें कुल 452644 मत मिले। उन्होंने शिवसेना (यूबीटी) के अमोल गजानन कीर्तिकर (452596 वोट) को हराया। 

 अडूर प्रकाश (कांग्रेस)-  केरल की अत्तिंगल सीट से 684 मतों के अंतर से जीत हासिल की। उन्हें कुल 328051 मत मिले। उन्होंने माकपा के वी. जॉय (327367 वोट) को हराया। 

भोजराज नाग (भाजपा)- छत्तीसगढ़ की कांकेर सीट पर 1884 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। उन्हें कुल 597624 मत मिले। उन्होंने कांग्रेस के बीरेश ठाकुर (595740 वोट) को हराया। 

मनीष तिवारी (कांग्रेस)- चंडीगढ़ सीट पर 2504 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। उन्हें कुल 216657 मत मिले।  उन्होंने भाजपा के संजय टंडन (214153 वोट) को हराया। 

मुहम्मद हमदुल्ला सईद (कांग्रेस) – लक्षद्वीप सीट पर 2647 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। उन्हें कुल 25726 मत मिले। उन्होंने राकांपा (शरद पवार) के उम्मीदवार मुहम्मद फैजल ( 23079 वोट) को हराया।  जीत का अंतर भारी फिर भी हाथ खाली