कैंसर से ज्यादा अस्थमा से मरते लोग

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कैंसर से ज्यादा अस्थमा से मरते लोग
कैंसर से ज्यादा अस्थमा से मरते लोग

विश्व अस्थमा दिवस पर अस्थमा श्वसन रोग विशेषज्ञ डॉ. पीयूष अरोड़ा ने रोग निदान और जागरूकता की जानकारी दी।अस्थमा फेफड़ों की एक बीमारी है। फेफड़ों की वायु नलिकाओं में सूजन के कारण अस्थमा होता है, जिसमे व्यक्ति को सांस लेने में कठिनाई होती है। किसी भी व्यक्ति को अस्थमा होने का सबसे प्रमुख कारण उसके परिवार में किसी और को अस्थमा का होना हो सकता है। कैंसर से ज्यादा अस्थमा से मरते लोग

अजय सिंह

लखनऊ। 2 मई को विश्व अस्थमा दिवस मनाया जा रहा है। इस दिन का उद्देश्य लोगों को अस्थमा रोग के प्रति जागरूक करना होता है। दुनिया में कैंसर रोग से भी ज्यादा लोग अस्थमा रोग से मरते हैं। इसलिए इस रोग के लक्षणों और बचाव के बारे में जानना जरूरी है। अजमेर के जनसंपर्क अधिकारी भानू गुर्जर ने प्रदेश के मशहूर अस्थमा और श्वास रोग विशेष तथा जेएलएन अस्पताल के एसोसिएशन प्रो. डॉ. पीयूष अरोड़ा से विशेष बातचीत कर एक आलेख तैयार किया है। इस आलेख को ब्लॉक ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया जा रहा है। ताकि देशभर के लोग महत्वपूर्ण तथ्यों से अवगत हो सके। रोग के निदान और बचाव के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9413224622 पर मैसेज देकर डॉ. पीयूष अरोड़ा से ली जा सकती है।
मिथक और तथ्य:-
अस्थमा सबसे आम श्वसन स्थितियों में से एक है। जो बच्चों और वयस्कों दोनों में होती है। यह फेफड़ों की एक पुरानी दीर्घकालिक बीमारी है जिसके कारण वायु मार्ग सूज जाता है और संकीर्ण हो जाता है। ट्रिगर्स के संपर्क में आने पर, सूजन वाले वायु मार्ग और अधिक सूज जाते हैं। अतिरिक्त बलगम पैदा करते हैं जिससे सांस लेना मुश्किल हो जाता है। अस्थमा के लक्षणों में खांसी घर-घराहट, सांस लेने में तकलीफ और सीने में जकड़न शामिल हैं। कुछ लोगों में गंभीर अस्थमा के दौरे जान लेवा हो सकते हैं। लाखों लोग अस्थमा से पीड़ित हैं। लेकिन इसकी व्यापकता के बावजूद कई मिथक और भ्रांतियां अस्थमा को घेरे हुए हैं। यह लेख अस्थमा पर कुछ मिथकों और तथ्यों पर प्रकाश डालेगा जिससे स्थिति को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने में मदद मिलेगी।

कैंसर से ज्यादा अस्थमा से मरते लोग


सामान्य अस्थमा मिथक और तथ्य -अस्थमा का कोई इलाज नहीं है लेकिन अस्थमा के दौरे की बारंबारता और गंभीरता उम्र के साथ कम हो सकती है। जैसे.जैसे वे बड़े होते जाते हैं, अस्थमा से पीड़ित बच्चों की स्थिति में सुधार देखा जा सकता है। दमा के ट्रिगर के प्रति उनकी संवेदनशीलता भी कम हो सकती है।

मिथक:- अस्थमा से पीड़ित लोगों को व्यायाम नहीं करना चाहिए।
तथ्य:- अस्थमा के लक्षणों के लिए नियमित रूप से व्यायाम करना फायदेमंद पाया गया है

यह एक आम धारणा है कि व्यायाम करने से अस्थमा के लक्षण बढ़ जाते हैं। लेकिन तथ्य यह है कि शारीरिक गतिविधि फेफड़ों के कार्य को मजबूत और बेहतर बनाने में मदद करती है। यह अस्थमा से पीड़ित लोगों की समग्र फिटनेस और जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए भी पाया गया है। हालांकि जोरदार शारीरिक गतिविधि से अस्थमा का दौरा पड़ सकता है और इसलिए इससे बचना चाहिए।

मिथक:- अस्थमा आता है और जाता है ये हमेशा नहीं रहता है।
तथ्य:- अस्थमा के दौरान चेस्ट में कंजेशन होना ठीक से सांस न आना कफ होना ये सभी सिम्टम्स दिखाई देते हैं।

आपको ये जानना जरूरी है कि अस्थमा एक क्रोनिक डिजीज है जोकि लंबे समय तक रहती है। अस्थमा का इलाज दवाओं से लंबे समय तक होता है। बेशक उस के सिम्टम्स दिखाई दें। यदि आप सोचते हैं कि अस्थमा के सिम्टम्स नहीं है तो दवाएं छोड़ो आप अपनी हेल्थ के साथ बुरा कर रहे हैं।

मिथक:- अस्थमा मरीज नॉर्मल लाइफ नहीं जी सकते है।
तथ्य:– ये एक भ्रम है।

अस्थमा होने पर भी आप नॉर्मल और हेल्दी लाइफ जी सकते हैं। अगर आप अपने डॉक्टर की सलाह पर चलते हैं और नियमित तौर पर दवाएं लेते हैं तो अस्थमा आपको बहुत तकलीफ नहीं देगा। बहुत से सेलिब्रिटीज हैं जिनको अस्थमा है लेकिन वे नॉर्मल और एक्टिव लाइफ जी रहे हैं।

कैंसर से ज्यादा अस्थमा से मरते लोग

संजय गांधी हॉस्पिटल के पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ अजय सिंह बताते हैं कि सांस की बीमारियों में अस्थमा, सोओपीडी और ब्रोंकाइटिस तीनों ही खतरनाक हैं।ये डिजीज लंग्स को नुकसान पहुंचाती है। तीनों में ही सांस लेने में परेशानी होती है। इस वजह से लोग इनको एक ही बीमारी मान लेते हैं, जबकि इनमें फर्क होता है।अस्थमा की बात करें तो इस बीमारी को आम भाषा में दमा की बीमारी कहा जाता है। ये सांस की नलियों में सूजन की वजह से होती है।अस्थमा में फेफड़ों तक हवा पहुंचने में परेशानी होती है। इसमें सांस लेने में काफी परेशानी होती है और अस्थमा के लक्षण गंभीर होने पर अस्थमा का अटैक भी आ सकता है।

मिथक:- अस्थमा के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवाएं आदत बन जाती हैं और समय के साथ अप्रभावी हो जाती है।
तथ्य:- अस्थमा की दवाएं सुरक्षित हैं और अस्थमा के प्रभावी प्रबंधन के लिए आवश्यक हैं

चूंकि अस्थमा एक पुरानी स्थिति है लक्षणों को प्रबंधित करने के लिए लंबी अवधि की दवाओं की आवश्यकता होती है। ये दवाएं वायु मार्ग के आस पास की मांसपेशियों को आराम देती हैं और वायु मार्ग को चौड़ा करती हैं। ब्रोंकोडायलेटर और इनहेल्ड कर्टिकोस्टे किड्स अस्थमा को प्रबंधित करने के लिए उपयोग की जाने वाली कुछ दवाएं हैं। ये दवाएं आदत नहीं बनाते हैं और अस्थमा को नियंत्रण में रखने के लिए फायदेमंद हैं।

मिथक:- अस्थमा जानलेवा नहीं हो सकता है।
तथ्य:- हालां कि दुर्लभ अस्थमा घातक हो सकता है।

अस्थमा लाखों लोगों को प्रभावित करने वाली एक पुरानी लाइलाज बीमारी है। यदि अनुपचारित छोड़ दिया जाए तो अस्थमा के लक्षण बिगड़ सकते हैं और घातक साबित हो सकते हैं। साथ ही अस्थमा का भड़कना जान लेवा हो सकता है लेकिन दुर्लभ है। अस्थमा के प्रबंधन में अस्थमा के दौरे के ट्रिगर्स को समझना और उससे बचना शामिल है। गंभीर अस्थमा वाले लोगों को गंभीर मामलों को पहचानने और रोकने में सक्षम होना चाहिए।

मिथक:- अस्थमा का इलाज तभी किया जाना चाहिए जब लक्षण दिखाई दे।
तथ्य:- अस्थमा को चिकित्सक द्वारा निर्धारित नियमित दवाओं से नियंत्रित किया जाना चाहिए

कुछ दवाएं तुरंत राहत प्रदान करती हैै। और केवल अस्थमा के दौरे के दौरा नही ली जाती हैं। क्योंकि अस्थमा पुराना है लंबे समय तक अस्थमा नियंत्रण दवाएं भी निर्धारित की जा सकती हैं। ये दवाएं जब हर दिन ली जाती हैं तो वायु मार्ग की सूजन को कम करती हैं और दौरे की घटना को रोकती हैं। हालांकि उपचार हमलों की गंभीरता और आवृत्ति पर निर्भर करेगा।

मिथक:- मिथ इनहेलर से ज्यादा बेहतर है दवाएं और सिरप।
तथ्य:- ये सिर्फ एक मिथ है कि अस्थमा मरीजों के लिए इनहेलर से बेहतर दवाएं हैं।

इनहेलर थेरेपी अस्थमा में बेस्ट है। टैबलेट्स और सीरप अपना असर देर से दिखाती है जबकि इन्हे टलर ड्रग डायरेक्ट लंग्स में जाती है।

मिथक:- अस्थमा से पीड़ित सभी लोगों में से एक जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
तथ्य:- अस्थमा के लक्षण लोगों में अलग अलग हो सकते है।

कुछ लोगों में अस्थमा के कई लक्षण हो सकते हैं जिनमे खांसी घर घराहट और सीने में जकडऩ शामिल है, जबकि अन्य मे सिर्फ एक लक्षण हो सकता है। लक्षण एक ही व्यक्ति मे एक एपिसोड से दूसरे एपिसोड में भिन्न हो सकते हैं, और लक्षण भी हल्के से लेकर गंभीर तक हो सकते हैं। यह समझकर कि अस्थमा प्रत्येक व्यक्ति को कैसे प्रभावित करता है, स्थिति को बेहतर ढंग से प्रबंधित किया जा सकता है।

मिथक:- अस्थमा पेशेंट ना कोई स्पोर्ट्स खेल सकते हैं और ना ही एक्सरसाइज कर सकते हैं।
तथ्य:- अस्थमा होने पर भी आप खेल भी सकते हैं और एक्सरसाइज भी कर सकते हैं।

लेकिन आपको नियमित तौर पर डॉक्टर की सलाह पर दवाएं लेना जरूरी हैं। अस्थमा के मरीजों के लिए स्विमिंग बेहतर है। बहुत से अस्थमा मरीजों को एक्सरसाइज के बाद बहुत रिलीफ मिलता है। आप अपने टीम मेंबर्स, जिमस्ट्रक्टेर या कोच को पहले ही बता दें कि आप को अस्थमा है।

अस्थमा का उपचार –

किसी भी व्यक्ति के लिए अस्थमा का उपचार तभी संभव है। जब उसे समय रहते अस्थमा के बारे में पता चल जाये। और वो अस्थमा के लक्षणों को पहचान कर तुरंत निदान के लिए डॉक्टर के पाए जाएं। अस्थमा के इलाज के लिए इसकी दवाएं बहुत कारगर होती है। अस्थमा से निपटने के लिए आमतौर पर इन्हेल्ड स्टेरॉयड या नाक के माध्यम से दी जाने वाली दवा और अन्य एंटी इंफ्लामेटरी दवाएं अस्थमा के लिए जरूरी मानी जाती है। अस्थमा में इन्हेलर का भी उपचार के तौर पर प्रयोग किया जाता है। इन्हेलर का काम फेफड़ों में दवाई पहुंचना होता है। जब किसी भी व्यक्ति को अस्थमा का गंभीर अटैक पड़ता है तो डॉक्टर अक्सर उससे ओरल कोर्टिकोस्टेरॉयड्स का एक छोटा कोर्स करने को बोल सकते है। इस कोर्स को दो सप्ताह तक करने से कोर्टिकोस्टेरॉयड के दुष्प्रभाव होने की संभावना कम हो जाती है। वही दूसरी तरफ इसके एक महीने से ज्यादा प्रयोग से इसके दुष्प्रभाव अधिक गंभीर और स्थायी भी हो सकते है।

निष्कर्ष:- अस्थमा पर सही तथ्य प्राप्त करना महत्वपूर्ण है क्योंकि गलत धारणाएं लोगों को उचित इलाज कराने से रोक सकती हैं। डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएँ लेकर, एक स्वस्थ जीवनशैली का पालन करके और लक्षणों पर ध्यान देकर अस्थमा को प्रभावी ढंग से प्रबंधित किया जा सकता है। उचित प्रबंधन के साथ अस्थमा से पीड़ित लोग एक सक्रिय सामान्य उत्पादक और स्वस्थ जीवन जी सकते हैं। कैंसर से ज्यादा अस्थमा से मरते लोग