माँ तुम माँ हो या कोई जादूगर

अलका प्रमोद

माँ या जादूगर
माँ सच बताना
नहीं तुम छिपाना
तुम माँ हो
या कोई जादूगर।
देशी-विदेशी
कितनी भी महँगी सुगन्ध लगा लें
तेरे आँचल की खुशबू
का जवाब नहीं।
बना लें छप्पन पकवान भले
तेरे हाथों की चुपड़ी रोटी
सा स्वाद नहीं।
भले भायें कितनी कहानी
पर तेरी मन गढ़ंत कहानी
सी बात नहीं।
चाहे कितनी दवा लगाएं
पर तेरी फूँक सा
सवाब नहीं।
नींद की गोली
ले कर भी देखा
पर तेरी लोरी सा
असर कोई याद नहीं।
माँ सच बताना
कोई मंत्र है ना
जो तेरे पास छिपा
और हम ढूँढते हैं
उसे इधर-उधर।
माँ सच बताना
नहीं तुम छिपाना
तुम माँ हो
या कोई जादूगर।