एनडीए ने जगदीप धनखड़ को उपराष्ट्रपति का उम्मीदवार बनाया

भाजपा ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित करके सियासी हलकों में हलचल मचा दी है। दरअसल, एनडीए की ओर से उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में अब तक धनखड़ के नाम पर चर्चा काफी कम थी। उन्हें प्रबल दावेदार तक नहीं माना जा रहा था। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर एनडीए ने धनखड़ पर दांव क्यों खेला? नड्डा ने अपने बयान में उन्हें किसान का बेटा बताकर किसानों को साधने की कोशिश की है या राजस्थान से ताल्लुक रखने वाले धनखड़ के बहाने राज्य में होने वाले विधानसभा चुनावों में समीकरण सेट करने की तैयारी है?जगदीप धनखड़ कानून, सियासत, सियासी दांव-पेच औऱ हर राजनीतिक दल में अपने संबंधों को कायम करने की महारत के लिए जाने जाते हैं। वह राजस्थान की जाट बिरादरी से ताल्लुक रखते हैं और उन्होंने राजस्थान में जाटों को आरक्षण दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। इस समुदाय में धनखड़ की काफी अच्छी पकड़ है।


भाजपा और एनडीए उपराष्ट्रपति पद के लिए प्रत्याशी किसान पुत्र श्री जगदीप धनखड़ जी को घोषित करती है।श्री जगदीप धनखड़ जी पश्चिम बंगाल के अभी गवर्नर हैं और लगभग तीन दशक तक सार्वजनिक जीवन में काम किया है।

उपराष्ट्रपति उम्मीदवार के लिए एनडीए ने जगदीप धनखड़ के नाम का ऐलान किया है, इसपर प्रधानमंत्री ने उन्हें बधाई दी है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि धनखड़ जी ने युवाओं के लिए काम किया है। वह विनम्रता के लिए जाने जाते हैं।उपराष्ट्रपति उम्मीदवार के लिए जगदीप धनखड़ के नाम का ऐलान करते हुए भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि वह किसान परिवार से आते हैं।उन्होंने देश सेवा में कोई कसर नहीं छोड़ी।

राष्ट्रपति चुनाव के साथ-साथ उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर भी सियासी गलियारों में चर्चाएं जोरों पर हैं।इस बीच भाजपा ने आज जगदीप धनखड़ को उपराष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार घोषित कर सभी को चौंका दिया है। जगदीप धनखड़ वर्तमान में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल हैं। उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में उनके नाम को भाजपा संसदीय पैनल द्वारा अंतिम रूप दिया गया।भाजपा संसदीय पैनल के सदस्यों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय मंत्री अमित शाह, नितिन गडकरी और राजनाथ सिंह सहित अन्य शामिल थे।जगदीप धनखड़ तीन दशक से अधिक समय से सार्वजनिक जीवन में हैं।1989 के लोकसभा चुनाव में झुंझुनू से सांसद चुने जाने के बाद उन्होंने सार्वजनिक जीवन में प्रवेश किया। इसके बाद, उन्होंने 1990 में संसदीय मामलों के राज्य मंत्री के रूप में भी कार्य किया। 1993 में, वे अजमेर जिले के किशनगढ़ निर्वाचन क्षेत्र से राजस्थान विधानसभा के लिए चुने गए। जुलाई 2019 में, उन्हें पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में नियुक्त किया गया था, जहां उन्होंने कड़ी मेहनत की और लोक कल्याण के मुद्दों पर प्रकाश डालते हुए एक पीपुल्स गवर्नर के रूप में अपनी पहचान बनाई।

उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने की आखिरी तारीख 19 जुलाई है और चुनाव 6 अगस्त को होना है, इससे पहले रामनाथ कोविंद और एम वेंकैया नायडू दोनों ने देश के दोनों सर्वोच्च संवैधानिक पदों पर आसानी से चुनाव जीता था। नायडू का कार्यकाल 10 अगस्त को समाप्त हो रहा है। एनडीए के राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू हैं जबकि विपक्ष के यशवंत सिन्हा हैं। चुनाव 18 जुलाई को और मतदान 21 जुलाई को होगा।


भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने एनडीए के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार का एलान करते वक्त जगदीप धनखड़ को किसान का बेटा कहकर संबोधित किया। राजनीतिक जानकारों की मानें तो इसके माध्यम से भाजपा किसानों को साधने की कोशिश कर सकती है। दरअसल, किसान आंदोलन के बाद किसानों का रुख भाजपा के प्रति सख्त बताया जा रहा है।हालांकि, पिछले दिनों पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजों पर इसका खास असर तो नहीं दिखा, लेकिन विपक्षी दल बार-बार इस मसले को उठाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में धनखड़ को किसान का बेटा बताकर भाजपा किसानों के प्रति अपनी नाराजगी कम करने की कोशिश कर सकती है।राजनीतिक जानकार यह भी कहते हैं कि धनखड़ के बहाने भाजपा राजस्थान की सत्ता पर काबिज होने की तैयारी कर सकती है। दरअसल, राजस्थान में वसुंधरा राजे गुट नाराज चल रहा है। वहीं, एनडीए के सहयोगी हनुमान बेनीवाल भी अग्निपथ योजना को लेकर भाजपा से नाराज नजर आए थे। ऐसे में आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा नए चेहरे पर दांव खेल सकती है, जिसके लिए पार्टी को सीधे तौर पर आम जनता के समर्थन की जरूरत है। ऐसे में धनखड़ का चेहरा भाजपा को फायदा पहुंचा सकता है।