इंडिया स्किल्स युवाओं की नई पहचान

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इंडिया स्किल्स युवाओं की नई पहचान
इंडिया स्किल्स युवाओं की नई पहचान

इंडिया स्किल्स युवाओं के कौशल को मिली एक नई पहचान। इंडियास्किल्स 2024 के अवसर पर, एनएसडीसी के सीईओ और एनएसडीसी इंटरनेशनल के एमडी वेद मणि तिवारी ने कहा कि, स्किल से जीतेंगे दुनिया यही हमारा संदेश है। इंडिया स्किल्स युवाओं की नई पहचान

समर्थ कुमार सक्सेना

नई दिल्ली/लखनऊ। स्किल से जीतेंगे दुनिया यह इंडियास्किल्स प्रतियोगिता की टैगलाइन है। इससे स्पष्ट है कि यदि आपके पास कोई कौशल है तो आपको आगे बढ़ने से कोई रोक नहीं सकता है। इस टैगलाइन को चरितार्थ कर रहे हैं इंडिया स्किल्स प्रतियोगिता में भाग लेने वाले समस्त प्रतिभागी। कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय के तत्वावधान में, राष्ट्रीय कौशल विकास निगम एनएसडीसी द्वारा यशोभूमि के कन्वेशन सेन्टर, द्वारका, नई दिल्ली में एक राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता इंडियास्किल्स 2024 का आयोजन किया जा रहा है। यह सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं है बल्कि देश के युवाओं का आत्मविश्वास बढ़ाकर उन्हें विश्व स्तर पर एक नई पहचान दिलाने वाला महाअभियान है। यशोभूमि में आयोजित सबसे बड़ी कौशल प्रतियोगिता में प्रतिभागियों का हौसला बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर लोग आ रहे हैं। दिल्ली के अलग-अलग स्कूलों और संस्थानों के छात्रों ने भी बड़ी संख्या में इंडियास्किल्स में भाग लिया है। इंडियास्किल्स प्रतियोगिता के विजेताओं को फ्रांस के ल्योन में वर्ल्डस्किल्स प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिलेगा।

इंडिया स्किल्स प्रतियोगिता देश के 30 से अधिक राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के 900 से अधिक छात्रों और 400 से अधिक इंडस्ट्री एक्सपर्ट को एक साथ लाने का एक बड़ा प्लेटफॉर्म दे रही है। प्रतिभागियों ने ड्रोन-फिल्म मेकिंग, टैक्सटाइल वीविंग, लेदर शू मेकिंग और प्रोस्थेटिक्स जैसे नौ प्रकार के एग्जीबिशन में भी भाग लिया है। इन सभी प्रतिभागियों को आईटीआई, एनएसटीआई, पॉलिटेक्निक, इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग, इंस्टीट्यूट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी में प्रशिक्षित होने का अवसर मिला है।

इंडियास्किल्स 2024 के अवसर पर, एनएसडीसी के सीईओ और एनएसडीसी इंटरनेशनल के एमडी वेद मणि तिवारी ने कहा कि, स्किल से जीतेंगे दुनिया यही हमारा संदेश है।वर्ल्डस्किल्स प्रतियोगिता में भारत का प्रदर्शन बहुत अच्छा हो रहा है। हमारे पिछले सभी संस्करणों में हिस्सा लेकर भारत 39वें स्थान से 11वें स्थान की ओर बढ़ चला है। यह दिखाता है कि जिस प्रकार से भारत हर क्षेत्र में तरक्की कर रहा है, स्किल्स में भी हम दुनिया से पीछे नहीं हैं। हमारे विजेता फ्रांस के ल्योन में पूरी दुनिया के सामने अपना हुनर दिखा सकें और अपना स्थान बना सकें। यह पूरी व्यवस्था पूरी तरह से निशुल्क है।

इंडियास्किल्स प्रतियोगिता में ओडिशा की रहने वाली रीना वाघा ने वेल्डिंग स्किल्स में अपनी प्रतिभा दिखाते हुए अपनी एक अलग पहचान बनाई है। रीना कहती हैं कि, वेल्डिंग की फील्ड में मुझे कुछ ऐसा करके दिखाना है जिससे समाज में मेरी एक अलग पहचान बन सके। मैंने अपने कठिन परिश्रम और लगन से इंडियास्किल्स का मंच हासिल किया है जो मेरे लिए बहुत ही गर्व की बात है। रीना की तरह ही, जम्मू कश्मीर में कुपवाड़ा जिले के रहने वाले फहीम जावेद ने भी इंडियास्किल्स प्रतियोगिता में सफलता की एक नई इबारत लिखी है। इंडियास्किल्स के मंच का उपयोग करते हुए फहीम ने कड़ी मेहनत और लगन से ग्राफिक डिज़ाइनिंग में अपने कौशल को निखारा है। फहीम अपनी सफलता का श्रेय अपनी माँ को देते हैं। फहीम कहते हैं कि ग्राफिक डिजाइनिंग एक बहुत व्यापक क्षेत्र है। इस क्षेत्र में मुझे बेहतर भविष्य बनाने का अवसर मिला है। ग्राफिक डिजाइनिंग की सबसे खास बात है कि जो भी हमारे मन में है, हम उसे पेपर या डिजिटल फार्म में वैसा ही बना सकते हैं।

इंडिया स्किल्स एक ऐसी प्रतियोगिता है जो युवाओं के सपनों को साकार कर उन्हें उज्ज्वल भविष्य की दिशा में आगे बढ़ाती है। देश के युवा विभिन्न ट्रेड्स में अपने कौशल का उपयोग करते हुए अपने सपनों को एक नई उड़ान दे रहे हैं। देश के युवा अपने भविष्य को लेकर बड़े-बड़े सपने देख रहे हैं जिन्हें पूरा करने के लिए एनएसडीसी हर सम्भव प्रयास कर रहा है। इंडिया स्किल्स प्रतियोगिता में भाग लेने वाले युवा पूरे देश के लिए एक प्रेरणा बन कर सामने आए हैं। आज एनएसडीसी ने रानी वाघा और फहीम जैसे अनेक युवाओं को इंडियास्किल्स का मंच देकर अपना भविष्य उज्ज्वल बनाने की एक नई राह दिखाई है। इंडिया स्किल्स युवाओं की नई पहचान