आजकल मंडी म दामाद खरीदय क परत हय..!

चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से …..

नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान


चतुरी चाचा ने प्रपंच का श्रीगणेश करते हुए कहा- आजु काल्हि बिटिया क बिहाव करवब सब ते कठिन हय। बिटिया वाले क दहेज मंडी म दामाद खरीदय क परत हय। दिखावा केरे चक्कर म शादी-ब्याह बड़ा महंगा होत जाय रहा। पहिले नगद नारायन अउ गाड़ी-गड्डा तय करत हयँ। फिरि वर पक्ष वाले महंगे कपड़ा अउ कीमती सामान केरी लम्बी लिस्ट थमावत हयँ। वहिके बादि कहत हयँ कि बारात केरा शाही स्वागत होय क चही। वर पक्ष का बिटिया द्याखय ते लैके बारात विदाई तलक लाख दो लाख रुपया बतौर नजर चही। कुलमिलाय क लरिका वाले बिटिया क बाप का नींबू क तिना निचोर लेत हयँ। बिटिया क हाथ पीले करयम न जाने कतने बाप कर्ज म डूब जात हयँ। कौनव क जमीन बेचयक परत हय। कौनव क खेती नाय तौ जेवर-जाटा गिरवी रक्खय क परत हय। सुरसा रूपी दहेज अउ दिखावा बिटियन ख़ातिन काल बनिगा हय। कम दहेज लावै प बिटियन का ससुरार म प्रताड़ित कीन जात हय। आखिर युहु कौनु रिश्ता आय? जिहिमा कौनिव मिठास नाइ रहत। यही सब कारन ते लोग घरमा बिटिया पैदा नाय हून दीन चाहत हयँ। समाज का दहेज अउ दिखावा पय विचार करय चही।


चतुरी चाचा अपने प्रपंच चबूतरे पर बड़ी गम्भीर मुद्रा में बैठे थे। कासिम चचा, मुंशीजी, ककुवा व बड़के दद्दा शादियों में बढ़ते दहेज और दिखावा पर खुसुर-पुसुर कर रहे थे। पुरई आज नदारत थे। वह अपनी बिटिया के लिए कहीं घर-वर देखने गए थे। पुरई दो साल से अपनी सुपुत्री की शादी के लिए परेशान हैं। हर जगह मामला दहेज की रकम पर अटक जाता है। वह अबतक तकरीबन 20 लड़के देख चुके हैं। आज भी सुबह कड़ी धूप और उमस भरी गर्मी थी। आसमान में सफेद बादल उमड़-घुमड़ रहे थे। आषाढ़ महीना तो सूखा-सूखा बीत गया। अब सावन की काली घटाओं और रिमझिम बारिश का इंतजार है। गांव के बच्चे ‘आबादी’ में कबड्डी खेलने रहे थे। आज बालक और बालिका टीम के मध्य भिड़ंत थी। लड़कियां लड़कों पर भारी पड़ रही थीं। चतुरी चाचा ने मेरे पहुंचते ही बतकही आरम्भ कर दी। उनका कहना था कि आजकल बेटी की शादी बड़ी महंगी हो गई है। दहेज और दिखावा बढ़ता ही जा रहा है। दहेज की मंडी लगी है। लोगों को अपनी बेटी के लिए दूल्हा खरीदना पड़ रहा है। इसीलिए कोई नहीं चाहता कि उसके घर में बेटी पैदा हो। समाज के लिए यह बड़ी घातक स्थिति है। इस पर सभी लोगों को विचार करना होगा।


ककुवा ने कहा- चतुरी भाई, दहेज क कुछु हाल न पूछव। जिनके बैठय ठउर नाइ, वोउ तिलक म कार माँगत हयँ। अब तौ लरिका नीलाम कीन जात हयँ। लरिका वाले बिटिया क पढ़ाई-लिखाई, गुन-ढंग द्यखतय नाइ। खाली दहेज क रकम पूछत हयँ। गिने-चुने परिवार बचे हयँ। जउन बिटिया, बिटिया क परिवार अउ बिटिया क शिक्षा-संस्कार द्याखत हयँ। उई बिटिया वालेन ते दहेज मंगतय नाइ। बिटिया पसन्द अवतय खन काहत हयँ कि तुमार जउन संकल्प होइ। वहिम बिहाव होय जाइ। भगवान केरी कृपा ते हमरे सबकुछ हय। बस, बढ़िया बहुरिया चही। मुदा, जादातर परिवार दहेज अउ दिखावा का तवज्जो देत हयँ। उनके इंसानियत नाम क कौनिव चीज नाइ बची हय। बिटिया वाले क जर्सी गाय समझत हयँ। इंजेक्शन लगाय दुहत हयँ। हमका द्याखव चार लरिकन बिहाव कीन। कौनेव ते एक पाई दहेज नाइ मांगा। जउन कुछु खुशी त दिहिन। उह लय लिहा। चारिव बहुरिया नीकी पावा। चारिव नातेदार बढ़िया मिलिगे। हमरे याक बिटिया रहय। वहुके ससुर हम ते दहेज नाय मांगिन रहय। हम अपनी खुशी ते तिलक म ढाई लाख रुपया अउ आल्टो कार दीन रहय। दहेज माँगब अउ दहेज ख़ातिन शादी न करब बड़ा खराब हय। दहेज लोभिन क्यार हुक्का-पानी बन्द कय देय क चही। वहिके दुआरे कोऊ अपनी बिटिया क रिश्ता लैके जाबय न करय। तबहें उनके होश ठिकाने लगिहैं। अरे! नीकी बिटिया मिलतय खन हंसी-खुशी ते बेटवा क्यार बिहाव कय डारव। बिटिया क बाप केरे दिहे तुमरे पूर परी। इह बात का सोचव।इसी बीच चंदू बिटिया परपंचियों के लिए जलपान लेकर आ गई। आज जलपान में कटहल के पकौड़े और तुलसी-अदरक वाली कड़क चाय थी। हम सबने कटहल के दो-दो स्वादिष्ट पकौड़े खाये। फिरि नल का ताजा पानी पीकर चाय का कुल्हड़ उठा लिया। चाय के साथ प्रपंच आगे बढ़ा।


मुंशीजी ने कहा- दहेज और दिखावा के मामले में सिर्फ लड़के वालों को ही दोषी माना जाना ठीक नहीं है। लड़की वाले भी दहेज और दिखावा करने में पीछे नहीं हैं। शादियों में फिजूलखर्ची बढ़ती ही जा रही है। वर पक्ष ही नहीं, बल्कि कन्या पक्ष भी झूठी शान के लिए लाखों रुपये बर्बाद करता है। निम्न मध्यम वर्ग के परिवार अमीर लोगों की नकल करने में लगे हैं। इसी चक्कर में शादियों का खर्चा बढ़ता ही जा रहा है। मध्यम वर्ग के लोग कर्ज लेकर या फिर अपनी सम्पत्ति बेचकर हाई-फाई शादी कर रहे हैं। तमाम लोग बेटियों की ही नहीं, बल्कि बेटों की शादी में भी कर्ज लेते हैं। वे लोग दिखावा करने के लिए अपनी जमीन बेच देते हैं। कुछ लोग अपनी खेती या फिर स्वर्ण-आभूषण गिरवी रख देते हैं। ऐसे में सबसे बुरा हाल साधारण परिवारों का है। उन्हें अपनी इज्जत बचानी मुश्किल हो रही है। झूठी शान बघारने में लाखों रुपये पानी की तरह बहाए जाते हैं। भोजन और नाश्ते में पचासों तरह की चीजें स्टॉल पर सजाई जाती हैं। लाइट, साउंड, सजावट, फोटोग्राफी, मनोरंजन में बेइंतिहा पैसा बर्बाद किया जाता है। अब तो गांव के लोग भी शहर के महंगे मैरिज लॉन या होटल में शादी कर रहे हैं। यह सब केवल अपने को बड़ा आदमी साबित करने के लिए होता है। भले ही उनके सिर पर भारी कर्ज हो जाए। दहेज से बड़ा दानव दिखावा है। शादियों में झूठी शान के लिए लाखों रुपए बर्बाद करने के बजाय वही रकम वर-वधू के नाम ‘एफडी’ कर देनी चाहिए।


कासिम चचा ने कहा- शादियों में बढ़ते दहेज और दिखावा के पीछे समाज है। वर पक्ष और कन्या पक्ष के कुछ रिश्तेदार, खानदान के कुछ लोग और पड़ोसी इसके जिम्मेदार हैं। अगर कोई शख्स अपने बेटे या बिटिया की शादी सादगी से करना भी चाहे तो ये लोग करने नहीं देते हैं। ये लोग हर पिता को झूठी शान दिखाने पर मजबूर करते हैं। शादियों में जीजा, फूफा, मामा व मौसा का बड़ा अहम रोल रहता है। तमाम परिवारों में ये लोग मालिक की भूमिका में रहते हैं। यही लोग दहेज की रकम बढ़वाते हैं। कई बार यही लोग सही रिश्ता भी नहीं होने देते हैं। ये लोग शादियों में जमकर फिजूलखर्ची करवाते हैं। शादी से जुड़े हर कार्यक्रम में अपनी टांग अड़ा देते हैं। खासकर वर पक्ष के जीजा, फूफा, मामा, मौसा अपनी मनमानी करते हैं। यहां तक कि ये लोग ही लड़की पसन्द करते हैं। इनको लड़के या लड़के के माता-पिता की पसन्द/नापसन्द से कोई मतलब नहीं रहता है। इनको हर मामले में अपनी बात मनवाने की जिद रहती है। इनकी बात मानने के लिए लड़के के घर वाले मजबूर होते हैं। मैं तो कहता हूं कि शादी-ब्याह हर परिवार को अपने हिसाब से करना चाहिए। अपनी पसन्द का ही रिश्ता करना चाहिए। ऐसे नातेदारों की पसन्द का रिश्ता कभी नहीं करना चाहिए। सबसे पहले अपनी आर्थिक स्थिति देखनी चाहिए। उसके अनुरूप शादी में खर्च करना चाहिए। शादी में दिखावे से बिल्कुल दूर रहना चाहिए।


बड़के दद्दा ने विषय परिवर्तन करते हुए कहा- कल प्रधानमंत्री ने यूपी में बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे का उदघाटन किया है। विधानसभा चुनाव के पहले मोदी ने पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का शुभारंभ किया था। योगी महाराज उत्तर प्रदेश में कई एक्सप्रेस-वे निर्मित करवा रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने जालौन के उरई तहसील के कैथेरी गांव में विगत 29 फरवरी, 2020 को बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे का शिलान्यास किया गया था। यह एक्सप्रेस-वे 36 महीने में बनकर तैयार होना था। परन्तु, मुख्यमंत्री योगी ने इसे 28 महीने के भीतर बनवा डाला। इसकी कुल लंबाई 296 किलोमीटर है। यह लगभग 14,850 करोड़ की लागत से बना है। इसको भविष्य में छह लेन तक विस्तारित किया जा सकेगा। यह चित्रकूट के भरतकूप से चलकर इटावा के कुदरैल में खत्म होता है। यह इटावा में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे से जुड़ जाता है। बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे सात जिलों चित्रकूट, बांदा, महोबा, हमीरपुर, जालौन, औरैया व इटावा से गुजरता है। योगी महाराज ने यूपी के चतुर्दिक विकास का जो रोड मैप बना रखा है। उसमें कानून व्यवस्था, गरीब कल्याण, एक्सप्रेस-वे और एयरपोर्ट को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। सच में, अब यूपी बदल रहा है। उत्तम प्रदेश बन रहा है।


मैंने कोरोना अपडेट देते हुए प्रपंचियों को बताया कि विश्व में अब तक 56 करोड़ 66 हजार से अधिक लोग कोरोना संक्रमित हो चुके हैं। इनमें 63 लाख 86 हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इसी तरह भारत में अब तक चार करोड़ 37 लाख से ज्यादा लोग कोरोना की चपेट में आ चुके हैं। देश में अब तक पांच लाख 25 हजार से अधिक लोग बेमौत मारे जा चुके हैं। भारत में कोरोना वैक्सीन की 200 करोड़ से अधिक डोज लग चुकी हैं। देश की 92.5 करोड़ आबादी को कोरोना के दोनों टीके लग चुके हैं। भारत में टीकाकरण अभियान अंतिम चरण में है। बूस्टर डोज भी बड़ी तेजी से लगाने का कार्य हो रहा है। भारत ने मुफ्त टीकाकरण की एक मिसाल कायम की है।अंत में चतुरी चाचा ने सबको सावन के पहले सोमवार की बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। इसी के साथ आज का प्रपंच समाप्त हो गया। मैं अगले रविवार को चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे पर होने वाली बेबाक बतकही के साथ फिर हाजिर रहूँगा। तबतक के लिए पँचव राम-राम!

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