करुणा और ममता का पर्याय है माँ

माँ एक भाव है मातृत्व का, प्रेम और वात्सल्य का, त्याग का और यही भाव उसे विधाता बनाता है। मां विधाता की रची इस दुनिया को फिर से, अपने ढंग से रचने वाली विधाता है। मां सपने बुनती है और यह दुनिया उसी के सपनों को जीती है और भोगती है। मां जीना सिखाती है। पहली किलकारी से लेकर आखिरी सांस तक मां अपनी संतान का साथ नहीं छोड़ती। मां पास रहे या न रहे मां का प्यार दुलार, मां के दिये संस्कार जीवन भर साथ रहते हैं। मां ही अपनी संतानों के भविष्य का निर्माण करती हैं।

माँ शब्द में संपूर्ण सृष्टि निवास है, माँ संवेदना है भावना है एहसास है।माँ शब्द में आत्मीयता एवं मिठास है,माँ के आंचल में संपूर्ण संसार है।
माँ प्रेम करुणा और ममता का पर्याय है माँ धरती पर जीवन का आधार है।माँ शब्द में सारी दुनिया है बसती माँ खून से सिंच पैदा करती संतान है।
माँ की एक दुआ जिंदगी बना देगी खुद रोएगी मगर तुम्हें हंसा देगी।कभी भूल से भी ना माँ को रुलाना एक छोटी सी गलती पूरा अर्श हिला देगी।

माँ-माँ वह अलौकिक शब्द है, जिसके स्मरण मात्र से ही रोम-रोम पुलकित हो उठता है, हृदय में भावनाओं का अनहद ज्वार स्वतः उमड़ पड़ता है और मनोः-मस्तिष्क स्मृतियों के अथाह समुद्र में डूब जाता है। माँ वो अमोघ मंत्र है, जिसके उच्चारण मात्र से ही हर पीड़ा का नाश हो जाता है। माँ की ममता और उसके आंचल की महिमा को शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता है, उसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है, जिसने आपको और आपके परिवार को आदर्श संस्कार दिए। उनके दिए गए संस्कार ही मेरी दृष्टि में आपकी मूल थाती है। जो हर माँ की मूल पहचान होती है। हर संतान अपनी माँ से ही संस्कार पाता है। लेकिन मेरी दृष्टि में संस्कार के साथ-साथ शक्ति भी माँ ही देती है। इसलिए हमारे देश में माँ को शक्ति का स्वारूपा माना गया है और वेदों में माँ को सर्वप्रथम पूज्यनीय कहा गया है। श्रीमद् भगवद् पुराण में उल्लेख है कि माता की सेवा से मिला आशीष सात जन्मों के कष्टों व पापों को दूर करता है और उसकी भावनात्मक शक्ति संतान के लिए सुरक्षा कवच का काम करती है। पूर्व राष्ट्रपति डॉ0 ए0 पी0 जे0 अब्दुल कलाम ने माँ की महिमा को उजागर करते हुए कहा है कि जब मैं पैदा हुआ, इस दुनिया में आया, वो एकमात्र ऐसा दिन था मेरे जीवन का जब मैं रो रहा था और मेरी माँ के चेहरे पर एक सन्तोषजनक मुस्कान थी। एक माँ हमारी भावनाओं के साथ कितनी खूबी से जुड़ी होती है ये समझाने के लिए उपरोक्त पंक्तियां अपने आप में सम्पूर्ण हैं।

माँ प्राण है, माँ शक्ति है, माँ ऊर्जा है,माँ प्रेम, करुणा और ममता का पर्याय है। माँ केवल जन्मदात्री ही नहीं जीवन निर्मात्री भी है। माँ धरती पर जीवन के विकास का आधार है। माँ ने ही अपने हाथों से इस दुनिया का ताना-बाना बुना है। सभ्यता के विकास क्रम में आदिमकाल से लेकर आधुनिककाल तक इंसानों के आकार-प्रकार में, रहन-सहन में, सोच-विचार, मस्तिष्क में लगातार बदलाव हुए। लेकिन मातृत्व के भाव में बदलाव नहीं आया। उस आदिमयुग में भी मां, मां ही थी। तब भी वह अपने बच्चों को जन्म देकर उनका पालन-पोषण करती थीं। उन्हें अपने अस्तित्व की रक्षा करना सिखाती थी। आज के इस आधुनिक युग में भी मां वैसी ही है। माँ नहीं बदली।

एक शिशु का जब जन्म होता है, तो उसका पहला रिश्ता मां से होता है। एक माँ शिशु को पूरे 9 माह अपनी कोख में रखने के बाद असहनीय पीड़ा सहते हुए उसे जन्म देती है और इस दुनिया में लाती है। इन नौ महीनों में शिशु और माँ के बीच एक अदृश्य प्यार भरा गहरा रिश्ता बन जाता है। यह रिश्ता शिशु के जन्म के बाद साकार होता है और जीवनपर्यन्त बना रहता है। माँ और बच्चे का रिश्ता इतना प्रगाढ़ और प्रेम से भरा होता है, कि बच्चे को जरा ही तकलीफ होने पर भी माँ बेचैन हो उठती है। वहीं तकलीफ के समय बच्चा भी माँ को ही याद करता है। माँ का दुलार और प्यार भरी पुचकार ही बच्चे के लिए दवा का कार्य करती है। इसलिए ही ममता और स्नेह के इस रिश्ते को संसार का खूबसूरत रिश्ता कहा जाता है। दुनिया का कोई भी रिश्ता इतना मर्मस्पर्शी नहीं हो सकता। डेविट टलमेज ने कटू सत्य को उजागर किया है कि माँ एक ऐसा बैंक हैं जहाँ हम अपने चोटों और परेशानियों को जमा कर के रखते हैं।

माँ तो जन्नत का फूल है प्यार करना उसका उसूल है, दुनिया की मोहब्बत फिजूल है माँ की हर दुआ कबूल है, माँ को नाराज करना इंसान तेरी भूल है, मां के कदमों की मिट्टी जन्नत की धूल है।माँ के बिना दुनिया की हर चीज कोरी है दुनिया का सबसे सुंदर संगीत माँ तेरी लोरी है।

हर एक के जीवन में माँ एक अनमोल होती है जिसके बारे में शब्दों से बयाँ नहीं किया जा सकता है। ऐसा कहा जाता है कि भगवान हर किसी के साथ नहीं रह सकता इसलिए उसने माँ को बनाया। एक माँ हमारे जीवन की हर छोटी बड़ी जरूरतों का ध्यान रखने वाली और उन्हें पूरा करने वाली देवदूत होती है। कहने को वह इंसान होती है, लेकिन भगवान से कम नहीं होती। वह ही मन्दिर है, वह ही पूजा है और वह ही तीर्थ है। तभी ई. लेगोव ने कहा है कि इस धरती पर मां ही ऐसी देवी है जिसका कोई नास्तिक नहीं। यही कारण है कि समूची दुनिया में मां से बढ़कर कोई इंसानी रिश्ता नहीं है। वह सम्पूर्ण गुणों से युक्त है, गंभीरता में समुद्र और धैर्य में हिमालय के समान है। उसका आशीर्वाद वरदान है। जरा कभी मां के पास बैठो, उसकी सुनो, उसको देखो, उसकी बात मानो। उसका आशीर्वाद लेकर, उसके दर्शन करके निकलो। फिर देखो, जो चाहोगे मिलेगा- सुख, शांति, शोहरत और कामयाबी। ध्यान रहे, मां का दिल दुखाने का मतलब ईश्वर का अपमान है।

अन्तर्राष्ट्रीय मातृत्व दिवस सम्पूर्ण मातृ-शक्ति को समर्पित एक महत्वपूर्ण दिवस है, जिसका ममत्व एवं त्याग घर ही नहीं, सबके घट को उजालों से भर देता है। माँ का त्याग, बलिदान, ममत्व एवं समर्पण अपनी संतान के लिये इतना विराट है कि पूरी जिंदगी भी समर्पित कर दी जाए तो मां के ऋण से उऋण नहीं हुआ जा सकता है। संतान के लालन-पालन के लिए हर दुख का सामना बिना किसी शिकायत के करने वाली मां के साथ बिताये दिन सभी के मन में आजीवन सुखद व मधुर स्मृति के रूप में सुरक्षित रहते हैं।

मैं अपने छोटे मुख से कैसे करूँ तेरा गुणगान,
माँ तेरी ममता में फीका सा लगता है भगवान…

माता कौशल्या के घर में जन्म राम ने पाया,
ठुमक-ठुमक आँगन में चलकर सबका हृदय जुड़ाया,
पुत्र प्रेम में थे निर्मगन कौशल्या माँ के प्राण,
माँ तेरी ममता में फीका सा लगता है भगवान…

दे मातृत्व देवकी को यशोदा की गोद सुहाई,
ले लकुटी वन-वन भटके गोचारण कियो कन्हाई,
सारे ब्रजमंडल में गूँजी थी वंशी की तान,
माँ तेरी ममता में फीका सा लगता है भगवान…

तेरी समता में तू ही है मिले न उपमा कोई,
तू न कभी निज सुत से रूठी मृदुता अमित समोई,
लाड़-प्यार से सदा सिखाया तूने सच्चा ज्ञान,
माँ तेरी ममता में फीका-सा लगता भगवान…

कभी न विचलित हुई रही सेवा में भूखी प्यासी,
समझ पुत्र को रुग्ण मनौती मानी रही उपासी,
प्रेमामृत नित पिला पिलाकर किया सतत कल्याण,
माँ तेरी समता में फीका-सा लगता भगवान…

संसार महान् व्यक्तियों के बिना रह सकता है, लेकिन माँ के बिना रहना एक अभिशाप की तरह है। इसलिये संसार माँ का महिमामंडन करता है,उसका गुणगान करता है,माँ के लिये मदर्स डे,मातृ दिवस या माताओं का दिन चाहे जिस नाम से पुकारें दिन निर्धारित है। अमेरिका में मदर्स डे की शुरुआत 20वीं शताब्दी के आरंभ के दौर में हुई। विश्व के विभिन्न भागों में यह अलग-अलग दिन मनाया जाता है। मदर्ड डे का इतिहास करीब 400 वर्ष पुराना है। प्राचीन ग्रीक और रोमन इतिहास में मदर्स डे मनाने का उल्लेख है। भारतीय संस्कृति में माँ के प्रति लोगों में अगाध श्रद्धा रही हैं, लेकिन आज आधुनिक दौर में जिस तरह से मदर्स डे मनाया जा रहा है, उसका इतिहास भारत में बहुत पुराना नहीं है। इसके बावजूद दो-तीन दशक से भी कम समय में भारत में मदर्स डे काफी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। मातृ दिवस-समाज में माताओं के प्रभाव व सम्मान का उत्सव है। मां शब्द में संपूर्ण सृष्टि का बोध होता है। मां के शब्द में वह आत्मीयता एवं मिठास छिपी हुई होती है, जो अन्य किन्हीं शब्दों में नहीं होती। मां नाम है संवेदना, भावना और अहसास का। मां के आगे सभी रिश्ते बौने पड़ जाते हैं। मातृत्व की छाया में मां न केवल अपने बच्चों को सहेजती है बल्कि आवश्यकता पड़ने पर उसका सहारा बन जाती है। समाज में मां के ऐसे उदाहरणों की कमी नहीं है, जिन्होंने अकेले ही अपने बच्चों की जिम्मेदारी निभाई। मां रूपी सूरज चरेवैति-चरेवैति का आह्वान है। उसी से तेजस्विता एवं व्यक्तित्व की आभा निखरती है। उसका ताप मन की उम्मीदों को कभी जंग नहीं लगने देता। उसका हर संकल्प मुकाम का अन्तिम चरण होता है। मातृ दिवस सभी माताओं का सम्मान करने के लिए मनाया जाता है। एक बच्चे की परवरिश करने में माताओं द्वारा सहन की जानें वालीं कठिनाइयों के लिये आभार व्यक्त करने के लिये यह दिन मनाया जाता है। इस दिन लोग अपनी माँ को ग्रीटिंग कार्ड और उपहार देते हैं। सभी प्रकार के प्रेम का आदि उद्गम स्थल मातृत्व है और प्रेम के सभी रूप इसी मातृत्व में समाहित हो जाते हैं। प्रेम एक मधुर,गहन,अपूर्व अनुभूति है पर शिशु के प्रति माँ का प्रेम एक स्वर्गीय अनुभूति है। [/Responsivevoice]माँ