मुख्यमंत्री ने वन्यजीव रेस्क्यू सेण्टरों का किया शिलान्यास

राजू यादव

मुख्यमंत्री ने उ0प्र0 राज्य वन्यजीव बोर्ड की 13वीं बैठक की अध्यक्षता की।मुख्यमंत्री ने 04 वन्यजीव रेस्क्यू सेण्टरों का शिलान्यास किया।जनपद चित्रकूट स्थित रानीपुर वन्यजीव विहार को टाइगर रिजर्व के रूप में विकसित किया जाए, यह प्रदेश का चौथा टाइगर रिजर्व होगा।प्रदेश में ‘डॉल्फिन पार्क’ की स्थापना की कार्ययोजना तैयार की जाये।वन्यजीव रेस्क्यू सेण्टर बहिलपुरवा चित्रकूट वन प्रभाग, हस्तिनापुर मेरठ वन प्रभाग, गोपालपुर पीलीभीत टाइगररिजर्व तथा मधवलिया महराजगंज में स्थापित किये जाएंगेलखनऊ के कुकरैल वन क्षेत्र में नाइट सफारी और अत्याधुनिक चिड़ियाघर का विकास कराया जाना है, वन, नगर विकास, आवासएवं लोक निर्माण विभाग मिलकर कार्ययोजना तैयार करें। ‘एक जनपद-एक गन्तव्य ’ योजना के अन्तर्गत हर जनपद में ईको पर्यटन के अनुकूल स्थलों परपर्यटन सुविधाओं को विकसित किया जाये।स्थानीय और योग्य युवाओं को चयनित कर ‘नेचर गाइड’ के रूप में प्रशिक्षण और यूनीफॉर्म उपलब्ध करायी जाये।पर्यटकों को ईको पर्यटन स्थलों की ओर आकर्षित करने के लिए पर्यटन एवं संस्कृति विभाग कार्ययोजना बनायें, टूर ऑपरेटर्स को इससे जोड़ा जाये।वन्यजीवों के रेस्क्यू में संवेदनशीलता के साथ मानकों का पूरा ध्यान रखा जाये।आगामी माह में आयोजित होने वाले ‘वन महोत्सव’ की सभी तैयारियां समय से पूरी कर ली जायें।गंगा जी के तटवर्ती क्षेत्रों में जैविक और प्राकृतिक ढंग से वानकी के कार्याें को आगे बढ़ाया जाना चाहिए।बैठक में विभिन्न जनपदों में वन्य क्षेत्रों में जल जीवन मिशन की विविध परियोजनाओं, पेयजल योजनाओं, ऑप्टिकल फाइबर बिछाने तथा वन क्षेत्रों से गुजरने वाली सड़कों के चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण के प्रस्ताव अनुमोदित।


लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश राज्य वन्यजीव बोर्ड की 13वीं बैठक की अध्यक्षता की। इस अवसर पर उन्होंने राज्य में स्थापित किये जाने वाले 04 वन्यजीव रेस्क्यू सेण्टरों का शिलान्यास किया। यह रेस्क्यू सेण्टर बहिलपुरवा चित्रकूट वन प्रभाग, हस्तिनापुर मेरठ वन प्रभाग, गोपालपुर पीलीभीत टाइगर रिजर्व तथा मधवलिया महराजगंज में स्थापित किये जाएंगे।मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि शिलान्यास किये जा रहे रेस्क्यू सेण्टरों का निर्माण कार्य 02 वर्ष में पूर्ण कर लिया जाए। निर्माण कार्य पूरी पारदर्शिता के साथ समयबद्ध ढंग से मानकों के अनुसार कराया जाये। निर्माण कार्य की जिम्मेदारी सक्षम, बेहतर कार्यशैली और अच्छे रिकॉर्ड वाली संस्थाओं को दी जाए। जनपद चित्रकूट स्थित रानीपुर वन्यजीव विहार को टाइगर रिजर्व के रूप में विकसित किया जाए। केन-बेतवा लिंक परियोजना के कारण मध्य प्रदेश राज्य के पन्ना टाइगर रिजर्व में जल भराव की स्थिति बनेगी। इससे पन्ना टाइगर रिजर्व के बाघों का मूवमेन्ट चित्रकूट स्थित रानीपुर वन्यजीव विहार की ओर होगा। प्रदेश के पास रानीपुर वन्यजीव विहार को टाइगर रिजर्व के रूप में विकसित करने का यह अच्छा अवसर है। उन्होंने रानीपुर टाइगर रिजर्व के विकास के लिए आवश्यक कार्यवाही किये जाने के निर्देश देते हुए कहा कि 630 वर्ग कि0मी0 क्षेत्रफल में विकसित किया जाने वाला यह प्रदेश का चौथा टाइगर रिजर्व होगा।


नमामि गंगे परियोजना के माध्यम से गंगा जी सहित सहायक नदियां अविरल और निर्मल हो रही हैं। इससे गंगा जी में डॉल्फिन की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोत्तरी हुई है। इसके दृष्टिगत प्रदेश में एक ‘डॉल्फिन पार्क’ की स्थापना के लिए कार्ययोजना तैयार की जाये।जनपद लखनऊ के कुकरैल वन क्षेत्र में नाइट सफारी और अत्याधुनिक चिड़ियाघर का विकास कराया जाना है। वन, नगर विकास, आवास एवं लोक निर्माण विभाग द्वारा मिलकर इसकी कार्ययोजना तैयार की जाये। यह नाइट सफारी प्रदेश का ही नहीं, देश का पहला नाइट सफारी होगा। इस नाइट सफारी और अत्याधुनिक चिड़ियाघर से देश के प्रकृति, वन्यजीव प्रेमियों तथा पर्यटकों को एक आकर्षक गन्तव्य उपलब्ध होगा। उन्होंने इस सम्बन्ध में प्राथमिकता पर कार्यवाही किये जाने के निर्देश दिये।

चार नवीन वन्य जीव रेस्क्यू सेंटर का शिलान्यास

● मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को प्रदेश में चार नवीन वन्य जीव रेस्क्यू सेंटर का शिलान्यास किया। यह रेस्क्यू सेंटर हस्तिनापुर (मेरठ वन प्रभाग), मधवलिया (महराजगंज) बहिलपुरवा (चित्रकूट वन प्रभाग) गोपालपुर (पीलीभीत टाइगर रिजर्व) में स्थापित होंगे।

● रेस्क्यू सेंटर का निर्माण कार्य आगामी 02 वर्ष में पूर्ण कर लिया जाए। निर्माण कार्य की जिम्मेदारी देते एजेंसी की क्षमता, कार्यशैली और पिछले रिकॉर्ड का ध्यान जरूर रखें। निर्माण गुणवत्तापूर्ण हो और समयबद्ध ढंग से पूर्ण कराया जाना सुनिश्चित करें।


उत्तर प्रदेश में ईको पर्यटन की अपार सम्भावनाएं हैं। इन सम्भावनाओं को व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाया जाना चाहिए। इसके लिए ‘एक जनपद-एक गन्तव्य’ (One District One Destination) योजना के अन्तर्गत हर जनपद में ईको पर्यटन के अनुकूल गन्तव्य स्थलों का चयन कर वहां पर्यटन सुविधाओं को विकसित किया जाये। इसके लिए पर्यटन, वन और वन्यजीव विभाग पारस्परिक समन्वय के साथ कार्य करें। पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए इन स्थलों का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाये। उन्होंने कहा कि अब तक प्रदेश के 56 जनपदों में ईको पर्यटन स्थलों का चयन किया जा चुका है। शेष जनपदों में भी यथाशीघ्र चयन का कार्य पूर्ण कर लिया जाये। उन्होंने कहा कि यह योजना प्रदेश में पर्यटन क्षेत्र को नई ऊर्जा देगी।


ईको पर्यटन, वन्यजीव संरक्षण तथा अन्य वानिकी गतिविधियों में स्थानीय लोगों को शामिल किया जाना चाहिए। ईको पर्यटन गतिविधियों से रोजगार सजृन पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि इसके लिए स्थानीय और योग्य युवाओं को चयनित कर ‘नेचर गाइड’ के रूप में प्रशिक्षण और यूनीफॉर्म उपलब्ध करायी जाये। पर्यटक ईको पर्यटन स्थलों की ओर आकर्षित हों, इसके लिए पर्यटन एवं संस्कृति विभाग मिलकर कार्ययोजना बनायें। टूर ऑपरेटर्स को भी इससे जोड़ा जाए। मानव-वन्यजीव संघर्ष न्यूनीकरण के लिए आधुनिक तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है। ड्रोन आदि उपकरणों के इस्तेमाल से इसमें मदद मिल रही है। मानव-वन्यजीव संघर्ष को न्यूनतम करने पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि वन्यजीवों के रेस्क्यू में संवेदनशीलता के साथ-साथ मानकों का पूरा ध्यान रखा जाये। नदियों की डेªजिंग से वन एवं वन्यजीवों को भी लाभ होता है। ड्रेजिंग के माध्यम से नदियों का चैनलाइजेशन करने से जन-धन हानि रुकती है। नदी का संरक्षण होता है। बरसात के दिनों में जंगलों में जल-भराव नहीं होता है। इससे पेड़ एवं वन्य जीवांे दोनों का बचाव होता है। उन्होंने कहा कि जंगल के करीब की नदियों की डेªजिंग करायी जानी चाहिए।


जनपद संतकबीरनगर की बखिरा झील ईको टूरिज्म की अपार सम्भावनाओं से युक्त है। इस स्थल के विकास से स्थानीय स्तर पर व्यापक पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे। उन्होंने कहा कि झील के ईको पर्यटन स्थल के रूप में विकास के लिए कार्ययोजना तैयार की जाए। राज्य सरकार के निरन्तर प्रयासों से प्रदेश में ‘ग्रीन कवर’ बढ़ा है। उन्होंने निर्देश दिये कि आगामी माह में आयोजित किये जाने वाले ‘वन महोत्सव’ के भव्य आयोजन के लिए सभी तैयारियां समय से पूरी कर ली जायें। वन महोत्सव के कार्यक्रम में जन सहभागिता सुनिश्चित की जाए। गंगा जी के तटवर्ती क्षेत्रों में जैविक और प्राकृतिक ढंग से वानकी के कार्याें को आगे बढ़ाया जाना चाहिए।प्रदेश के विभिन्न जनपदों में वन्य क्षेत्रों में जल जीवन मिशन की विविध परियोजनाओं, पेयजल योजनाओं, ऑप्टिकल फाइबर बिछाने तथा वन क्षेत्रों से गुजरने वाली सड़कों के चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण के प्रस्ताव को अनुमोदित किया गया है। इन कार्याें को तेजी के साथ पूरा कराया जाये। सम्बन्धित अधिकारियों द्वारा इन कार्याें का नियमित अनुश्रवण किया जाये।इस अवसर पर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अरुण कुमार सक्सेना, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री स0पी0 गोयल,अपर मुख्य सचिव पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मनोज सिंह, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री एवं सूचना संजय प्रसाद, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं विभागाध्यक्ष ममता संजीव दुबे सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं राज्य वन्यजीव बोर्ड के सदस्य उपस्थित थे।

● केन-बेतवा लिंक परियोजना के फलस्वरूप पन्ना टाइगर रिजर्व में जलभराव की स्थिति बनेगी, जिसके कारण बाघों का सहज मूवमेंट चित्रकूट की ओर होगा। यह उत्तर प्रदेश के लिए एक अच्छा अवसर है। ऐसे में जनपद चित्रकूट अंतर्गत रानीपुर सेंच्युरी को रानीपुर टाइगर रिजर्व के रूप में विकसित किया जाए। 630 वर्ग किलोमीटर का यह टाइगर रिजर्व प्रदेश चौथा टाइगर रिजर्व होगा। इस संबंध में आवश्यक कार्यवाही की जाए।

● जनपद लखनऊ अंतर्गत कुकरैल क्षेत्र में नाइट सफारी और आधुनिक चिड़ियाघर का विकास कराया जाना चाहिए। इस संबंध में वन्य जीव विभाग, नगर विकास, पीडब्ल्यूडी और आवास विभाग मिलकर अच्छी कार्ययोजना तैयार करें। यह नाइट सफारी और चिड़ियाघर पूरे देश के प्रकृति और वन्य जीव प्रेमियों के लिए एक आकर्षक गंतव्य के रूप में उपलब्ध होगा। इस संबंध में प्राथमिकता के साथ कार्यवाही की जाए।

● यह सुखद है कि नमामि गंगे परियोजना के माध्यम से अवरिल और निर्मल हो रहीं गंगा नदी में डॉल्फिन की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में प्रदेश में एक “डॉल्फिन पार्क” की स्थापना के लिए कार्ययोजना तैयार की जाए।

● ईको टूरिज्म की संभावनाओं को प्रोत्साहित करने के लिए “एक जिला-एक गंतव्य” (one district one destination) योजनांतर्गत हर जिले में अनुकूल गंतव्य स्थलों का चयन कर वहां पर्यटन सुविधाओं को बेहतर बनाया जाए। पर्यटन, वन और वन्य जीव विभाग परस्पर समन्वय के इन स्थलों का व्यापक प्रचार-प्रसार कराएं। अब तक 56 जिलों में ऐसे पर्यटन स्थल चयनित हो चुके हैं, यथाशीघ्र शेष जनपदों में भी चयन का कार्य पूर्ण कर लिया जाए। यह योजना प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र को नई ऊर्जा देने वाली होगी।

● ईको पर्यटन, वन्य जीव एवं अन्य वानिकी कार्यों में स्थानीय लोगों को शामिल किए जाने के लिए ‘नेचर गाइड’ बेहतर विकल्प हो सकते हैं। योग्य युवाओं का चयन कर इनका बेहतर प्रशिक्षण कराया जाए। प्रशिक्षण अवधि में इन्हें उचित मानदेय भी दिया जाना चाहिए।

● हाल के दिनों में मानव-वन्य जीव संघर्ष की घटनाओं में बढ़ोतरी होती हुई देखी जा रही है। इसे न्यूनतम किया जाना जरूरी है। वन्य जीवों के रेस्क्यू में संवेदनशीलता के साथ मानकों का पूरा ध्यान रखा जाए।

● नियोजित प्रयासों से प्रदेश में बाघों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। वर्ष 2014 में कुल 117 बाघ प्रदेश में थे जो 2018 में बढ़कर 173 हो गए हैं। वर्तमान में इनकी संख्या 200 करीब होने की संभावना है।

● बरसात के दिनों में जंगलों में जल भराव न हो। इससे वृक्षों को काफी नुकसान होता है। इस सम्बंध में आवश्यक प्रयास किया जाना अपेक्षित है। जंगल के करीब की नदियों की ड्रेजिंग कराई जानी चाहिए।

● जनपद संतकबीर नगर का बखिरा झील ईको टूरिज्म की अपार संभावनाओं को समेटे हुए है। यहां के विकास के लिए बेहतर कार्ययोजना तैयार करें। यह प्रयास स्थानीय स्तर पर रोजगार की नवीन संभावनाओं को भी जन्म देने वाला होगा।

● गंगा के तटवर्ती क्षेत्रों में जैविक और प्राकृतिक ढंग से वानिकी के कार्यों को आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

● प्रदेश के विभिन्न जनपदों के अंतर्गत वन्य क्षेत्रों में जल जीवन मिशन की विविध परियोजनाएं, पेयजल,ऑप्टीकल फाइबर बिछाए जाने, सड़क चौड़ीकरण आदि के कई कार्यों को सहमति प्रदान की गई। इन कार्यों को तेजी के साथ पूरा कराया जाए। अधिकारीगण परियोजनाओं का नियमित अनुश्रवण करें।

● सतत प्रयासों से प्रदेश में “ग्रीन कवर” बढ़ा है। आगामी माह में “वन महोत्सव” के भव्य आयोजन के लिए सभी तैयारियां समय से पूरी कर ली जाएं। [/Responsivevoice]