राजनीति के खिलाड़ी ब्रजेश पाठक

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ब्राह्मण राजनीति के खिलाड़ी हैं ब्रजेश पाठक
ब्राह्मण राजनीति के खिलाड़ी हैं ब्रजेश पाठक
 राजू यादव
राजू यादव

ब्रजेश पाठक का जीवन बड़ा सादा व उच्च विचार वाला है, वह शुद्ध शाकाहारी हैं उनमे कोई बुरी लत नहीं है। सुबह नियमित रूप से योग-प्राणायाम करते हैं, जिसके बाद दिनभर की व्यस्त जिंदगी शुरू हो जाती है। फरियादियों की समस्याएं हल कराने में वह सुख महसूस करते हैं तथा बड़ों का आशीर्वाद मिलता है तो नई ऊर्जा भर जाती है।ब्रजेश पाठक भारतीय जनता पार्टी में अनमोल रत्न के रूप में उभरे हैं। इस उपलब्धि को कायम रखना उनकी भारी जिम्मेदारी है। उन्होंने यदि आम नेताओं की बदनाम लीक से हटकर काम किया तो जनता में वह बेजोड़ एवं अविस्मरणीय हो जाएंगे। विरले ही होते है जो कि अभियान रहित,संवेदनशील ह्रदय वाले,शरीफ लोगों की तरफ ध्यान देने वाले, स्वयं के लाभ की जगह जनहित की सोचने वाले, सरल, मिलनसार-मुझे भी ऐसे सभी गुण ब्रजेश पाठक जी में दिखे साथ ही एक अलग तरह की प्रज्ञा भी उनमें मौजूद है । राजनीति के खिलाड़ी ब्रजेश पाठक

भारतीय जनता पार्टी में मोदी युग की शुरुआत के बाद कई बदलाव देखने को मिल रहे हैं। भाजपा में पिछले करीब एक दशक की राजनीति पर नजर दौड़ाई जाए तो यह कहा जा सकता है कि जहां कभी पार्टी की विचारधारा सर्वोपरि हुआ करती थी। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) की मर्जी के बिना पार्टी में कोई फैसला नहीं लिया जाता था। संघ के कई नेता भाजपा में आकर संघ की विचारधारा को आगे बढ़ाते थे। पार्टी के भीतर पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं को पूरा सम्मान मिलता था। समय-समय पर उन्हीं में से किसी नेता/कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ाया जाता था। ऐसी परम्परा भाजपा में आज की तारीख में विचारधारा की बात गौड़ हो गई है। अब चुनाव में प्रत्याशी के चयन का आधार उसकी सोच से नहीं, उसकी चुनाव जिताऊ क्षमता से तय किया जाता है। इसी प्रकार से अन्य दलों की तरह भाजपा में भी अब किसी नेता के ‘कद’ का निर्धारण उसकी विचारधारा और काबलियत से अधिक उसकी आक्रामकता से तय किया जाता है। मौजूदा समय में भाजपा के लिए वही नेता ‘काम’ का होता है जो सच-झूठ सब बोलने की क्षमता के साथ-साथ मतदाता तक अपनी बात सलीके से पहुंचाने में महारथ रखता हो। इसके साथ-साथ वोट बैंक की सियासत में फिट बैठता हो। पार्टी में अब ऐसा नेता ही आगे बढ़ता है। इसी वजह से पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली से लेकर राज्यों तक की भाजपा इकाई में आयातित नेताओं के साथ-साथ पूर्व नौकरशाहों का भी दबदबा बढ़ा है। आजकी बदलती राजनीति में भाजपा के लिए अपना पूरा जीवन बलिदान देने वाले कई दिग्गज भारी भरकम्प नेता हाशिये पर चले गए हैं।

जब माफिया विकास दुबे का एनकाउंटर हुआ था। तब माहौल बनाने की कोशिश की गई थी कि योगी आदित्यनाथ ब्राह्मण विरोधी हैं। उस वक्त भी ब्रजेश पाठक योगी के समर्थन में खुलकर खड़े रहे थे। ब्रजेश पाठक ने विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान विपक्षी समाजवादी पार्टी पर जमकर प्रहार किया। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने जब-जब भाजपा को ब्राह्मण विरोधी बताया, तो इसके प्रतिरोध में पाठक ने पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश पर पलटवार किया। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार भाजपा ने ब्रजेश पाठक को उनकी धारदार आक्रामक शैली के कारण पुरस्कृत करते हुए उप मुख्यमंत्री बनाया है।

इसी क्रम में पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश भाजपा की सियासत में भी पूर्व नौकरशाहों और मौका परस्त नेताओं की बड़े पैमाने पर इंट्री हो चुकी है। खासकर बीते कुछ वर्षों में भाजपा ने बाहर से आने वाले बाह्मण नेताओं को कुछ ज्यादा ही तरजीह दी है। इसमें से कई आयातित ब्राह्मण नेता और नौकरशाह तो पार्टी और सरकार में उच्च पदों पर आसीन हो गए हैं। जबकि पार्टी के कई पुराने ब्राह्मण नेता और कार्यकर्ता इस दौरान हाशिए पर चले गए हैं। भाजपा में आयातित ब्राह्मण नेताओं में ब्रजेश पाठक विधि एवं न्याय और अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत को छोड़ते हुए भारी भरकम्प स्वास्थ्य विभाग के साथ उपमुख्यमंत्री बन बैठे हैं। आज वह उत्तर प्रदेश का स्वास्थ्य दुरस्त कर रहे हैं।

जितिन प्रसाद

दूसरे ब्राह्मण नेता कांग्रेस से आयातित जितिन प्रसाद वैसे तो राजशाही खानदान से हैं । कांग्रेस में राजा की तरह रहे भी। कांग्रेस का जनाधार जाते देख कमल खिला रहे हैं। परन्तु उन्हें योगी सरकार में जनता के लिए गड्ढा मुक्त सड़कें बनाने की जिम्मेदारी दी गई है। जनता कि सड़कें गड्ढा मुक्त न कर पाने के कारण अन्य पिछड़ा वर्ग के भाजपा में बड़े नेता को गड्ढे में छोड़ते हुए जितिन प्रसाद को यह जिम्मेदारी दी गई है। परन्तु एक वर्ष बीत जानें के बाद भी सड़कें आज भी गड्ढा युक्त बानी हुई हैं।अन्य पिछड़ा वर्ग के केशव प्रसाद मौर्या के भारी भरकम्प लोक निर्माण विभाग को निगलते हुए वह प्रदेश की सड़कों को गड्ढा मुक्त करते न करते के साथ कैबिनेट मंत्री बनें हैं। रजनी तिवारी एवं प्रतिभा शुक्ला राज्य मंत्री हैं। इसमें से जितिन प्रसाद कांग्रेस से और बाकी नेताओं ने 2017 के विधानसभा चुनाव से पूर्व बसपा छोड़कर भाजपा ज्वाइन की थी।

ए.के. शर्मा

गुजरात के पूर्व नौकरशाह ए.के. शर्मा भी योगी सरकार-1 में कुछ न हासिल कर पाने वाले योगी सरकार-2 मथुरा नगरी से कैबिनेट मंत्री रहे पंडित श्री कांत शर्मा और लखनऊ के आशुतोष टण्डन के विभाग पर कब्ज़ा जमाते हुए कैबिनेट मंत्री हैं। आज ए.के. शर्मा के पास नगर विकास और ऊर्जा जैसा महत्वपूर्ण विभाग उनके पास है। ए. के. शर्मा को प्रधानमंत्री मोदी का काफी खास माना जाता है।उत्तर प्रदेश में योगी सरकार आमजन की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए बिजली विभाग में पर्याप्त धन उपलब्ध करा रहा है। परंतु इसके विपरीत ए.के. शर्मा जी पर्याप्त मात्रा में आम जनमानस को बिजली उपलब्ध कराने में असफल हो रहे हैं। उनके अधिकारी धृतराष्ट्र की नजर रखते हुए ना कुछ बोल पा रहे हैं ना कुछ देख पा रहे और ना ही कुछ कर पा रहे हैं। प्रदेश में बिजली व्यवस्था का बुरा हाल है जिस पर शक्ति भवन भी अपनी शक्ति दिखाने में असमर्थ है।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में भाजपा की सदस्यता लेने के बाद सबसे बड़ा उछाल कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी से होते हुए भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने वाले ब्रजेश पाठक की राजनीति में देखने को मिला जो पिछले छह साल में भारतीय जनता पार्टी के सबसे बड़े ब्राह्मण चेहरा बन गए हैं। उन्होंने पार्टी के पुराने ब्राह्मण चेहरों को काफी पीछे छोड़ दिया है। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक का सवाल है तो वह 2017 के विधानसभा चुनाव से ऐन पहले भाजपा में शामिल हुए थे। इसके पहले वह बहुजन समाज पार्टी में थे। योगी सरकार बनने के बाद पाठक के कंधों पर विधि एवं न्याय और अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत का विभाग सौपा गया था। इस दौरान लगातार उनकी छवि ब्राह्मण नेता के तौर पर मजबूत होती गई।भाजपा के आलाकमान को उनके काम करने का तरीका भी पसंद आया। योगी सरकार की सत्ता में वापसी होने पर उन्हें दिनेश शर्मा की जगह उप मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठाया गया। पिछली बार के उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा, ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा को योगी टू सरकार में जगह नहीं मिली। इसी तरह अन्य ब्राह्मण नेताओं में नीलकंठ तिवारी वाराणसी की विधानसभा सीट से दूसरी बार जीते थे। वे पूर्वांचल का बड़ा चेहरा थे,लेकिन उनकी जगह पहली बार विधायक बनते ही गाजीपुर के दयाशंकर मिश्रा कैबिनेट में चुन लिए गए। योगी में सबसे आश्चर्यजनक रूप से डा. दिनेश शर्मा की विदाई हुई। डा. दिनेश शर्मा उपमुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए आक्रामक छवि नहीं बना पाये थे जितनी योगी सरकार ने अपेक्षा की थी। बीते वर्ष विधानसभा चुनाव कैंपेन के दौरान योगी सरकार पर ब्राह्मण विरोधी होने के आरोप लगे थे। जिनका बचाव करने में दिनेश शर्मा पूर्णतः असफल रहे थे।विपक्ष ने उनपर तीखा हमला किया। दिनेश शर्मा इन हमलों का जवाब देने में पूरी तरह नाकाम साबित हुए। वहीं बृजेश पाठक पूरी तरह से मुस्तैद दिखाई दिए। यही वजह थी बीजेपी और स्वयं योगी जी को भी दिनेश शर्मा के बजाय ब्रजेश पाठक में वह खूबियों दिखाई देने लगी जिसकी उन्हें जरूरत थी। पाठक ब्राह्मणों के मुद्दों पर बीजेपी विरोधी नेताओं के खिलाफ ज्यादा आक्रामक रहे, जिसका इनाम उन्हें डा. दिनेश शर्मा को हटाकर उनकी जगह डिप्टी सीएम के रूप में मिला।

दिनेश शर्मा पूर्व उपमुख्यमंत्री

दरअसल दिनेश शर्मा उपमुख्यमंत्री के तौर पर पिछले पांच साल में ऐसे कई मौके आए जब पर अपनी वैसी आक्रामक छवि नहीं बना पाए दिनेश शर्मा सुस्त दिखाई दिए। वहीं ब्रजेश पाठक जिसकी उनसे अपेक्षा थी। बीते वर्ष विधानसभा के तेवर तीखे नजर आए। यूपी विधानसभा चुनाव चुनाव कैंपेन के दौरान योगी सरकार पर ब्राह्मण से पूर्व की लखीमपुर खीरी की घटना को ही लेते विरोधी होने के आरोप लगे थे। विपक्ष ने उन पर हैं। इसमें गृहराज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी और उनके बेटे आशीष मिश्रा विपक्ष और भारतीय किसान यूनियन के निशाने पर थे। किसान आंदोलन की पृष्ठभूमि में यहां हुए बवाल में आठ लोगों की मौत हो गई थी। इनमें चार किसानों के साथ अन्य चार बीजेपी कार्यकर्ता थे। ये सभी ब्राह्मण थे। माहौल देख तब सब ने चुप्पी साध रखी थी। हालांकि, ब्रजेश मिश्रा इन कार्यकर्ताओं के घर पहुंचे थे। उनके परिजनों को सांत्वना दी थी कि उन्हें न्याय मिलेगा। सीएम योगी आदित्यनाथ पर तब भी हमले हुए थे जब माफिया विकास दुबे का एनकाउंटर हुआ था। तब माहौल बनाने को कोशिश की गई थी कि योगी आदित्यनाथ ब्राह्मण विरोधी है। उस वक्त भी ब्रजेश पाठक योगी के समर्थन में खुलकर खड़े रहे थे। ब्रजेश पाठक ने विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान विपक्षी समाजवादी पार्टी पर जमकर प्रहार किया। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने जब-जब भाजपा को ब्राह्मण विरोधी बताया, तो इसके प्रतिरोध में पाठक ने पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश पर पलटवार किया। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, भाजपा ने पाठक को उनके इसी काम के लिए पुरस्कृत करते हुए उन्हें उप मुख्यमंत्री बनाया था।

डॉ. शर्मा पहली बार लखनऊ में मेयर पद के लिए 2008 में चुने गए। वे 2006-2011 में उत्तर प्रदेश मेयर के अध्यक्ष भी रहे। 2012 में वे उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद के सिराथू से विधानसभा सदस्य चुने गए और 2014 में वो फूलपुर से सांसद चुने गए। फिर उन्हें 2016 में पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया। दिन ब दिन उनकी लोकप्रियता बढ़ती गई और वो एक मजबूत पहचान बनाने में सफल हुए।

ब्रजेश पाठक का जन्म 25 जून 1964 को राजधानी लखनऊ से सटे हरदोई जिले के मल्लावा कस्बे के मोहल्ला गंगाराम में हुआ था,इनके पिता का नाम सुरेश पाठक था।ब्रजेश पाठक ने कानून की पढ़ाई की है,लेक‍िन उन्‍होंने अपने राजनीति जीवन की शुरुआत अपने छात्र जीवन से की है। ब्रजेश पाठक के राजनैतिक सफर की बात की जाए तो हरदोई जिले के रहने वाले ब्रजेश पाठक लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्रसंघ की राजनीति में सक्रिय रहे और 1989 में छात्र संघ उपाध्यक्ष चुने गये। इसके बाद 1990 में वह छात्रसंघ के अध्यक्ष चुने गये। पाठक को 2002 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने हरदोई के मल्लावां क्षेत्र से अपना उम्मीदवार बनाया था और वह लगभग सवा सौ मतों के कम अंतर से पराजित हो गये थे। इसके करीब दो वर्ष बाद वह कांग्रेस छोड़ बसपा में शामिल हो गए। उन्हें 2004 के लोकसभा चुनाव में बसपा ने उन्नाव संसदीय क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया और वह चुनाव जीत गये। इसके बाद बसपा प्रमुख मायावती ने उन्हें 2009 में राज्यसभा भेज दिया था। श्री पाठक 2014 में उन्नाव से दोबारा लोकसभा चुनाव में बसपा से उम्मीदवार बनाए गए, परन्तु उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा।

ब्रजेश पाठक उपमुख्यमंत्री

ब्रजेश पाठक ने 2004 के लोकसभा चुनाव में बसपा के टिकट पर उन्नाव सीट से भाग्य आजमाया तो राजनीति में पहली बड़ी कामयाबी मिली और चुनाव जीत गए। 2009 में बसपा मुखिया मायावती ने उन्हें राज्यसभा में जगह दिलाई और पार्टी का मुख्य सचेतक बना दिया।बसपा ने 2012 में इनकी पत्नी नम्रता पाठक को भी उन्नाव सदर सीट से टिकट दिया, लेकिन वो चुनाव हार ग‌ईं।मायावती के कार्यकाल में नम्रता पाठक यूपी राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष भी रह चुकी हैं और उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा मिला हुआ था। 2014 की मोदी लहर में ब्रजेश पाठक ने उन्नाव से हाथी की सवारी करनी चाही,लेकिन तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा। ब्रजेश पाठक 2016 में वह भाजपा में शामिल हो गए। भारतीय जनता पार्टी ने 2017 के विधानसभा चुनाव में पाठक को लखनऊ मध्य क्षेत्र से अपना उम्मीदवार बनाया। उस चुनाव में श्री पाठक ने समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री रविदास मेहरोत्रा को पराजित कर यह सीट जीत ली और 19 मार्च 2017 को योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बनी सरकार में विधि एवं न्याय -अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत मंत्री बनाए गए थे। योगी-2 सरकार में उपमुख्यमंत्री बनाये गए।

ब्रजेश पाठक आमजन से कनेक्ट करने वाले एक डायनेमिक लीडर के रूप में उभर कर आए हैं। भाजपा में ब्राह्मण राजनीति को एक धारदार नेतृत्व दिया है। कल तक भाजपा को ब्राह्मण विरोधी कहने वाले विपक्षी दलों की ब्रजेश पाठक ने बोलती बंद कर दी और दशकों से बैकफुट पर चली आ रही ब्राह्मण राजनीति को फ्रंटफुट पर ला दिया।

राजनीति में इतने लंबे करियर की वजह से ब्रजेश पाठक अबतक सियासत के मौसम को परखना सीख चुके थे। 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव से करीब 6 महीने पहले उन्होंने भाजपा का कमल थाम लिया। 2017 में भाजपा से उन्हें लखनऊ सेंट्रल से चुनाव लड़ने का टिकट मिला और वे अखिलेश सरकार में तब के कैबिनेट मंत्री रहे रविदास मेहरोत्रा को 5 हजार से ज्यादा वोटों से हराकर विधानसभा में पहुंच गए। यूपी विधानसभा में यह उनकी पहली एंट्री थी और उन्हें मुख्यमंत्री योगी ने कैबिनेट मंत्री बनाया।अब ब्रजेश पाठक उपमुख्यमंत्री की कुर्सी पर विराजमान हुए हैं। ब्रजेश पाठक के लिए सुनहरा मौका है। कल्याण सिंह ने भारतीय जनता पार्टी में अपनी लोकप्रियता का कीर्तिमान स्थापित किया था। उनके अवसान के बाद उस रिक्त स्थान की पूर्ति योगी आदित्यनाथ ने की लेकिन योगी आदित्यनाथ का कद इतना ऊंचा हो गया है कि वह अब भाजपा में राष्ट्रीय स्तर के नेता बन गए हैं। ऐसी स्थिति में प्रदेश भाजपा में अब कल्याण सिंह जैसी लोकप्रियता हासिल करने वाले जिस एक अन्य नेता का आविर्भाव हुआ है, वह ब्रजेश पाठक हैं। ब्रजेश पाठक को योगी मंत्रिमंडल का सर्वाधिक लोकप्रिय मंत्री मन जाता है। उनकी सबसे बड़ी विशेषता उनकी जनता से निकटता ही है। जनता से इस निकट जुड़ाव का ही नतीजा है कि उनके यहां नित्य-प्रति अपनी समस्याएं लेकर आनेवालों की संख्या सैकड़ों में होती है। राजनीति के खिलाड़ी ब्रजेश पाठक