लखनऊ में भव्य लक्ष्मण मंदिर का होगा निर्माण-रामभद्राचार्य

रामनगरी में श्रीराम मंदिर के साथ ही लक्ष्मण नगरी लखनऊ में भव्य लक्ष्मण मंदिर का निर्माण होगा।’हिन्दू एकता महाकुंभ’ होने लक्ष्मण मंदिर निर्माण सहित कई बड़े निर्णय।

लखनऊ। पद्मविभूषण से सम्मानित एवं दिव्यांग विश्वविद्यालय, चित्रकूट के कुलाधिपति संत रामभद्राचार्य ने बुधवार को राजधानी लखनऊ में कहा कि रामनगरी अयोध्या में हो रहे प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण के साथ ही लक्ष्मण जी की नगरी लखनऊ में भी भव्य लक्ष्मण मंदिर का निर्माण होगा। इसी के साथ उन्होंने यह भी कहा कि अयोध्या हमे मिल चुकी है, अब जल्द ही काशी और मथुरा में अवैध ढंग से मस्जिद बनाकर कब्जा की गयी मंदिरों की पवित्र भूमि भी हमे वापस की जानी चाहिए। साथ ही अवैध धर्मांतरण पर पूरी तरह रोक लगायी जाय तथा इसको अक्षम्य अपराध की श्रेणी में रखने के लिए कानून बने। लव जिहाद जैसा कुत्सित कार्य करने वालों और भोली भाली बेटियों को बहकाने वालों को अब क्षमा नहीं किया जा सकता।

संत रामभद्राचार्य ने उपरोक्त बातें राजधानी लखनऊ में कानून मंत्री ब्रजेश पाठक के आवास पर आयोजित एक प्रेसवार्त्ता के दौरान कहीं। इस अवसर पर मंत्री ब्रजेश पाठक भी उनके साथ मौजूद थे। प्रेसवार्त्ता की शुरुआत करते हुए सबसे पहले संत रामभद्राचार्य ने एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना के दौरान दिवंगत हुए देश के सीडीएस जनरल विपिन रावत, उनकी पत्नी एवं अन्य सैन्य अधिकारियों के लिए ईश्वर से प्रार्थना की।

इसके बाद रामभद्राचार्य ने कहा कि 14 दिसम्बर से चित्रकूट में तीन दिवसीय भव्य ‘हिन्दू एकता महाकुंभ’ का आयोजन हो रहा है। इस आयोजन में देश भर के हिन्दू धर्म मे आस्था रखने वाले साधु संत तथा विद्वान शामिल होंगे। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी इस कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे। 15 दिसम्बर को ‘हिन्दू एकता महाकुम्भ नामक इस आयोजन का मुख्य कार्यक्रम होगा। जिसमें मथुरा, काशी के साथ ही लक्षमण नगरी, लखनऊ में लक्ष्मण जी का मंदिर बनाने पर भी निर्णय होगा। इसी के साथ धर्मांतरण, जनसंख्या नियंत्रण, लव जिहाद, सामाजिक समरसता, पर्यावरण एवं गंगा, यमुना, गोमती का पुनरुद्धार भी प्रमुख मुद्दा होगा। जाति आधारित आरक्षण के स्थान पर आर्थिक आरक्षण, मैकाले की सोच पर आधारित शिक्षा के बजाय वैदिक शिक्षा नीति लागू करने के विषय को भी प्रमुख रूप से इस एकता महाकुंभ में उठाया जाएगा।

शास्त्रजीवी होते हैं संत, उन्हें चिलमजीवी कहने वाले कर रहे बड़ी भूल

संत रामभद्राचार्य ने पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में कहा कि ”साधु संत शास्त्रजीवी होते हैं चिलमजीवी नहीं। उन्होनें कहा कि संतो को चिलमजीवी कहने वाले बहुत बड़ी भूल कर रहे हैं, देश का हिन्दू समाज उन्हें क्षमा नहीं करेगा। प्रेसवार्त्ता में संत रामभद्राचार्य के साथ उनके शिष्य एवं निजी सचिव संत रामचंद्र दास, प्रदेश के कानून मंत्री ब्रजेश पाठक एवं प्रतापगढ़ के रामपुर खास से भाजपा नेता कुलवंत सिंह भी उपस्थित रहे।