पहुंच इतनी ऊंची की फिर वहीं पहुंचे..!

66
स्थानांतरण नीति आते ही जेलकर्मी में हड़कंप
स्थानांतरण नीति आते ही जेलकर्मी में हड़कंप

पहुंच इतनी ऊंची की फिर वहीं पहुंचे। कारागार मुख्यालय के अफसरों का अजब गजब कारनामा। विभाग में सरकार की स्थानांतरण नीति के निर्देश अफसरों के ठेंगे पर। पहुंच इतनी ऊंची की फिर वहीं पहुंचे..!

राकेश यादव

लखनऊ। प्रदेश के कारागार विभाग में सरकार की स्थानांतरण नीति के निर्देश जेल मुख्यालय के अफसरों के लिए कोई मायने नहीं रखते है। यही वजह है कि मंडल में दस साल और जनपद में छह साल पूरे होने के बाद हटाए गए जेलर को फिर उसी जेल पर अटैच कर दिया गया। यह मामला विभागीय अफसरों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसको लेकर तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे है। चर्चा है कि पहुंच ऊंची हो तो फिर उसी जेल पर आसानी से पहुंचा जा सकता है। कारागार विभाग में ऐसा एक मामला प्रकाश में आया है।

मामला राजधानी की जिला जेल का है। शासन की स्थानांतरण नीति के अनुसार एक जनपद में छह साल और मंडल में दस साल से तैनात अधिकारी को स्थानांतरित किया जाए। इस नीति के तहत बीते वर्ष लखनऊ जेल में तैनात जेलर अजय राय को लखनऊ से जौनपुर जेल पर स्थानांतरित किया गया। लंबी समयावधि से एक ही जनपद में जमे जेलर को खासी मशक्कत के बाद तबादला किया गया था।

सूत्रो का कहना है कि मुख्यालय में ऊंची पहुंच और जुगाड़ रखने वाले जेलर अजय राय ने स्थानांतरित जनपद की जौनपुर जेल में कार्यभार संभालने के तुरंत बाद ही अपने आप को जौनपुर से उन्नाव जेल पर अटैच करा लिया। कुछ महीनों तक जौनपुर से उन्नाव जेल पर अटैच रहने वाले इस जेलर ने शासन और मुख्यालय में मजबूत पकड़ रखने वाले जेल के मुखिया (अधीक्षक) के माध्यम से अपने आप को उन्नाव जेल से लखनऊ जेल से अटैच करा लिया। दिलचस्प बात यह है कि उन्नाव से तीन माह के लिए अटैच हुआ जेलर निर्धारित समयावधि पूरी हो जाने के बाद भी लखनऊ जिला जेल में ही जमा हुआ है। कारागार विभाग के इस अजब गजब कारनामे ने शासन की स्थानांतरण नीति में एक ही जनपद में सालों से जमे अधिकारियों को हटाने की मंशा पर पानी फेरती नजर आ रही है। उधर इस संबंध में डीजी पुलिस/आईजी जेल पीवी रामशास्त्री से बात करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने कहा पीआरओ से बात कर लें। पीआरओ अंकित ने कई प्रयासों के बाद भी फोन नहीं उठाया।

तैनाती जौनपुर में, काम कर रहे लखनऊ जेल पर

जेलर अजय राय के लखनऊ जेल में अटैच होने के बाद संवेदनशील जौनपुर जेल जेलर विहीन हो गई। वर्तमान समय में जौनपुर जेल में एक भी जेलर नहीं हैं, वहीं लखनऊ जेल में कई जेलर तैनात है। आलम यह है कि जौनपुर जेल पर तैनात जेलर लखनऊ जिला जेल पर काम कर रहा है, वहीं जौनपुर जेल पर जेल अधीक्षक ही जेलर का काम भी देख रहा है। सूत्रो का कहना है कि जौनपुर जेल अधीक्षक जेलर नहीं होने के कारण जेलर का काम डिप्टी जेलर से करा रहे हैं। लखनऊ जेल में कई वरिष्ठ जेलर होने के बाद भी अटैच जेलर से महत्वपूर्ण कार्य कराए जा रहे है। दोनों जेलों की इस व्यवस्था ने कारागार मुख्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए है। यह अलग बात है कि मुख्यालय के आला अफसर इस मसले पर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।

लेनदेन करके होता मनचाही जेलों पर अटैचमेंट…!

चहेते अफसरों को कमाऊ जेलों पर तैनात और अटैच करने की परंपरा कोई नई बात नहीं है। जेलर अजय राय से पहले भी कई अधिकारियों को कमाई वाली जेलों पर अटैच किया जा चुका है। मुख्यालय स्तर पर लेनदेन करके कोई भी अधिकारी मनचाही जेल पर अटैच हो सकता है। बताया गया है कि इससे पहले पश्चिम की सर्वाधिक कमाऊ गाजियाबाद जेल से समयावधि पूरी होने पर नीरज श्रीवास्तव को अंबेडकरनगर जेल स्थानांतरित किया। उन्हे भी मुख्यालय ने कुछ दिन बाद ही बुलंदशहर जेल पर अटैच कर दिया था। इसी प्रकार आगरा जेल पर तैनात राजेश सिंह को मुजफ्फरनगर जेल भेज दिया गया। हकीकत यह है कि पश्चिम की जेलों पर तैनात अधिकारी पूर्वांचल की जेलों पर आना ही नही चाहते है। पहुंच इतनी ऊंची की फिर वहीं पहुंचे..!