उत्तर प्रदेश में उड़ाई जा रही है आरक्षण की धज्जियाँ-लौटनराम निषाद

ओबीसी,एससी के मंत्री,विधायक,सांसद की चुप्पी उनकी गुलामी का परिचायक।उत्तर प्रदेश में उड़ाई जा रही है आरक्षण नियमावली की धज्जियाँ।

लखनऊ। 69,000 शिक्षक भर्ती में गलत तरीके से एमआरसी लगाकर ओबीसी,एससी के प्रतिभाशाली युवाओं की हकमारी की गई।उत्तर प्रदेश में जब से योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा सरकार बनी है,नियुक्तियों की शुचिता तार तार हुई है।शिक्षक भर्ती में एमआरसी लगाकर परोक्ष रूप से लगभग 17 हजार पिछड़े दलित वर्ग के अभ्यर्थियों के चयन में बाधा पहुंचाई गई।अब उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा महिला स्वास्थ्य कार्यकर्त्ता(एएनएम) भर्ती के विज्ञापन में प्रत्यक्ष रूप से ओबीसी,एससी आरक्षण कोटे पर डकैती डाली जा रही है।एएनएम भर्ती विज्ञापन पर आपत्ति उठाते हुए राष्ट्रीय निषाद संघ(एनएएफ) के राष्ट्रीय सचिव व कांग्रेस नेता चौ.लौटनराम निषाद ने यूपीएस एसएससी के अध्यक्ष/सचिव व उत्तर प्रदेश सरकार से आरक्षण कोटे में सुधार कर संशोधित विज्ञापन प्रकाशित कराने की मांग किया है।

उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकारी सेवा आरक्षण नियमावली के अनुसार ओबीसी को 27 प्रतिशत, एससी को 21 प्रतिशत,एसटी को 2 प्रतिशत एवं ईडब्ल्यूएस को 10 प्रतिशत आरक्षण कोटा देय है।उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने एएनएम के 9,212 पदों का जो विज्ञापन प्रकाशित कराया है,उसमें ओबीसी को 27 की जगह 18.01%,एससी को 21 की जगह 14.61%,अनारक्षित/यूआर को 40 की जगह 52.81% पद आबंटित किया गया है।इस भर्ती में खुलेआम ओबीसी की 9 प्रतिशत व एससी के 6.39 प्रतिशत की हकमारी की जा रही है।

लौटनराम निषाद


निषाद ने बताया कि एएनएम के विज्ञापित 9,212 पदों में आरक्षण नियमावली के अनुसार ओबीसी को 2,487 पद,एससी को 1,934,एसटी को 184 व ईडब्ल्यूएस को 921 पद आरक्षित करना चाहिए।उन्होंने बताया कि 9,212 में 40% यानी 3,730 पद अनारक्षित(ओपेन फ़ॉर ऑल) रखा जाना चाहिए था,लेकिन 3,730 के सापेक्ष 4,865 पद अनारक्षित रखा गया है।आर्थिक रूप से कमजोर सवर्ण वर्ग/ईडब्ल्यूएस को 10% आरक्षण कोटा की दृष्टि से पूरा का पूरा 921 पद आबंटित किया गया है।ओबीसी को 2,487 पद के सापेक्ष 1,660 व एससी को 1,934 के सापेक्ष 1,346 पद आरक्षित कर ओबीसी के 827 व एससी के 588 पदों की खुलेआम हकमारी की जा रही है।एसटी को 9,212 में 2% आरक्षण कोटा के हिसाब से 184 की बजाय 420 यानी 2.55% अधिक कोटा दिया गया है।उन्होंने कहा कि योगी सरकार द्वारा हर भर्ती में ओबीसी,एससी कोटे की प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से हकमारी की जा रही है।इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्रोफेसर भर्ती में जातीय चरित्र का परिचय देते हुए साक्षात्कार टीम द्वारा एनएफएस(पात्र की अनुपलब्धता/नॉट फाउंड सूटेबल) का बहाना बनाकर ओबीसी को पूरी पात्रता के बाद चयन से बाहर कर दिया गया।


निषाद ने कहा कि हर भर्तियों में पिछडों,दलितों के आरक्षण के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।परन्तु ओबीसी के 22 सांसद,112 विधायक व एससी के 17 सांसद,79 विधायक ,दर्जनों मंत्री,एमएलसी व राज्यसभा सांसद चुप्पी साधे हुए हैं।जो इनकी गुलामी व बंधुआपन का परिचायक है।उन्होंने कहा कि ओबीसी,एससी के नेता समाज व जाति के नाम पर चुन कर जाते हैं,पर जब वर्गीय हितों पर चोट पहुंचाई जाती है तो ये गूंगे,बहरे बन जाते हैं।केशव प्रसाद मौर्य,स्वामी प्रसाद मौर्य आदि जैसे बड़बोले सामाजिक न्याय के मुद्दे पर मौन धारण कर लेते हैं।बंधुआ मजदूर सरीखे पिछड़े दलित वर्ग के नेताओं के चलते ही वर्गीय हितों पर चोट पहुंचाई जा रही है।