ओबीसी,एससी विद्यार्थियों के साथ सौतेला व्यवहार-लौटनराम

ओबीसी,एससी आरक्षण कोटा की हो रही हकमारी,पिछड़े दलित वर्ग के नेता साधे हुए हैं चुप्पी।शुल्कप्रतिपूर्ति व छात्रवृत्ति वितरण में ओबीसी,एससी विद्यार्थियों के साथ किया जा रहा सौतेला व्यवहार।

लखनऊ। राष्ट्रीय निषाद संघ के राष्ट्रीय सचिव व कांग्रेस नेता चौ.लौटनराम निषाद ने उत्तर प्रदेश सरकार पर ओबीसी आरक्षण कोटा की हकमारी का आरोप लगाया है।उन्होंने प्रदेश सरकार द्वारा पिछड़े, दलित वर्ग के विद्यार्थियों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया है।कहा कि सवर्ण जाति के विद्यार्थियों की शुल्क प्रतिपूर्ति व छात्रवृत्ति नवम्बर में ही उनके खाते में भेज दी गयी।लेकिन आज तक ओबीसी,एससी के 95 फ़ीसदी विद्यार्थियों की शुल्क प्रतिपूर्ति व छात्रवृत्ति को नहीं भेजकर भेदभाव किया जा रहा है।आखिर सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास की बात करने वाली भाजपा सरकार पिछड़े दलित विद्यार्थियों के साथ सौतेला व्यवहार क्यों कर रही है?


निषाद ने बताया कि अशासकीय महाविद्यालय के प्राचार्य भर्ती में ओबीसी अभ्यर्थियों के चयन में धांधली की गई।इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रोफेसर नियुक्ति में 15 अंक के साक्षात्कार में साक्षात्कार टीम द्वारा भेदभाव कर एन एफ एस दिखा दिया।जब से उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार बनी है,यह नियुक्ति में ओबीसी,एससी की हकमारी की जा रही है।उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार के बेसिक शिक्षा मंत्री द्विवेदी के नेतृत्व में शिक्षक भर्ती में घोटाला हुआ। 27% ओबीसी आरक्षण की जगह सिर्फ़ 3.86% ओबीसी आरक्षण लागू किया। एससी की भी 4% सीटों में घालमेल किया गया।अब चुनाव क़रीब देखकर सरकार आरक्षित वर्ग के 6,000 कैंडिडेट को नौकरी देकर लीपापोती कर रही है। जबकि नियम विरुद्ध एमआरसी लगाकर आरक्षित वर्ग के 18,000 पदों की हकमारी की गई।

निषाद ने कहा कि सरकार ने विसंगति को स्वीकार कर लिया है।फिर न्यायसंगत कदम नहीं उठा रही है निषाद ने मांग किया है कि सरकार अनारक्षित कट ऑफ़ के नीचे जिन 27% ओबीसी का सलेक्शन होना चाहिए, उन सभी कैंडिडेट की लिस्ट अपनी वेबसाइट पर डाल दे।इससे सरकार डर क्यों रही है? अगर सचमुच आरक्षण लागू किया है तो पारदर्शिता से भयभीत क्यों हो रही है? सब कुछ गुप-चुप क्यों किया जा रहा है?निषाद ने कहा कि जब मुख्यमंत्री ने खुद गड़बड़ी की बात स्वीकार कर ली है तो द्विवेदी अपने पद पर कैसे हैं? उनको गिरफ़्तार क्यों नहीं किया गया और मंत्री पद से बर्खास्त क्यों नहीं किया गया?


निषाद ने एएनएम भर्ती में भी ओबीसी,एससी कोटे की हकमारी का आरोप लगाते हुए संशोधित विज्ञापन प्रकाशित करने की मांग किया है।उन्होंने बताया कि 9212 पद में ओबीसी को 27 प्रतिशत कोटा के हिसाब से 2,487 पद की जगह 1,660 पद, एससी को 21प्रतिशत कोटा के हिसाब से 1,934 पद की जगह 1,346 ही दिया गया है।40 प्रतिशत अनारक्षित कोटा के हिसाब से 3,730 की जगह 4,865 पद अनारक्षित कर ओबीसी,एससी कोटा की हकमारी की जा रही है।एसटी को 2 प्रतिशत की जगह 4.55 प्रतिशत कोटा दिया गया है।ईडब्ल्यूएस को 10 प्रतिशत कोटा के हिसाब से पूरी 921 सीट आरक्षित की गई है।ओबीसी को मात्र 18.01 प्रतिशत,एससी को 14.61 प्रतिशत ही कोटा दिया गया है और अनारक्षित कोटा बढाकर 52.81 प्रतिशत कर दिया गया है।एएनएम के 9,212 पद के विज्ञापन में खुलेआम ओबीसी की 827 सीट,एससी की 588 सीट का घपला किया गया है और 1,135 अतिरिक्त पद को गलत तरीके से अनारक्षित किया गया है।