उद्धव ठाकरे को अब समझ आई महाराष्ट्र की जन भावना

तो उद्धव ठाकरे के अब समझ में आई है महाराष्ट्र की जन भावना।

एस0 पी0 मित्तल

महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने निर्णय लिया है कि 18 जुलाई को होने वाले राष्ट्रपति पद के चुनाव में भाजपा गठबंधन वाले एनडीए की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू का समर्थन करेंगे। यानी उद्धव ठाकरे के साथ जो 15 विधायक और 12 सांसद हैं, वे द्रौपदी मुर्मू को वोट देंगे। यह बात अलग है कि उद्धव ठाकरे अभी भी महाराष्ट्र में कांग्रेस और एनसीपी के गठबंधन में शामिल हैं। लेकिन उद्धव ठाकरे का कहना है कि द्रौपदी मुर्मू का समर्थन महाराष्ट्र की जनभावनाओं को देखते हुए लिया गया है। यानी उद्धव ठाकरे को महाराष्ट्र की जन भावनाएं समझ में आ गई है। उद्धव को महाराष्ट्र के लोगों की भावनाएं तब समझ में आई है, जब उनकी मुख्यमंत्री की कुर्सी छीन गई है। विगत दिनों जब एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना के 40 विधायक अलग हो गए थे, तब शिंदे ने कहा था कि हमने जनता की भावनाओं का ख्याल करते हुए कांग्रेस, एनसीपी की सरकार से अलग होने का निर्णय लिया है। लेकिन तब शिंदे और उनके समर्थक विधायकों को उद्धव ठाकरे ने गद्दार कहा। तब उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र की जनता की भावनाओं को समझने को तैयार नहीं थे।

एनसीपी और कांग्रेस के दम पर आखिरी समय तक उद्धव ठाकरे अपनी सरकार को बचाने में लगे रहे, लेकिन जब सुप्रीम कोर्ट ने भी विधानसभा में बहुमत साबित करने के निर्देश दे दिए, तब उद्धव ठाकरे विधानसभा का भी सामना नहीं कर सके। अब जब ठाकरे की कुर्सी छीन चुकी है तो महाराष्ट्र की जनता की भावनाएं समझ में आने लगी है। महाराष्ट्र की जनता ने तो ढाई वर्ष पहले ही भाजपा और शिवसेना के गठबंधन को सरकार बनाने का अवसर दिया था। लेकिन मुख्यमंत्री बनने की ललक में उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र की जन भावनाओं का ख्याल नहीं रखा और भाजपा से गठबंधन समाप्त कर एनसीपी और कांग्रेस से मिल कर मुख्यमंत्री की कुर्सी हासिल कर ली। चूंकि यह गठबंधन जन भावना के खिलाफ था, इसलिए शिवसेना के 55 में से 40 विधायक एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में अलग हो गए। अब महाराष्ट्र की जनता की भावनाओं के अनुरूप भाजपा के समर्थन में शिंदे मुख्यमंत्री हैं। अब उद्धव ठाकरे के भी समझ में आ गया है कि कांग्रेस और एनसीपी के साथ रहने से नुकसान ही होगा। इसलिए राष्ट्रपति चुनाव में भाजपा के गठबंधन वाले एनडीए की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू को समर्थन देने का निर्णय लिया गया है।