यू.जी.सी. कोड आवंटन से गन्ने की फर्जी खरीद पर लगेगी रोक-लक्ष्मी नारायण चौधरी

गन्ना किसानों को किया गया 12,530 करोड़ रूपये का भुगतान।गन्ना सर्वेक्षण नीति जारी, गन्ना आपूर्ति की कार्य योजना सुदृढ़ करने में मिलेगी मदद।गन्ना कृषकों को यूनिक ग्रोवर कोड आवंटित, यू.जी.सी. कोड के आवंटन से
गन्ने की फर्जी खरीद पर लगेगी रोक।लक्ष्य के सापेक्ष 1 लाख 10 हजार हेक्टेयर गन्ना क्षेत्रफल में तरल नैनों यूरिया का छिड़काव कराया गया, जिसके उपयोग से राष्ट्र आत्म निर्भर बनेगा।उन्नत खेती हेतु 16,335 गन्ना कृषकों को प्रशिक्षित कराया गया।

लखनऊ। प्रदेश के चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास मंत्री श्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने लोक भवन में आयोजित प्रेंस कॉन्फें्रस में कहा कि 100 दिवसीय कार्य योजना के अन्तर्गत गन्ना आपूर्तिकर्ता कृषकों को 8 हजार करोड़ के गन्ना मूल्य भुगतान का लक्ष्य रखा गया था, जिसके सापेक्ष प्रदेश के गन्ना किसानों को रू.12,530 करोड़ का भुगतान किया गया, जो कि निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष लगभग 55 प्रतिशत से अधिक है। उन्हांेने कहा कि वर्तमान सरकार के मात्र पांच वर्षों के कार्यकाल में रिकॉर्ड रू.1,76,686 करोड से अधिक का भुगतान हुआ है, जो अब तक इतनी कम अवधि में किये गये भुगतान में सर्वाधिक है। इससे गन्ना किसानों की आय में वृद्धि हुयी है तथा गन्ना किसानों के जीवन में खुशहाली आई है। प्रदेश के गन्ना किसानों को गन्ना मूल्य भुगतान कराया जाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रदेश सरकार गन्ना किसानों के आर्थिक हितों के संवर्धन तथा सर्वागींण विकास के लिये कृत संकल्पित है।


श्री चौधरी ने कहा कि 100 दिन के एजेन्डे के तहत पेराई सत्र 2022-23 के लिए गन्ना क्षेत्रफल के आंकलन हेतु गन्ना सर्वेक्षण नीति जारी करने का लक्ष्य रखा गया था, जिसे लक्ष्य के सापेक्ष तय समय से पूर्व ही जारी कर दिया गया। सर्वेक्षण नीति में सुचिता एवं शुद्धता के साथ-साथ समयबद्धता के साथ सर्वेक्षण कार्य पूर्ण करने पर फोकस रखा गया है। इससे गन्ना आपूर्ति की कार्य योजना सुदृढ़ करने में मदद मिलेगी। सर्वे कार्य में शुद्धता, पारदर्शिता और गन्ना किसानों की समस्याओं के त्वरित निस्तारण एंव डिजिटलाईजेशन को बढ़ावा देने के लिए स्मार्ट गन्ना किसान प्रोजेक्ट के अन्तर्गत भ्ंदक भ्मसक ब्वउचनजमत क्मअपबम;भ्ण्भ्ण्ब्ण्द्ध के माध्यम से जी.पी.एस. सर्वे कार्य पूर्ण कराया गया।


गन्ना विकास मंत्री ने कहा कि प्रदेश के लगभग 45 लाख गन्ना आपूर्ति कृषकों को यूनिक ग्रोवर कोड (न्ळब्) विकसित कर आवंटित करने का लक्ष्य रखा गया था। प्रदेश के सभी गन्ना कृषकों कोयूनिक ग्रोवर कोड निर्धारित समयावधि में ही आवंटित कर दिया गया है। यू.जी.सी. कोड के आवंटन से गन्ने की फर्जी खरीद पर रोक लगेगी। बिचौलियों एवं गन्ना माफियाओं का सफाया होगा तथा वास्तविक किसानों को समय से गन्ना आपूर्ति का लाभ मिलेगा। गन्ना किसानों की पहचान अब आधार नंबर की तर्ज पर 14 डिजिट के यूनिक कोड के जरिए होगी। यदि कोई किसान डबल बांड बनवाने की कोशिश करेगा तो उसे आसानी से चिन्हित किया जा सकेगा। यू.जी.सी. कोड जारी होने से गन्ना कृषकों की ंदर्ज कृषि भूमि का मिलान राजस्व विभाग के अभिलेखों से किया जाना आसान होगा।


श्री चौधरी ने कहा कि कृषकों की उत्पादन लागत में कमी लाने एवं पर्यावरण संरक्षण हेतु लगभग 1 लाख हेक्टेयर गन्ना क्षेत्रफल में तरल नैनों यूरिया के छिड़काव का लक्ष्य रखा गया था। लक्ष्य के सापेक्ष 1 लाख 10 हजार हेक्टेयर गन्ना क्षेत्रफल में तरल नैनों यूरिया का छिड़काव कराया गया, जो लक्ष्य के सापेक्ष 110 प्रतिशत है। नेैनो यूरिया के उपयोग से राष्ट्र आत्म निर्भर बनेगा एवं यूरिया आयात में व्यय होने वाली विदेशी मुद्रा की बचत भी हो सकेगी। रसायनिक उर्वरकों के अन्धाधुन्ध प्रयोग से होने वाले पर्यावरणीय कुप्रभाव से भी मुक्ति मिलेगी।


गन्ना विकास मंत्री ने कहा कि गन्ने की उत्पादकता बढ़ाने एवं उत्पादन लागत घटाने तथा गन्ना किसानों की आय दोगुनी करने हेतु 9 सूत्रीय कार्यक्रम लागू करने का लक्ष्य रखा गया था,जिसकी शत-प्रतिशत पूर्ति करते हुए 9-सूत्रीय कार्यक्रम गन्ना विकास विभाग में लागू किया जा चुका है। 9 सूत्रीय कार्यक्रम के अन्तर्गत गन्ने की उत्पादकता में वृद्धि कर, गन्ने की उत्पादन लागत में कमी करना, प्रशिक्षण के माध्यम से वैज्ञानिक संस्तुतियों को कृषकों तक पहुंचाना, गन्ना विपणन और गन्ना मूल्य भुगतान, त्वरित गन्ना ढुलाई हेतु सुगम यातायात की व्यवस्था करना, चीनी उद्योग का सुदृढ़ीकरण, पर्यावरण सुरक्षा, गन्ना शोध और परम्परागत खेती को बढ़ावा देना जैसे कार्यक्रम शामिल किये गये हैं।
गन्ना विकास मंत्री ने कहा कि प्रदेश के 5 लाख अंशधारक गन्ना किसानों को शेयर प्रमाण-पत्रों के वितरण का लक्ष्य रखा गया था, जिसके सापेक्ष निर्धारित समयावधि में सभी अंशधारक कृषक सदस्यों हेतु 50.10 लाख प्रमाण-पत्र तैयार कर लिये गये हैं। अंश प्रमाण-पत्र प्राप्त होने पर गन्ना कृषकों का गन्ना समितियोंध्चीनी मिल समितियों की वित्तीय प्रणाली पर विश्वास दृढ़ होगा। इससे सभी हित धारक पक्षों को सहकारी गन्ना समितियों के सुदृढ़ीकरण हेतु प्रेरणा प्राप्त होगी।


प्रदेश के लगभग 15 हजार गन्ना कृषकों को प्रशिक्षण प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया था, जिसके सापेक्ष उन्नत खेती हेतु 16,335 गन्ना कृषकों को विभाग द्वारा प्रशिक्षित कराया गया है। लक्ष्य के सापेक्ष लगभग 108ः की पूर्ति सुनिश्चित कर ली गई है। प्रशिक्षित कृषक गन्ने की उन्नत खेती के माध्यम से प्रति इकाई अधिक उत्पादन कर सकेंगे एवं आय में वृद्धि होने से गन्ना कृषक आत्मनिर्भर बनेंगे। अधिक गन्ना उत्पादन के माध्यम से गन्ना कृषक चीनी मिलों को स्वस्थ्य एवं ताजा गन्ना आपूर्ति करते हुए अधिक गन्ना वजन का लाभ प्राप्त करेंगे। चीनी मिलों के परता में भी वृद्धि होगी। प्रदेश के सभी 168 सहकारी गन्ना विकास समितियों एवं 152 गन्ना विकास परिषदों की ऑनलाइन कम्प्यूटराईज्ड बैलेंसशीट तैयार करने का लक्ष्य रखा गया था, जिसके सापेक्ष शत-प्रतिशत कार्य पूर्ण करते हुए सभी सहकारी गन्ना समितियों एवं गन्ना विकास परिषदों की कम्प्यूटराईज्ड बैलेंसशीट तैयार कर ली गयी है। इससे कृषक सदस्य पारदर्शी रूप से अपनी संस्था के वित्तीय कार्यकलापों पर दृष्टि रख सकंेगे एवं संस्था में वित्तीय अनुशासन भी कायम रहेगा।