अनजाने रिश्ते…..

आज भी मुझे याद आती है लुइस की आंखों से झरते हुए उसके आंसू । जब मैं अफ्रीका महादेश के एक छोटे से देश रवांडा पहुंचा था । मेरी जिंदगी के वो अनजाने लम्हे और वो क्षण मेरी जिंदगी में एक यादगार क्षण बन कर रह गई थी मेरे सामने थी रवांडा की एक लड़की जिसका नाम था लुइस वो २१ २२वर्षीया लड़की अफ्रीकन थी लेकिन उसकी शारीरिक देहयष्टि और चेहरे में गजब का आकर्षण था । नशीलीआंखें बड़ी बड़ी रंग सांवला । आसमानी जींस और सफेद शर्ट सर पर सफेद कैप और उसकी मीठी आवाज सहज ही किसी को आकर्षित करती थी एयरपोर्ट के निकट वहां की लोकल इंटरनेट कंपनी की मोबाइल सीम बिक्री करती थी उसके साथ एक और सहयोगी लड़की थी जो उसकी सहायता कर रही थी। । मैं रवांडा की राजधानी किगाली एयरपोर्ट से बाहर निकल कर अपने कंपनी के स्टाफ का इंतजार कर रहा था ।दिल्ली में ही कंपनी से मेरी बात हुई थी कि एक स्टाफ आपको किगाली एयरपोर्ट जाकर रिसीव कर लेगा ।शाम के ५ बज चुके थे लेकिन मेरी प्लैन लैंड कर चुकी थी मैंने अपना लगेज कलेक्ट किया और बाहर निकल पड़ा कि शायद मेरा रिसीवर बाहर ही होगा परंतु जब मैं बाहर निकला तो स्टाफ को न पाकर बाहर ही टहलने लगा । कुछ चिंताएं भी बढ़ रही थी की अब फोन से किस तरह अपने कार्यालय से संपर्क करूं लेकिन मेरी मोबाइल सीम तो इंडिया की थी जो इंडिया छोड़ते ही बंद हो चुकी थी और मैं परेशान हो रहा था कि किसी तरह मैं अपने रवांडा कार्यालय कार्यालय से संपर्क स्थापित कर सकूं ।इसी दौरान मेरी नजर लुईस पर पड़ी जो मोबाइल के सीम का प्रचार भी कर रही थी और बेच भी रही थी ।मैंने सोचा चलो इससे ही बात करता हूं और उसकी फोन से ही मैं अपने कार्यालय से बात भी कर लूंगा ।मैने अंग्रेजी भाषा में ही अभिवादन करते हुए उससे उसका नाम पूछा और बातचीत करने लगा ।मैने उससे मोबाइल की सीम खरीदने की अपनी इच्छा जाहिर की तो उसने अपनी पहचान पत्र या अपने कार्यालय द्वारा जारी पत्र की मांग की जो मेरे पास थी नही ।लेकिन उसने अपनी मोबाइल मुझे बात करने के लिए दी और मैंने उसके मोबाइल फोन से अपने ऑफिस में बात की तो पता चला की वो स्टाफ कबका निकल चुका है कार से कार का नंबर भी दिया और कहा आप वहीं वेट करें कार ५ मिनट के अंदर आपके पास पहुंच जाएगी ।

मैंने धन्यवाद देते हुए कहा ठीक है मैं यहीं बाहर में वो मोबाइल सीम बेचने वाली छत्री लगी स्टॉल पर खड़ा हूं ।लुइस ने मुझसे मेरा नाम पूछा और यहां आने की वजह पूछी मैंने बताया मैं इंडिया से हूं और यहां मैं एक प्रोजेक्ट में कार्य करने आया हूं ।इंडिया का नाम सुनते ही वो थोड़ा नाक मुंह सिकोड़ कर बोली हमलोग इंडियन्स को जानते हैं वो लोग अच्छे नहीं होते ।लेकिन मुझसे बात करते करते वो थोड़ी सहज महसूस करने लगी थी ।मैंने उससे फिर पूछा तुम मुझे अपना सीम दे सकती हो जो एक्टिव है जो कीमत होगी मैंडॉलर मैं दे दूंगा । उसे मुझपर विश्वास हो चुका था उसने कहा ऐसा तो होता नही पर मुझे तुमपर विश्वास है तुम अच्छे इंसान हो इसलिए मैं तुम्हे अपनी सीम दे देती हूं ।मैने कहा तुम मेरे पासपोर्ट की फोटोकॉपी रख लो और १०,डॉलर मैने उसे दे दिए लेकिन उसने कहा नहीं डॉलर लेकर मैं तुम्हे सीम नही दूंगी एक दोस्त की हैसियत से ही तुम्हे दे सकती हूं ग्राहक के तौर पर नही और मैने उसकी सीम ले ली । तबतक मेरे कंपनी की कार भी आ चुकी थी और मेरे कार ड्राइवर से उसने अपनी भाषा में बात की शायद मेरा ड्राइवर उसे पहचानता होगा ।फिर ड्राइवर ने भी अपनी पहचान पत्र उसे दे दी और उसने एक और सीम उसने दे दी और कहा अब तुम्हारे पास दो सीम हो गए दो कंपनी के हैं हमेशा कार्य करेंगे कोई दिक्कत नही होगी ।लेकिन उसकी आंखों में मेरे लिए कुछ अजीब सा आकर्षण था जिसे मैं समझ नहीं पा रहा था ।मेरी उम्र से उसकी उम्र में काफी अंतर था मैं उससे चलने की आज्ञा मांगी उसने अपनी हाथ आगे बढ़ाई मैने हाथ मिलाया और कार पर सवार होकर अपनी साइट के लिए निकल गया जो किगाली से २५०किलो मीटर दूर घने जंगलों में था गीताराम या मुंहगा के लिए जहां मेरा प्रोजेक्ट था । वहां कंपनी की कार के आलावा और कोई साधन नहीं थे यातायात के ।३० किलो मीटर की यात्रा के बाद ही पक्की सड़क थी मुहांगा जहां से बस टैक्सी या बाइक मिलती थी किराए पर ।मैने अपने साइट पर जाकर अपना योगदान किया और कार्य में व्यस्त हो गया । अचानक एक दिन लुइस का फोन आया और पूछने लगी आप कैसे हैं और किस तरह अपना कार्य संपादित कर रहे हैं मैने सब ठीक ठाक बताया और फोन रख दिया । हर दो चार दिन बाद उसके फोन आने लगे मैं भी उससे बात कर लेता था । फिर अचानक एक रात करीब १२ १ बजे उसकी फोन आती है मैं गहरी नींद में था लेकिन दो बार जब घंटी बजी तो उससे पूछा क्या बात है इतनी रात गए तुम मुझे क्यों फोन कर रही हो ? उसने कहा जब मैं कुछ परेशान हो जाती हूं तो आपसे बात कर लेती हूं तो मुझे लगता है कि मैं आराम महसूस करती हूं अगर आपको बुरा लगता हो तो नही करूंगी ।मैंने कहा नहीं ऐसी बात नहीं है लेकिन मेरे रूम पार्टनर की नींद डिस्टर्ब हो जायेगी इसलिए मुझे रात में नही अगर जरूरत हो तो मुझे दिन में फोन करना ।लेकिन उसने फोन करना जारी रखा ।


अवकाश के दिन हमलोग अपना कार्यक्रम किगाली के लिए बनाते थे जिसमे आवश्यक सामान की खरीददारी होती थी बाल कटाना आदि कार्यों के लिए किगाली ही कार द्वारा जाते थे । लुइस कालेज में पढ़ रही थी और वो एम ए की पढ़ाई के साथ कंपनी का सीम बेचने का भी कार्य करती थी ।गरीबी थी लेकिन स्वाभिमानी लड़की थी अविवाहित थी १९९४ के जेनोसाईड में उसके माता पिता और भाई बहन मारे गए थे ।वो अपने नाना नानी के घर रहती थी और पढलिख कर कुछ करना चाहती थी ।लेकिन इंडियन के प्रति उसकी अच्छी राय नहीं थी और झूठा बेईमान धोखेबाज फ्लर्ट करना और सेक्स करना और इंडिया भाग जाने की कई कहानियां उसने मुझे सुनाई थी । इसपर मैं हमेशा एक ही उत्तर देता था तुम इंडियंस से मिली हो पर अभी तक भारत वासी से नही मिली हो और मैं भारतवासी हूं ये याद रखना । वो मुझसे पूरी तरह आकर्षित हो चुकी थी ,लेकिन मैं उससे सहानुभूति रखने लगा था,उसके कई कारण थे ।अचानक वो एक दिन अपनी तीन कालेज की सहेलियों के साथ कार से मेरे साइट पर पहुंचती है ।अचानक उसके आने से और मुझे ढूंढने से कई पूरे साइट में बात फैल गई कोई लड़की मुझसे मिलने किगाली से आई है बहुत खूबसूरत और यंग है लेकिन वो कैसे आ गई ।मुझसे मिलने पर मैने उससे पूछा अचानक कैसे आना हुआ वो भी इतनी दूर घने जंगलों में ।उसने कहा मुझे आपको देखना था और इन दोनो को प्रोजेक्ट देखना था इसलिए इनके साथ आ गई आपको बुरा लगा । मैने कहा नहीं बुरा मुझे तो नही लगा लेकिन लोग क्या सोचेंगे, चलो कोई बात नही फिर अपने मेस ले जाकर खाना खिलाया और प्रोजेक्ट दिखाने ले गया और वो सब घूमकर किगाली चली गई ।


इधर पूरे प्रोजेक्ट में खलबली मच गई ये तो चमत्कार हो गया किगाली से मिलने के लिए सुंदर और जवान लड़कियां आई थी मिलने ।फोन पर बातें चलती रही और एक दिन उसने जिद की आप किगाली आओ ।इधर मेरे प्रोजेक्ट इंचार्ज के कानों में भी बात पड़ चुकी थी वो मेरे पीछे पड़े थे और कार लेकर जाने की बात करता तो वो कहते तुम मेरे साथ चलना अगर तुम जाओगे तो मैंने कहा कल संडे हैं कल ही जाना है । उन्होंने कहा कल सुबह चलना और दूसरे दिन हमलोग निकल पड़े ।हमलोग किगाली पहुंचे और प्रोजेक्ट इंचार्ज को को छोड़ मैं लुइस से मिलने एक होटल पहुंचा जहां उसके साथ रेस्तरां में टेबल पर उसके क्लास को ७_८ लड़कियां बैठी थी । मैने सबका अभिवादन किया और एक खाली कुर्सी पर बैठ गया ।चाय नाश्ते के बाद लुईस एक पुस्तक मेरे सामने रखती है मैंने पूछा ये क्या है ? उसने कहा ये हमारा पवित्र ग्रंथ बाइबिल है ।और उसने बाइबिल की कथाओं का जिक्र करते हुए कहा कि हमलोग क्रिश्चियन हैं और इसे सामने रखकर आपसे बात करती हूं ।आप क्रिश्चियन धर्म अपना लो ।मैने पूछा क्यों ?,उसने कहा ताकि हमारे मध्य कोई गंदी विचार धारा न रहे और हम एक सच्चे दोस्त बनकर रहें ।मैने कहा ये तो हमारे शास्त्र और पुराण हमें बचपन से इसकी शिक्षा देते हैं और तुम तो उम्र में मुझसे बहुत छोटी है तो किसी अपवित्र रिश्ते की कल्पना भी मैं नहीं कर सकता हां एक सच्चे दोस्त बनकर हमलोग अवश्य मिलते रहेंगे और मैंने सनातन धर्म के विषय पर बोलना प्रारंभ किया कि सनातन धर्म तो वो विशाल बरगद के पेड़ की तरह है जिसकी छाया में समस्त संसार के प्राणियों के लिए छाया देती है हर प्राणियों के कल्याण की बात करती है प्रकृति के हर स्वरूप को हम पूजते हैं हर धर्म के मानने वालों का हम सम्मान करते हैं हमारे लिए हर प्राणी पशु जंगल पहाड़ नदियां सूर्य चंद्रमा मंगल शनि बुद्ध हर दिन पूजनीय होता है अतिथि हमारे लिए देवता स्वरूप होते हैं धरती आकाश और पाताल लोक अंतरिक्ष का ज्ञान शून्य का ज्ञान हमें हमारे पूर्वजों ने दिया है जिसमे हजारों देवी और देवता हैं जिसे आप चुन लो वही देवता आपके कल्याण के लिए उपस्थित होते हैं इतने विशाल और विस्तृत सनातन धर्म को छोड़कर मैं क्यों किसी अन्य धर्म को अपनाएं । आप सिर्फ यीशु और बाइबिल को पढ़ती हैं लेकिन सनातन धर्म तो ईशा के पहले से इस संसार में है और बचपन से हमारे संस्कार और कर्म परंपराएं हमे मार्ग से भटकने से हमे बचाते हैं मेरे तर्क के आगे सभी चुप थे ।

मेरी तर्कों और बहस के बाद उन सबने माना कि सत्य में सनातन धर्म शाश्वत , सरल और सत्य है जो अद्भुत और बेमिसाल है ।तीन घंटे बीत चुके थे मुझे समझाने में लेकिन अनलोगों ने अपने हथियार डाल दिए थे । मैं उन लोगों से विदा लेकर अपने प्रोजेक्ट इंचार्ज के साथ फिर अपने साइट पर आ गया ।फोन पर बातें होती रहती थी उसे जब कोई अपनी परेशानी होती थी या मन नहीं लगता तो मुझे फोन कर लेती थी मैं उसे उचित सलाह दे दिया करता था ।एक बार उसने कहा आपको मैं अपने नाना और नानी से मुलाकात कराऊंगी जो किगाली से थोड़ी दूर रहते हैं दिखाऊंगी उन्हें कि मेरे दोस्त कैसे हैं ,मैने कहा कभी साइट से फुरसत मिली तो अवश्य जाऊंगा और एक दिन रविवार को १० बजे अपनी कार लेकर मेरे साइट पर आ गई ।वो बहुत खुश थी मैंने कहा शाम होते ही मुझे लौटना पड़ेगा उसने कहा मैं आपको धाम तक वापस छोड़ दूंगी ।वो मुझे लेकर अपने घर गई और सबों से मेरा एक दोस्त के रूप में परिचय देकर बात कराती रही ।कुछ फल और कोल्ड ड्रिंक्स लेकर बात करता रहा और मैं बात करते करते घड़ी भी देख रहा था मैंने समय की ओर इशारा किया कि अब वापस लौटना है तो उसके चेहरे पर उदासी छा गई लेकिन वो चाहती थी मैं उस रात उसके घर पर रुक जाऊं जहां सिर्फ उसके नाना और नानी के अलाबे और कोई नही रहते थे ।उसके आग्रह पर मैं भी कुछ सोच नही पा रहा था लेकिन मैं अपने प्रोजेक्ट प्रबंधक और साइट के अन्य लोगों की नजरों में गिरना नही चाहता था और मैने निश्चय कर लिया अब फौरन मुझे यहां से निकलना पड़ेगा और मैं लुइस के साथ पुनः कार से अपनी साइट के लिए निकल पड़ा । कार की पिछली सीट पर हम दोनो बैठे थे और ड्राइवर कार चला रहा था ।वो गुमसुम बैठी थी मैं समझ चुका था मेरे लिए उसके दिल में कुछ और ही चल रहा था ।अचानक उसने मेरे चेहरे को दोनो हाथों से पकड़ा और एक किस मेरे होठों पर लगा दी , मैं अवाक था ड्राइवर भी लुकिंग ग्लास से देखकर मुस्कुरा उठा था ।मैंने कहा लुइस ये गलत है और तुम मुझे गलत रास्ते पर ले जा रही हो । मैं उससे थोड़ी दूरी बनाकर बैठ गया लेकिन वो मुझसे लिपटने की कोशिश कर रही थी और कह बैठी आई लव यू ।मैने उसे बहुत समझाया मैं तुमसे उम्र में बहुत बड़ा हूं और मैं प्रोजेक्ट पूरा होने पर यहां से चला जाऊंगा मेरी पत्नी है बच्चे हैं मैं तुम्हारे साथ नही रह सकता हूं और कोई रिश्ता नहीं बना सकता हूं लेकिन वो मानने के लिए तैयार ही नहीं थी आखिर में उसे मुझे कहना पड़ा तुम तो कहती थी इंडियंस बहुत गंदे होते हैं और यहां लड़कियों से दोस्ती कर उन्हें प्रेगनेंट कर देते हैं और इंडिया चले जाते हैं तुम भी तो वही करने जा रही हो जो और करते थे फिर मुझमें और उन इंडियंस में क्या अंतर रह जाएगा इसलिए मैं तुम्हारे इस रिश्ते को कभी स्वीकार नहीं करूंगा ।


उसकी आंखों से आंसू गिरने लगे थे और मैने अपनी रुमाल उसकी ओर देते हुए कहा आंसू पोंछ लो और और तुम शादी कर लो जब तुम शादी करोगी और बुलाओगी तो मुझसे ज्यादा खुश और कोई नही होगा ।लेकिन एक बात उसकी मुझे आज भी याद आती है तुम इंडियन नही हो सकते मुझे विश्वास नहीं हो रहा ।मैंने पूछा ऐसा क्यों?,उसने कहा तुम्हारी तरह कोई दूसरा। इंसान नही हो सकता मैने हर संभव प्रयास किया कि तुम मेरे प्रेम में पड़कर मुझसे शादी कर लो लेकिन तुम पत्थर की तरह मूर्ति बनकर बैठे रहे न तुमने टच किया न कोई मेरे प्रेम के इजहार पर कोई प्रतिक्रिया दी ।इसलिए तुमपर मेरा प्यार और सम्मान दोनो बढ़ गया है । तबतक मैं अपनी साइट कैंप पहुंच गया था और लुइस अपने कार से वापस लौट चुकी थी ।लुइस के प्रति मेरे दिल में एक अवसाद सा पैदा हो रहा था कि उसके दिल में मेरे लिए इस रिश्ते के विचार कैसे और क्यों आए ।मेरा दिल और दिमाग दोनो स्थिर हो गया था ।उसके बाद फिर उसका फोन कई बार आया और एक दोस्त की तरह मैं उससे मिला भी ।जब मैं इंडिया वापस आ रहा था एयरपोर्ट मुझे छोड़ने आई और मुझसे लिपट कर रोने लगी मैंने कहा था अपनी शादी में बुलाना मुझे भूल मत जाना और मैं एयरपोर्ट के अंदर आ गया था । कई बार उसके फोन इंडिया आने के बाद भी आई मेरे बच्चों से भी बात करती थी और कहती थी दिलीप इज ए ग्रेट मैन । [/Responsivevoice] न्यूज़ ऑफ इंडिया ( एजेंसी)